मजदूर नेता शंकर गुहा नियोगी के हत्यारे की ये कहानी नहीं जानते होंगे आप, सीबीआई ने ऐसे किया था गिरफ्तार
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छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और मजदूर नेता शंकर गुहा नियोगी की महज 48 साल की उम्र में हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि 28 सितंबर 1991 को छत्तीसगढ़ के मशहूर मजदूर नेता को दुर्ग स्थित उनके अस्थायी निवास पर तड़के चार बजे के करीब खिड़की से निशाना बनाकर गोली मारी गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
शंकर गुहा नियोगी देश के जाने माने श्रमिक नेता थे, ऐसे में सीबीआई ने जांच शुरू की तो उसमें पलटन मल्लाह का नाम भी सामने आया। पलटन गोरखपुर जिले का झगहा थाना क्षेत्र के निबोही गांव का मूल निवासी था। वह रोजी रोटी के लिए भिलाई में रहता था।
मजदूर नेता शंकर गुहा की हत्या के ठीक बाद वह घर वापस आया लेकिन गांव न आकर अपनी बहन के यहां रहने लगा था। उसकी बहन की शादी गोरखपुर के खोराबार थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव में हुई थी। उधर सीबीआई की जांच में पलटन का नाम आ गया। सीबीआई की एक टीम गोरखपुर आ गई और उसे पकड़ने के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया।
पलटन काट रहा आजीवन कारावास की सजा
इसकी भनक पलटन को लग गई, वह बहन के यहां से भाग निकला। सीबीआई ने उसकी बहन सहित गांव के कई नाव चलाने वाले मल्लाहों को हिरासत में लिया था। सीबीआई जब इन्हें लेकर जाने लगी तो गांव के तत्कालीन प्रधान श्रीनिवास पांडेय इस बात पर अड़ गए कि उन्हें लेकर वे कहीं नहीं जा सकते हैं। इस पर सीबीआई उन्हें भी उठाकर ले गई।
आजीवन कारावास की सजा काट रहा पलटन
बताया जाता है कि प्रधान सहित अन्य लोगों को सीबीआई ने बहुत टॉर्चर किया था, इसके बाद उन्होंने पलटन के सभी ठिकानों का पता बता दिया था। कई जगह छापेमारी करने के बाद सीबीआई पलटन को मिर्जापुर में पकड़ ली। सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी होते ही पलटन सुर्खियों में आ गया।
इसके बाद लोगों को उसके बारे में पता चला कि वह कितना खूंखार अपराधी है। पलटन पर भिलाई के दुर्ग न्यायालय में हत्या का मुकदमा चला, इसमें पलटन सहित छह अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसमें कई उद्योगपति भी शामिल थे।
निचली अदालत से पलटन को फांसी और उद्योगपति सहित अन्य 6 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। इसके बाद मामला जबलपुर उच्च न्यायालय के पास पहुंचा तो उन्होंने पलटन की फांसी की सजा बरकरार रखी व अन्य अभियुक्तों को बरी कर दिया।
इसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में मामला दाखिल किया, वहां पलटन की फांसी आजीवन कारावास में तब्दील हो गई। पलटन आज भी छत्तीसगढ़ में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। वहीं मिर्जापुर गांव के प्रधान सोनू पांडे बताते हैं कि जब पलटन को सीबीआई खोज रही थी और लोगों को उठाना शुरू किया तो गांव में दहशत का माहौल हो गया था। गांव के युवा और अधेड़ घर छोड़कर फरार हो गए थे। उसकी चर्चा आज भी गांव में होती है।