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Shani pradosh vrat: भगवान शिव के साथ शनिदेव की कृपा प्राप्ति के लिए करें शनि प्रदोष व्रत, ये है पूजा विधि
Sat, 12 Dec 2020 12:00 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 12 Dec 2020 12:00 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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एक माह में दो पक्ष होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस तरह से हर माह में दो प्रदोष व्रत आते हैं। प्रदोष व्रत जिस वार को पड़ता है, उसी के अनुसार उसका नाम होता है। इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को यानी आज पड़ा है इसलिए इसे शनि प्रदोष कहा जा रहा है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है।
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ज्योतिषियों की माने तो शनि प्रदोष व्रत करने से श्रद्धालुओं को भगवान शिव के साथ ही शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति प्रदोष व्रत रखता है, उसे सभी रोग-दोषों से मुक्ति मिलती है। कहते हैं कि ऐसे व्यक्ति की कुंडली के सभी दोष भी खत्म हो जाते हैं।
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शनि प्रदोष की पूजा विधि
ज्योतिषाचार्य पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार शनि प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करें। उनके मंत्रों का जप करें। सुबह भगवान शिव को बेलपत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप अर्पित करें। शनि प्रदोष व्रत का संकल्प लें और दिन पर व्रत रखें। संध्या के समय जब सूर्य अस्त हो और रात्रि का आगमन हो, उस समय को प्रदोष काल कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव साक्षात शिवलिंग में प्रकट होते हैं। इसीलिए इस समय शिव का स्मरण करके उनका पूजन किया जाए तो उत्तम फल मिलता है।