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बीआरडी मेडिकल कॉलेज: स्वास्थ्य कर्मियों को मानदेय तो मिला नहीं, कार्य मुक्त का मिल गया नोटिस

Wed, 30 Jun 2021 01:58 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 30 Jun 2021 01:58 PM IST
सार

एक जुलाई से नहीं ली जाएंगी मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य कर्मियों से सेवा। एक निजी कंपनी के माध्यम से की गई थी बीआरडी में कर्मियों की नियुक्ति।
 

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Services from health workers in Gorakhpur BRD Medical College will not be taken from first July
स्टाफ नर्सों ने प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर वेतन सहित 25 फीसदी प्रोत्साहन राशि देने की मांग की है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान एक निजी कंपनी के माध्यम से नियुक्त किए गए 350 स्वास्थ्य कर्मियों को कार्य मुक्त करने का आदेश दिया गया है। आदेश में एक जुलाई से सेवा नहीं लेने की बात कही गई है। जबकि इन कर्मियों को अब तक तीन माह का मानदेय नहीं मिला है। इस बारे में स्टाफ नर्सों ने प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर वेतन सहित 25 फीसदी प्रोत्साहन राशि देने की मांग की है।
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जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान एक निजी कंपनी के माध्यम से 150 स्टाफ नर्स और 100-100 वार्ड ब्वॉय व सफाई कर्मियों की अप्रैल माह में नियुक्ति की गई थी। अब जबकि संक्रमण खत्म होने को है तो कर्मियों से काम लेना बंद कर दिया गया है। जबकि सितंबर में तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। इन कर्मियों को कार्य मुक्त करने से जब तीसरी लहर आएगी तो दिक्कत हो सकती है।
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पहली लहर के बाद भी निकाले गए थे कर्मी
बता दें कि पहली लहर में भी कर्मियों से ड्यूटी लेकर हटा दिया गया था। इस मामले में कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन से लेकर डीएम और कमिश्नर तक को ज्ञापन भी दिया था। लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें समायोजित नहीं किया। जब दूसरी लहर आई तो मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इन कर्मियों को फिर से काम पर बुलाया, लेकिन कोई नहीं आया। अब एक बार फिर दूसरी लहर के दौरान नियुक्त कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। वह भी तब जबकि तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है।
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चार-पांच माह लगेंगे मानदेय मिलने में
प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना महामारी के लिए ही तैनात किया गया था। इसकी जानकारी उन्हें दे दी गई थी। मानदेय के बारे में शासन को पत्र लिखा गया है। मंजूरी मिलने में चार-पांच माह लग सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इन कर्मियों को फिर से बुलाया जा सकता है। जरूरत पड़ी तो उन्हें समायोजित भी किया जा सकता है।
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