गोरखपुर: शवदाह गृहों में संक्रमित शव के लिए अलग जगह, यहां रख सकेंगे अस्थि कलश
पंचायतीराज विभाग ने जिले में बनवाए हैं 21 शवदाह गृह, सभी को दो हिस्सों में बांटा गया, मेयर के प्रयास से राजघाट अंत्येष्टि स्थल के पास कराया गया लॉकर का निर्माण
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गोरखपुर कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पंचायतों में बने शवदाह गृहों को पंचायतीराज विभाग ने दो भागों में बांट दिया है। अब आधे भाग में सामान्य और अन्य भाग में कोरोना संक्रमित शवों का कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार होगा। विभाग की तरफ से जिले में 21 शवदाह गृह बनाए गए हैं और इस व्यवस्था के बारे में जिला प्रशासन को सूचना भी भेज दी गई है।
दरअसल कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है। शहर एवं उसके आसपास कोरोना संक्रमण से मरने वालों का अंतिम संस्कार तो शहर के राजघाट पर ही हो रहा है, मगर तमाम गांवों में ऐसे शवों का अंतिम संस्कार पंचायतीराज विभाग द्वारा बनवाए गए शवदाह गृहों पर ही किया जा रहा है। ऐसे में पंचायती राज विभाग ने गांवों के शवदाह स्थलों को दो भागों में बांट दिया है, ताकि यहां पहुंचने वाले लोगों को संक्रमण से बचाया जा सके।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा पंचायती राज विभाग की ओर से बनवाए गए शवदाह गृहों पर कोविड संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार के लिए अलग व्यवस्था की गई है। शासन की ओर से भी इसकी सूचना मांगी गई थी। जिले में 21 शवदाह गृह पर यह व्यवस्था हुई है, उसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
अब सुरक्षित रखे जा सकेंगे अस्थि कलश
राजघाट अंत्येष्टि स्थल पर अब अस्थि कलशों को सुरक्षित रख सकेंगे। मेयर सीताराम जायसवाल के प्रयास से इंफोर्समेंट टीम के प्रभारी कर्नल सीपी सिंह ने यहां लकड़ी के तीन लॉकरों का निर्माण कराया है। यह व्यवस्था पूरी तरह से निशुल्क होगी।
दरअसल अग्रवाल समाज में ऐसी परंपरा है कि किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के बाद अंत्येष्टि स्थल पर ही 3 दिनों तक अस्थि कलश रखा जाता है। लेकिन नगर निगम की ओर से निर्मित राजघाट अंत्येष्टि स्थल पर ऐसे अस्थि कलशों को सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी। इस संबंध में अग्रवाल समाज की ओर से मेयर सीताराम जायसवाल को जानकारी देने के साथ ही राजघाट अंत्येष्टि स्थल के पास इन अस्थि कलश को सुरक्षित रखने के लिए लॉकर के निर्माण की मांग की गई थी।
मेयर के निर्देश पर नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने इंफोर्समेंट टीम के प्रभारी कर्नल सीपी सिंह को इसे बनवाने की जिम्मेदारी दी। कर्नल सीपी सिंह ने इसे अपने खर्चे पर बनवाने का निर्णय लिया और यहां नौ लकड़ी के लॉकर बनवाए। मोहम्मद फैज और महेंद्र मद्धेशिया नाम के व्यक्ति ने भी अपनी ओर से सहायता राशि देकर निर्माण कराया। कर्नल सीपी सिंह ने बताया कि अग्रवाल समाज के कोई भी व्यक्ति अपने किसी भी परिजन के अस्थि कलश को इन लॉकर में आसानी से रख सकेगा। ताला चाबी उसी का होगा। अपने समाज के नियमानुसार निर्धारित तिथि पर अस्थि कलश को ले जाकर विसर्जित कर सकेंगे।