Gorakhpur News: गोरखपुर में मजदूर पंचायत और एसई के बीच हाथापाई, वीडियो वायरल
मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने बीते दिनों आदेश जारी कर किसी भी वर्ग के तबादलों पर मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी होगा। लेकिन, इसके बाद भी तबादले और नियुक्ति का दबाव बनाया जा रहा था। मौजूद अभियंताओं ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि बिना मुख्यमंत्री के अनुमोदन के ये संभव ही नहीं, फिर ये दबाव क्यों बनाया जा रहा था?
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ग्रामीण विधायक विपिन सिंह की शिकायत पर दो महीने पहले हटाए गए निविदा कर्मचारी की फिर से तैनाती को लेकर मजदूर पंचायत संगठन और अधीक्षण अभियंता (एसई) के बीच वार्ता विफल हो गई। तथाकथित कर्मचारी नेताओं की मांग थी कि एक टीजी-टू कर्मचारी को जेएमटी बना दिया जाए।
मांगों पर अधीक्षण अभियंता की असहमति पर कर्मचारी नेताओं ने उनके कमरे के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप-प्रत्यारोप के बीच बात हाथापाई तक पहुंच गई। इसी बीच पूरी घटना का किसी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
मजदूर पंचायत संगठन की तरफ से सूरजकुंड बिजली घर पर तैनात संविदाकर्मी पर आरोप लगाते हुए विधायक ने हटाने की मांग की थी। पत्र का संज्ञान लेने और जांच रिपोर्ट के आधार पर अधीक्षण अभियंता ने उसे बिजलीघर से हटा दिया था। इन मुद्दों पर वार्ता के लिए अधीक्षण अभियंता ने संगठन के चार सदस्यों को बृहस्पतिवार को वार्ता के लिए बुलाया था।
संगठन के कथित जोनल सेक्रेटरी संदीप श्रीवास्तव व अन्य नेताओं का कहना है कि एसई की हठधर्मिता की वजह से वार्ता विफल हो गई। उसके बाद हम केबिन से निकल कर नारेबाजी करने लगे। उसी दौरान नगरीय एसई पदाधिकारियों पर आरोप लगाते हुए गलत शब्दों का प्रयोग करने लगे और वह खुद हाथापाई करने लगे। मौके पर मौजूद शहरी क्षेत्र के चारों खंडों के अधिशासी अभियंताओं ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
सेवानिवृत बिजली कर्मचारी व संगठन के संरक्षक इस्माइल खान ने कहा कि एसई की तानाशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संगठन नोटिस देकर के उनके खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाएगा। इस दौरान महेंद्र नाथ साहनी, संदीप कुमार श्रीवास्तव, अरुण कुमार गुप्ता, राणा साहनी, दयानंद, शिबू सुभाष विश्वकर्मा, अशोक कुशवाहा, गोविंद, विवेक, राजेश समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
संविदाकर्मी की तैनाती का बना रहे थे दबाव : एसई
अधीक्षण अभियंता यूसी वर्मा ने बताया कि ग्रामीण विधायक की शिकायत पर संविदाकर्मी को हटाया गया था। मजदूर पंचायत संगठन के पदाधिकारी अपने समर्थकों के साथ उसी संविदा कर्मचारी की फिर से तैनाती किए जाने का दबाव बना रहे थे। इसके साथ ही कथित कर्मचारी नेता एक एसएसओ को जेमएटी बनाने का भी दबाव बना रहे थे। वार्ता के दौरान हमने इंकार कर दिया।
इसे करने में शासकीय अक्षमता बताने पर कर्मचारी और तथाकथित कर्मचारी नेताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। कक्ष के बाहर से ही अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे कमरे के बाहर अपमानजनक रवैया अख्तियार करते हुए अपनी बात मनवाने का दबाव बनवा रहे थे। सबसे अधिक दुर्व्यवहार जोनल सचिव संदीप श्रीवास्तव ने किया। वह बिजली निगम के कर्मचारी भी नहीं हैं। ना ही संविदाकर्मी हैं, फिर भी पता नहीं कैसे संगठन के लोगों ने उन्हें अपने संगठन में रख लिया है।
मुख्य सचिव ने तबादलों पर लगाई रोक, सीएम की सहमति होगी जरूरी
मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने बीते दिनों आदेश जारी कर किसी भी वर्ग के तबादलों पर मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी होगा। लेकिन, इसके बाद भी तबादले और नियुक्ति का दबाव बनाया जा रहा था। मौजूद अभियंताओं ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि बिना मुख्यमंत्री के अनुमोदन के ये संभव ही नहीं, फिर ये दबाव क्यों बनाया जा रहा था?