PPganj: नगर पंचायत अध्यक्ष पीपीगंज के वित्तीय अधिकारों पर चली कैंची
पीपीगंज नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी पर क्षेत्र के सभासदों ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही 32 बिंदुओं का शिकायती पत्र बनाकर जिलाधिकारी विजय किरन आनंद को दिया था।
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वित्तीय अनियमितता के आरोपों से घिरे पीपीगंज नगर पंचायत के अध्यक्ष गंगा प्रसाद जायसवाल और अधिशासी अधिकारी महेंद्र पांडेय के वित्तीय अधिकार कम कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने की है। अब अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी निर्माण व वाहनों के संचालन से जुड़े भुगतान नहीं कर सकेंगे।
इसकी पुष्टि अपर जिलाधिकारी प्रशासन पुरुषोत्तम दास गुप्ता ने भी की है। अपर जिलाधिकारी का कहना है कि नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी सिर्फ कर्मचारियों के वेतन, पेंशन व कार्यालय के कुछ जरूरी भुगतान ही कर पाएंगे। प्रारंभिक कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, पीपीगंज नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी पर क्षेत्र के सभासदों ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही 32 बिंदुओं का शिकायती पत्र बनाकर जिलाधिकारी विजय किरन आनंद को दिया था। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन, मुख्य कोषाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की अगुवाई वाली जांच समिति गठित करके रिपोर्ट तलब की थी।
समिति ने मौके पर जाकर जांच की और रिपोर्ट गत चार मई 2022 को ही जिलाधिकारी को सौंप दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर ही जिलाधिकारी ने नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी के वित्तीय अधिकारों पर कैंची चलाई है। जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है। नियम व प्रक्रिया का पालन न किए जाने का जिक्र भी है।
जांच में मिलीं ये गड़बड़ियां
- नगर पंचायत अध्यक्ष अपने निजी कार्यों के लिए जेसीबी का इस्तेमाल करते हैं। इसके एवज में निर्धारित धनराशि नगर पंचायत के बैंक खाते में नहीं जमा कराया, जो कि कदाचार की श्रेणी में आता है।
- मार्च 2022 में 88 कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया गया, जबकि उपस्थिति 69 कर्मचारियों की दिखाई गई। इसका मतलब है कि बिना काम के ही 19 कर्मचारियों को वेतन दिया गया।
- नगर पंचायत क्षेत्र में काम करने वाले कुछ ठेकेदारों ने अध्यक्ष गंगा प्रसाद जायसवाल के भट्ठे से गंगा मार्क ईंट लिया है।
- वाहनों के लॉग बुक पर वाहन व उसके चालक का नंबर नहीं दर्ज किया गया। यह भी नहीं बताया गया कि वाहनों का इस्तेमाल कहां और किस लिए किया जाता है।
- निर्धारित प्रक्रिया के बगैर ही वाहनों में डीजल-पेट्रोल भरवाया गया। बिना किसी सक्षम स्तर के सत्यापन के ही भुगतान कर दिया गया। सालाना बजट कभी प्रस्तुत नहीं किया जाता है।
- नगर पंचायत पीपीगंज कार्यालय की तरफ से अध्यक्ष के प्रतिनिधि की व्यवस्था नहीं है, लेकिन अध्यक्ष के बेटे महेश जायसवाल प्रतिनिधि बनकर घूमते हैं।
- कैंपियरगंज के उपजिलाधिकारी ने अगस्त 2021 में पीपीगंज नगर पंचायत का निरीक्षण किया था। 41 कर्मचारी अनुपस्थित मिले थे, जिनके खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं की गई।
- बिना बिल बाउचर के ही शिष्टाचार व्यय यानी अतिथियों के स्वागत-सत्कार पर किए जाने वाले खर्च का भुगतान किया गया।
- बालू व मोरंग की आपूर्ति में भू-तत्व व खनिकर्म की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।
वित्तीय अधिकार सीज होने का खतरा
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अनियमितता में नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी के वित्तीय अधिकार कम किए गए। साथ ही रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। अगर जांच रिपोर्ट से शासन संतुष्ट हुआ तो नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशासी के वित्तीय अधिकार भी सीज किए जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो नगर पंचायत का संचालन प्रशासक करेगा। ऐसा पहले कई नगर पंचायतों में हो चुका है। सामान्य तौर पर प्रशासक की जिम्मेदारी तहसील क्षेत्र के उपजिलाधिकारी को मिलती है।
सभासद खुश, बोले-अब शासन से कार्रवाई की उम्मीद
जांच में पीपीगंज नगर पंचायत की गड़बड़ी पकड़ी गई है। इसपर सभासद सीमा भारती, नीलम देवी, मोहम्मद अताउल्लाह, रिंकल यादव, मोहम्मद जावेद, गणेश मद्धेशिया, अरविंद अग्रहरी, मनोरमा जायसवाल और मनोनीत सभासद कमलेश वर्मा ने खुशी जताई है। साथ ही कहा कि संघर्ष रंग लाया है। नगर पंचायत और अधिशासी अधिकारी की मिलीभगत से होने वाली गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है। अब शासन स्तर से कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।
गोरखपुर डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि जांच में अनियमितता की पुष्टि हुई है। लिहाजा, बैंक खातों के संचालन पर रोक लगाई है। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। वित्तीय अधिकार शासन ही सीज कर सकता है।
पीपीगंज नगर पंचायत अध्यक्ष गंगा प्रसाद जायसवाल ने कहा कि एक रुपये की अनियमितता नहीं की है। जिलाधिकारी ने वित्तीय अधिकार जरूर कम किए हैं। इसका असर नगर पंचायत के साफ-सफाई व निर्माण कार्यों पर पड़ेगा। अनियमितता जैसी कोई बात नहीं है। सभासदों की शिकायतें ही फर्जी हैं।