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सांसों को मिलेगी संजीवनी: गोरखपुर में जंबो सिलिंडर से दूर होगी ऑक्सीजन आपूर्ति की किल्लत, अस्पतालों को मिलेगी राहत
Sat, 26 Jun 2021 03:41 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 26 Jun 2021 03:41 PM IST
सार
अस्पतालों में 190 लीटर वाले इन सिलिंडरों के जरिए पहुंचाई जाएगी ऑक्सीजन गैस। आरके ऑक्सीजन ऐसी 10 सिलिंडरों की कर रहा खरीद, सिलिंडरों की किल्लत होगी दूर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन गैस और सिलिंडरों की जिस तरह से किल्लत हुई थी, वैसी तीसरी लहर में न हो इसकी कोशिशें शुरू हो गई हैं। पिछली संकट से सबक लेते हुए गोरखपुर के गीडा की आरके ऑक्सीजन कंपनी 190 लीटर की क्षमता वाले 10 जंबो सिलिंडर की खरीद कर रही है। इन सिलिंडरों से कंपनी संबद्ध अस्पतालों में ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति करेगी।
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन गैस की मांग काफी बढ़ गई थी। इस कारण ऑक्सीजन गैस सिलिंडरों की मांग भी बढ़ गई थी, जिससे गैस सिलिंडरों की किल्लत हो गई थी। इसका फायदा उठाकर कई मुनाफाखोरों ने 30 से 50 हजार रुपये में एक सिलिंडर की बिक्री की थी, जबकि सामान्य तौर पर एक सिलिंडर की कीमत सात हजार रुपये ही होती है।
ऑक्सीजन प्लांटों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति की थी। व्यक्तिगत तौर पर हर जरूरतमंद को सिलिंडर उपलब्ध करा पाना काफी मुश्किल था।
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इन सारी स्थितियों का सामना करने और जरूरतों को देखते हुए आरके ऑक्सीजन कंपनी 190 लीटर की क्षमता वाले 10 बड़े सिलिंडरों की खरीद करने का निर्णय लिया है, इनमें से एक ही सिलिंडर में 25 सिलिंडर क्षमता जितनी गैस भरी जा सकेगी।
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कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन गैस की मांग काफी बढ़ गई थी। इस कारण ऑक्सीजन गैस सिलिंडरों की मांग भी बढ़ गई थी, जिससे गैस सिलिंडरों की किल्लत हो गई थी। इसका फायदा उठाकर कई मुनाफाखोरों ने 30 से 50 हजार रुपये में एक सिलिंडर की बिक्री की थी, जबकि सामान्य तौर पर एक सिलिंडर की कीमत सात हजार रुपये ही होती है।
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ऑक्सीजन प्लांटों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति की थी। व्यक्तिगत तौर पर हर जरूरतमंद को सिलिंडर उपलब्ध करा पाना काफी मुश्किल था।
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इन सारी स्थितियों का सामना करने और जरूरतों को देखते हुए आरके ऑक्सीजन कंपनी 190 लीटर की क्षमता वाले 10 बड़े सिलिंडरों की खरीद करने का निर्णय लिया है, इनमें से एक ही सिलिंडर में 25 सिलिंडर क्षमता जितनी गैस भरी जा सकेगी।
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केन में भी उपलब्ध होगी ऑक्सीजन गैस
जंबो सिलिंडर मेडिकल ऑक्सीजन के लिए ही बनाए जाते हैं। हरेक रिफिलिंग से पहले उन्हें नाइट्रोजन गैस से विसंक्रमित किया जाएगा। इसके बाद अस्पतालों में पहुंचाया जाएगा। इससे कंपनी को परिवहन में काफी राहत मिलेगी। अस्पताल को भी ऑक्सीजन गैस को व्यवस्थित करने में आसानी होगी। खर्च में भी कमी आएगी।
आरके ऑक्सीजन के निदेशक अजय जायसवाल ने बताया कि आइनॉक्स कंपनी से 10 बड़ी क्षमता वाले लिक्विड ऑक्सीजन सिलिंडर की खरीद की जा रही है। इसके लिए ऑर्डर भी दिया जा चुका है। इस सिलिंडर में 25 सिलिंडरों जितनी गैस भरी जा सकती है। इसकी क्षमता 190 लीटर की है। आरके ऑक्सीजन से जितने अस्पताल संबद्ध हैं, उन अस्पतालों में इन बड़ी क्षमता वाले सिलिंडरों की आपूर्ति की जाएगी।
भविष्य में जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कंपनियां पोर्टेबल केन में भी ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही हैं। अजय जायसवाल ने बताया कि 1.6 लीटर क्षमता के केन में ऑक्सीजन गैस उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इस केन में उपलब्ध ऑक्सीजन को ठीक उसी तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा जैसे सांस के मरीज इनहेलर का करते हैं। केन में डेढ़ से दो घंटे तक के लिए ऑक्सीजन गैस उपलब्ध रहेगी।
आरके ऑक्सीजन के निदेशक अजय जायसवाल ने बताया कि आइनॉक्स कंपनी से 10 बड़ी क्षमता वाले लिक्विड ऑक्सीजन सिलिंडर की खरीद की जा रही है। इसके लिए ऑर्डर भी दिया जा चुका है। इस सिलिंडर में 25 सिलिंडरों जितनी गैस भरी जा सकती है। इसकी क्षमता 190 लीटर की है। आरके ऑक्सीजन से जितने अस्पताल संबद्ध हैं, उन अस्पतालों में इन बड़ी क्षमता वाले सिलिंडरों की आपूर्ति की जाएगी।
भविष्य में जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कंपनियां पोर्टेबल केन में भी ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही हैं। अजय जायसवाल ने बताया कि 1.6 लीटर क्षमता के केन में ऑक्सीजन गैस उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इस केन में उपलब्ध ऑक्सीजन को ठीक उसी तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा जैसे सांस के मरीज इनहेलर का करते हैं। केन में डेढ़ से दो घंटे तक के लिए ऑक्सीजन गैस उपलब्ध रहेगी।