Gorakhpur: महायोजना 2031 के संशोधित प्रारूप को GDA बोर्ड की हरी झंडी, शहर से बाहर रहेंगे ट्रक अड्डा, बस स्टेशन
जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि नई महायोजना को लेकर कुल 11, 797 आपत्ति प्राप्त हुई थी। सभी के निस्तारण के बाद महायोजना का संशोधित प्रारूप तैयार किया गया था जिसे बोर्ड बैठक में स्वीकृति मिल गई है। जनता के हितों को देखते हुए महायोजना के प्रारूप में कई अहम बदलाव किए गए हैं।
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) बोर्ड की मंगलवार को हुई बैठक में महायोजना 2031 के संशोधित प्रारूप को भी स्वीकृति मिल गई। होली के पहले सशोधित प्रारूप शासकीय समिति को भेज दिया जाएगा। यदि इस समिति की तरफ से कोई आपत्ति नहीं लगाई गई तो एक महीने के भीतर नई महायोजना के वजूद में आ जाने की उम्मीद है।
संशोधित प्रारूप में सबसे बड़ी राहत विनियमितीकरण की जमीन को लेकर मिली है। इसके अलावा वन क्षेत्र के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र का दायरा भी घटा दिया गया है। नई महायोजना में यह दायरा 100 से 300 मीटर तक का थे जिससे बहुत सी कॉलोनियों के लोग प्रभावित हो रहे थे। संशोधित प्रारूप में यह तय किया गया है कि वन क्षेत्र के पास शहरी सीमा में पांच मीटर जबकि शहरी सीमा के बाहर 30 मीटर क्षेत्र में हरित पट्टी होगी। यानी यहां निर्माण प्रतिबंधित होगा।
प्रस्तावित हरित पट्टी के दोनों ओर 100 मीटर दायरे में ग्रुप हाउसिंग की अनुमति नहीं होगी लेकिन एकल मकान बनाए जा सकेंगे। हालांकि पूर्व में स्वीकृत मानचित्रों पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसी तरह प्राकृतिक नाला के दोनों तरफ 15-15 मीटर हरित क्षेत्र होगा।
महायोजना के संशोधित प्रारूप में ग्रीन बेल्ट को लेकर कोई खास राहत नहीं मिली है। जहां ग्रीन बेल्ट प्रस्तावित है और पहले से निर्माण हो चुका है तो उसको लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी), हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों एवं समय-समय पर जारी शासनादेशों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।
कमिश्नर रवि कुमार एनजी की अध्यक्षता में दोपहर करीब एक बजे से शुरू हुई बोर्ड बैठक में एक-एक कर महायोजना में हुए सभी संशोधनों पर चर्चा हुई और फिर सदस्यों से सर्वसम्मति से इसे स्वीकृत बताया। इस दौरान डीएम कृष्णा करूणेश, जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर, जीडीए सचिव उदय प्रताप सिंह, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई समेत जीडीए के कई अभियंता और मनोनीत सदस्य मौजूद रहे।
हाईवे फैसिलिटी जोन के प्रस्ताव में कोई बदलाव नहीं
नई महायोजना 2031 के संशोधित प्रारूप में हाईवे फैसिलिटी जोन के प्रस्ताव में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी नेशनल हाई वे, स्टेट हाईवे, निर्मित, निर्माणाधीन या प्रस्तावित बाईपास के दोनों ओर 30-30 मीटर हरित क्षेत्र रहेगा। नगर क्षेत्र के बाहर दोनों ओर हाईवे फैसिलिटी जोन प्रस्तावित है। इसके पीछे आवासीय एवं अन्य भू उपयोग भी दिए गए हैं।
वहीं उन गांवों के लोगों को भी बड़ी राहत मिली है, जिनके गांव की ज्यादातर भूमि को भू उपयोग खुला क्षेत्र या खेल के मैदान के रुप में दर्ज कर दिया गया था। इसे लेकर भी बड़ी संख्या में लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उनकी दलील थी कि उनकी पूरी की पूरी जमीन ही खुला क्षेत्र या खेल मैदान घोषित कर दिया गया जिससे वे सड़क पर आ जाएंगे। संशोधित प्रारूप में ऐसे लोगों को राहत दे दी गई है।
शहर से बाहर रहेंगे ट्रक अड्डा, बस स्टेशन, वेयर हाउस
संशोधित प्रारूप में शहर में जाम की समस्या का भी ध्यान रखा गया है। तय हुआ है कि ट्रक अड्डा, ट्रांसपोर्टनगर, बस स्टेशन, कूड़ा निस्तारण स्थल, वेयर हाउस आदि शहरी क्षेत्र में नहीं रहेंगे। इन्हें शहर के बाहर स्थानांतरित करने की संस्तुति की गई है। महायोजना में प्रस्तावित किए गए मुख्य मार्गों के दोनों ओर बाजार, स्ट्रीट की व्यवस्था की गई है। इसी के अनुसार भू उपयोग निर्धारित किया गया है।
मिश्रित भू-उपयोग पर मंथन जारी
देवरिया बाईपास के दोनों तरफ की कॉलोनियों के साथ ही तारामंडल व शहर के कई अन्य क्षेत्रों की कॉलोनियों में ज्यादातर आवासीय भू-उपयोग वाली जमीन पर आवासीय के साथ ही व्यावसायिक गतिविधियां भी संचालित हो रही हैं। महायोजना में इन इलाकों में मिश्रित भू-उपयोग की व्यवस्था लागू करने पर चर्चा चल रही थी। बैठक में तय हुआ कि जीडीए उपाध्यक्ष अपने स्तर से मंथन कर इसमें निर्णय लेंगे।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रीक्रिएशन जोन
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पक्के निर्माण की अनुमति तो नहीं होगी लेकिन रीक्रिएशन जोन को अनुमति दी जाएगी। यानी लोग यहां पर्यटन एवं मनोरंजन की दृष्टि से क्षेत्र का विकास कर सकेंगे। गोड़धोइया नाला के दोनों ओर इसके विस्तृत कार्ययोजना के अनुसार भू उपयोग निर्धारित कर दिया गया है। महायोजना में ताल रिंग रोड का प्रस्ताव किया गया है। यानी रामगढ़ताल के किनारे फोरलेन बनाया जाएगा।
581 करोड़ का आय व 580 करोड़ का व्यय बजट को मंजूरी
जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि नई महायोजना को लेकर कुल 11, 797 आपत्ति प्राप्त हुई थी। सभी के निस्तारण के बाद महायोजना का संशोधित प्रारूप तैयार किया गया था जिसे बोर्ड बैठक में स्वीकृति मिल गई है। जनता के हितों को देखते हुए महायोजना के प्रारूप में कई अहम बदलाव किए गए हैं। होली के पहले महायोजना का प्रस्ताव शासकीय समिति को भेज दिया जाएगा। शासकीय समिति द्वारा महायोजना के प्रकाशन के बाद नई महायोजना लागू हो जाएगी।
महायोजना में इन मुख्य भू-उपयोगों को लेकर आईं इतनी आपत्तियां
| भू उपयोग | आपत्ति की संख्या |
| पार्क एवं खुले क्षेत्र | 3528 |
| तुर्रा नाले के दोनों ओर 300 मीटर खुला स्थल | 1217 |
| वन क्षेत्र से 100 मीटर क्षेत्र में खुला स्थल | 627 |
| सार्वजनिक, अर्द्धसार्वजनिक से आवासीय या व्यावसायिक | 1153 |
| हाईवे फैसिलिटी को निरस्त करने के संबंध में | 886 |
| हाईवे के दोनों ओर 30 मीटर हरित पट्टी | 288 |
| कूड़ा निस्तारण स्थल को आवासीय या व्यावसायिक करने को | 159 |
| महायोजना को निरस्त करने के संबंध में | 54 |
| कुल आपत्तियां | 11797 |