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मां ने गरीबी की वजह से किसी और को दे दिया था अपना बच्चा, पुलिस ने ऐसे किया अपहरण का पर्दाफाश

Mon, 30 Nov 2020 09:17 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 30 Nov 2020 09:17 PM IST
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Real Mother sold her two month son in ten thousand rupees in Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

गोरखपुर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां नौसड़ क्षेत्र से दो माह के बच्चे के अपहरण की बात फर्जी निकली। पुलिस की छानबीन में पता चला कि गरीबी की वजह से मां ने ही पड़ोसी की मदद से देवरिया की एक महिला को बच्चा दे दिया था। पति को यह बात पता न चलने पाए इस वजह से उसने अपहरण की सूचना दे दी थी।

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घटना की सूचना मिलने के बाद से जांच में लगे चौकी इंचार्ज दीपक सिंह ने सीसी टीवी कैमरे, बयान की मदद से पूरे मामले को खोलकर बच्चे को बरामद कर लिया है। पुलिस ने बच्चे की मां, मध्यस्थता करने वाले युवक और बच्चे को ले जाने वाली महिला को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सूर्यविहार निवासी शंभू, देवरिया निवासी रंभा देवी और नवजात की मां शिमला देवी के रूप में हुई है।
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पुलिस के मुताबिक, गीडा इलाके के नौसड़ से 27 नवंबर की रात बच्चा लापता हुआ था। बेलदारी टोला निवासी जयसिंह ने पुलिस को बताया था कि वह अपने घर के बरामदे में पत्नी शिमला देवी, पुत्र महंत व बेटी आरती के साथ दो माह के बच्चे को लेकर मच्छरदानी के अंदर सोये थे। रात में अचानक दो माह का बच्चा लापता हो गया। मां दूध पिलाने के लिए उठीं तो इसकी जानकारी हुई।
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पुलिस ने तत्काल केस दर्ज कर लिया और जांच शुरू की तो एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज हाथ लग गई। उसमें साफ दिख रहा था कि बच्चे की मां ने ही एक महिला को बच्चा सौंपा है। फिर पुलिस ने अलग-अलग बयान लिया तो पति पत्नी का बयान अलग था। इसके बाद पुलिस का शक और गहरा हो गया।
 

घर के बगल में है शंभू की ससुराल

कड़ाई से पूछताछ करने पर मां शिमला देवी ने बताया कि देवरिया के रहने वाले नौमीनाथ की पत्नी रंभा को उसने बच्चा दिया है और इस समय वह उसे लेकर देवरिया सदर अस्पताल में मौजूद है। इस पुलिस ने उस महिला से संपर्क किया तो उसने बच्चा होने की बात स्वीकार की और बताया कि सूर्यविहार निवासी शंभू ने बच्चा दिलाया था। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर मामले का पर्दाफाश कर लिया।

नौसड़ के बेलदारी टोला निवासी जयसिंह के घर के बगल में ही बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले शंभू सिंह की ससुराल है। वहां पर ही वह शिमला देवी से मिला था। वह एक अनाथ आश्रम पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता है। वहां ही उसकी मुलाकात रंभा देवी से हुई थी। जिसके बाद उसने बच्चा दिलाने की बात कही थी।

बेहतर परवरिश के लिए दे दिया था बच्चा
बच्चे के बरामद होने के बाद ही एक अफवाह भी है बच्चे को दस हजार में उसकी मां ने बेच दिया था। हालांकि पुलिस की जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। चौकी इंचार्ज दीपक सिंह ने बताया कि शिमला ने गरीबी की वजह से बच्चे को दे दिया था ताकि उसकी बेहतर परवरिश हो सके। बच्चे को बेचे जाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है।

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