हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है यह रामलीला, यहां सादगी के साथ श्रीराम का तिलक करेंगे गोरक्षपीठाधीश्वर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में रामलीला समिति आर्यनगर की ओर से मानसरोवर मैदान में होने वाली रामलीला में गोरक्षपीठाधीश्वर की ओर से श्रीराम के तिलक की परंपरा कोरोना के कारण नहीं टूटेगी। इस बार विजयदशमी के दिन गोरखपीठाधीश्वर सादगी के साथ बिना जुलूस के मानसरोवर मैदान पहुंचकर परंपरा का निर्वहन करेंगे।
100 साल से ज्यादा समय से चली आ रही आर्यनगर की रामलीला हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। रामलीला की जमीन का कुछ हिस्सा जाहिद अली सब्जपोश का है जिसे उन्होंने खुशी-खुशी रामलीला के मंचन के लिए दे दिया। इस रामलीला को 1914 में बाबू गिरधर दास व बाबू पुरुषोत्तम दास आदि ने शुरू की थी। जो निरंतर 106 सालों से जारी है।
यहां हर साल विजयदशमी के दिन गोरखनाथ मंदिर से निकल गोरक्षपीठाधीश्वर के शोभायात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान में पहुंचती है जहां गोरक्षपीठाधीश्वर भगवान राम का तिलक व आरती करते हैं।
हाथी पर आते थे ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवैद्यनाथ
मानसरोवर रामलीला में दशहरे के दिन गोरक्षपीठाधीश्वर पहुंचकर श्रीराम का तिलक करते हैं। यह परंपरा जबसे रामलीला शुरू हुई तभी से चली आ रही है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ गोरखनाथ मंदिर हाथी के ऊपर पालकी में सवार होकर जुलूस के रूप में भगवान राम का तिलक करने आते थे। उसी परंपरा का निर्वहन वर्तमान पीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं लेकिन अब हाथी की जगह रथ का प्रयोग होता है।
रामलीला समिति के रेवती रमण दास ने बताया कि अध्यक्ष रामलीला की शुरुआत इस क्षेत्र में इसलिए की गई थी कि पूरे गोरखपुर में केवल एक ही रामलीला होती थी, इधर के सभी लोग वहां जा नहीं पाते थे। विजयादशमी के दिन गोरक्षपीठाधीश्वर का विजय यात्रा निकलता है जो अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित होता है।
रामलीला समिति महामंत्री पुष्पदंत जैन ने बताया कि इस बार गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान राम का तिलक करेंगे। कोरोना के संकट काल में श्रद्धालुओं तक रामलीला मंचन के कार्यक्रम पहुंचे इसके लिए सोशल मीडिया के माध्यम से मंचन का सजीव प्रसारण कराया जाएगा।
रामलीला समिति के प्रवक्ता विकास जालान ने बताया कि 16 से 26 अक्तूबर तक शाम सात बजे से अयोध्या के पं शिव शरण मिश्र इस बार रामलीला की प्रस्तुति करेंगे। इस वर्ष कोरोना महामारी को देखते हुए केवल 100 श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था ही लीला प्रांगण में की गई है।
रामलीला समिति के कोषाध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि रामलीला की तैयारी एक माह पूर्व से हम लोग शुरू कर देते हैं। कोरोना को देखते हुए इस बार कार्यक्रम में बदलाव किए गए हैं। राम बारात, भरत मिलाप एवं राज्याभिषेक का जुुलूस इस बार नहीं निकलेगा सारे कार्यक्रम मंच पर ही होंगे।
यह है रामलीला का विस्तृत कार्यक्रम
16 अक्तूबर- उद्घाटन समारोह, गणेश जन्म, नारद मोह, रावण जन्म, अत्याचार, पृथ्वी पुकार, राम जन्म का मंचन।
17 अक्तूबर- मुनि आगमन, ताड़का वध, पुष्प वाटिका, अहिल्या उद्धार, धनुष यज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद राम विवाह।
18 अक्तूबर- वन यात्रा (मंच पर), केवट संवाद, चित्रकूट विश्राम।
19 अक्तूबर- दशरथ मरण, भरत कौशल्य संवाद, भरत का चित्रकूट के लिए प्रस्थान।
20 अक्तूबर- श्रीराम का मिलन व जानकी आगमन, राम-भरत संवाद, चरण पादुका लेकर वापस, पंचवटी में प्रवेश व विश्राम
21 अक्तूबर- नासिका भेदन, सीता हरण, जटायु मोक्ष, सेबरी विश्राम।
22 अक्तूबर- हनुमान जी से भेंट, सुग्रीव से मित्रता, बाली वध, सीता खोज लंका दहन
23 अक्तूबर विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद, रामेश्वर स्थापना
24 अक्तूबर लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध, मेघनाथ वध।
25 अक्तूबर- गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ द्वारा श्रीराम का तिलक व आरती कार्यक्रम के पश्चात रावण वध, नीति उपदेश।
26 अक्तूबर- भरत मिलाप (मंच पर) श्रीरामजी का राज्याभिषेक।