Gorakhpur News: तस्करी कर विदेश भेज रहे थे रामगढ़ताल के कछुए, चार आरोपी गिरफ्तार
एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी करीब ढाई क्विंटल कछुए लेकर तस्करी के लिए जा रहे थे, तभी प्रभारी निरीक्षक कैंट रणधीर मिश्रा की देखरेख में इंजीनियरिंग कॉलेज चौकी इंचार्ज अवधेश मिश्रा की टीम ने आरोपियों को दबोच लिया। सभी के खिलाफ वन अधिनियम, तस्करी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
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गोरखपुर में रामगढ़ताल से कछुओं की चोरी कर विदेशों में तस्करी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ बृहस्पतिवार को किया गया। पुलिस और वन विभाग की टीम ने गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से दुर्लभ प्रजातियों के 34 कछुओं बरामद किया है। इनमें 15 जिंदा थे, जबकि 19 की मौत हो चुकी थी।
मृत कछुओं का तीन डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया है, जबकि जिंदा कछुओं को फिर से रामगढ़ताल में छोड़ दिया गया। कछुओं को लेने के लिए पश्चिम बंगाल से आकर कैंपियरगंज में रुका युवक फरार हो गया। पुलिस उसे मुकदमे में वांछित कर तलाश में जुटी है। आरोपियों से जानकारी मिली की कछुओं को पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश चीन और इंडोनेशिया तक भेजा जाता है।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान देवरिया जिले के एकौना थाना क्षेत्र के जगमांझा निवासी वलिस्टर सिंह, कैंट के महरवा की बारी निवासी सुग्रीव निषाद, यहीं के बबलू निषाद और संतकबीरनगर के बखिरा थाना क्षेत्र के झुगिया निवासी दुर्गेश साहनी के रूप में हुई।
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एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई व एसडीओ हरेंद्र ने पुलिस लाइंस में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर पकड़े गए तस्करों के बारे में जानकारी दी। एसपी ने बताया कि कछुओं को लेने के लिए पश्चिम बंगाल से एक युवक आया था। वह कैंपियरगंज में रुका था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई की भनक पाते ही फरार हो गया। एसपी ने बताया कि कछुओं को पहले कोलकाता भेजा जाता। जहां से फिर बड़े गैंग इसे बांग्लादेश भेज देते। वहां से थाईलैंड, चीन, इंडोनेशिया जैसे देशों में कछुओं को भेजा जाता है।
एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी करीब ढाई क्विंटल कछुए लेकर तस्करी के लिए जा रहे थे, तभी प्रभारी निरीक्षक कैंट रणधीर मिश्रा की देखरेख में इंजीनियरिंग कॉलेज चौकी इंचार्ज अवधेश मिश्रा की टीम ने आरोपियों को दबोच लिया। सभी के खिलाफ वन अधिनियम, तस्करी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
यहां से किलो में बेचते हैं, कोलकाता में मिलते हैं 30 हजार रुपये
एसपी ने बताया कि वलिस्टर कछुओं को पकड़ने में माहिर है। वह अपने साथियों संग मिलकर कछुओं को पकड़ता है। एक कछुआ आठ से दस किलो का मिला है। उसे यह लोग 300 से 400 रुपये प्रति किलो में बेच देते हैं। वहीं, कोलकाता जाने के बाद प्रति कछुआ 25 से 30 हजार रुपये में विदेशों में बेच दिया जाता है। वहां पर इसका इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाओं को बनाने में किया जाता है।
बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल, असम आदि राज्यों में फैला है जाल
एसडीओ ने बताया कि इन कछुओं का मांस निकालने के बाद हड्डी व कवच से शक्तिवर्धक दवा बनाई जाती है। इसके लिए गंगा में पाए जाने वाले कछुओं को बेहतर माना जाता है। जबकि, बीच का हिस्से का मांस खाया जाता है।
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बंगाल व त्रिपुरा में पांच से आठ हजार रुपये प्रति कछुआ मिलती है जबकि थाईलैंड, बांग्लादेश, मलयेशिया और चीन में इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपये प्रति कछुआ मिल जाती है। जबकि, इसका मांस करीब दो हजार रुपये किलो तक बिकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांस की भी कीमत करीब पांच हजार रुपये प्रति किलो तक मिलती है। भारत में कछुओं की तस्करी का जाल बिहार, यूपी, बंगाल, असम आदि राज्यों में फैला है।
महिलाएं भी तस्करी में शामिल
कछुओं की तस्करी में महिलाएं भी शामिल हैं। तस्करी में शामिल लोग कछुओं को एक से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करते हैं। इन लोगों को इस काम के लिए मजदूरी मिलती है। कछुओं की तस्करी में अमेठी और सुल्तानपुर का एक सक्रिय गैंग शामिल है। इस गैंग की महिला सदस्य पहले यहां कई बार रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर पकड़ी भी जा चुकी हैं।