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Exclusive: अंग्रेजों की बसाई कलकत्ता कॉलोनी होगी चकाचक, दिलचस्प है इसका इतिहास
Thu, 29 Jul 2021 02:44 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 29 Jul 2021 02:44 PM IST
सार
भूमिगत होगी कॉलोनी की बिजली, सड़कें बनेंगी और सफाई होगी बेहतर। बंगाली रेलकर्मी आने के इच्छुक नहीं थे उनके लिए बनी अलग कॉलोनी।
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बसाई जाएगी कॉलोनी।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर शहर में असुरन चौक के पहले अंग्रेजों द्वारा सौ साल पहले बसाई गई कलकत्ता कॉलोनी के दिन अब बहुरने वाले हैं। लंबे समय बाद रेलवे ने इस कॉलोनी का कायाकल्प करने का निर्णय लिया है। कॉलोनी के लोगों को अब बेहतर बिजली की आपूर्ति मिलेगी, इसके लिए कॉलोनी में अंडरग्राडंड बिजली का केबल बिछाया जाएगा। इसके साथ ही सफाई व्यवस्था भी बेहतर होगी।
कलकत्ता रेलवे कॉलोनी का इतिहास भी दिलचस्प है। कॉलोनी में कुल 54 आवास हैं। जानकारों के मुताबिक जब छपरा से गोंडा और नौतनवां में लाइन बिछाई जा रही थी तो ट्रैक का काम करने के लिए बंगाल से रेलकर्मियों का यहां तबादला किया गया। लेकिन रेलकर्मी आने को तैयार नहीं थे। उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनके लिए एक अलग कॉलोनी बनाई जाएगी, जहां बंगाली ही रहेंगे।
ज्यादातर उसमें कलकत्ता के रहने वाले थे तो बोलचाल में नाम कलकत्ता कॉलोनी पड़ गया। बाद में रेलवे ने भी लिखा-पढ़ी में कॉलोनी का नाम कलकत्ता कॉलोनी के रूप में दर्ज कर लिया। एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री 105 वर्षीय केएल गुप्त बताते हैं, वर्ष 1920 के आसपास यह कॉलोनी बसाई गई थी।
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कलकत्ता से ट्रांसफर होकर इलेक्ट्रिकल विभाग के एक अंग्रेजी अधिकारी आए थे। बंगाल से आए रेलकर्मियों के लिए आवास बनाया गया। बाद में जरूरत के हिसाब से कॉलोनी का दायरा बढ़ाया गया। लंबे समय तक इस कॉलोनी में रहने वाले ज्यादातर लोग बंगाली ही थे।
कॉलोनी में आवास
श्रेणी संख्या
टाइप फोर 04
टाइप थ्री 16
टाइप टू 34
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कलकत्ता रेलवे कॉलोनी का इतिहास भी दिलचस्प है। कॉलोनी में कुल 54 आवास हैं। जानकारों के मुताबिक जब छपरा से गोंडा और नौतनवां में लाइन बिछाई जा रही थी तो ट्रैक का काम करने के लिए बंगाल से रेलकर्मियों का यहां तबादला किया गया। लेकिन रेलकर्मी आने को तैयार नहीं थे। उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनके लिए एक अलग कॉलोनी बनाई जाएगी, जहां बंगाली ही रहेंगे।
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ज्यादातर उसमें कलकत्ता के रहने वाले थे तो बोलचाल में नाम कलकत्ता कॉलोनी पड़ गया। बाद में रेलवे ने भी लिखा-पढ़ी में कॉलोनी का नाम कलकत्ता कॉलोनी के रूप में दर्ज कर लिया। एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री 105 वर्षीय केएल गुप्त बताते हैं, वर्ष 1920 के आसपास यह कॉलोनी बसाई गई थी।
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कलकत्ता से ट्रांसफर होकर इलेक्ट्रिकल विभाग के एक अंग्रेजी अधिकारी आए थे। बंगाल से आए रेलकर्मियों के लिए आवास बनाया गया। बाद में जरूरत के हिसाब से कॉलोनी का दायरा बढ़ाया गया। लंबे समय तक इस कॉलोनी में रहने वाले ज्यादातर लोग बंगाली ही थे।
कॉलोनी में आवास
श्रेणी संख्या
टाइप फोर 04
टाइप थ्री 16
टाइप टू 34