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कोविड मरीजों के लिए बने रेलवे के कोचों का नहीं किया गया इस्तेमाल, आठ माह में नहीं खुले इसके ताले

Sun, 06 Dec 2020 04:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 06 Dec 2020 04:18 PM IST
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Railway special coach for covid patients unused in Corona conditions
140 बेड वाले 10 कोच नकहा जंगल स्टेशन पर आज भी सेवा के लिए तैयार - फोटो : अमर उजाला।
कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए बनाए गए रक्षक रेलवे कोचों के आठ माह में ताले भी नहीं खुले। 140 बेड वाले 10 कोच नकहा जंगल स्टेशन पर आज भी मरीजों की सेवा के लिए तैयार हैं। यह आलम तब है, जबकि दो माह पहले तक कोरोना के मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने के लिए बेड तक नहीं मिल रहे थे।
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शुरुआती दौर में कोरोना के बढ़ते मरीजों के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने रेलवे कोच को आइसोलेशन वार्ड बनाने के निर्देश दिए थे। लॉकडाउन के बीच अप्रैल में रेलवे यांत्रिक कारखाना ने 10 कोच बनाकर तैयार किए। इनमें 140 बेड बनाए गए। कोच में मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए शौचालय और वॉश बेसिन भी लगाए गए।
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गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर की भी व्यवस्था की गई। आइसोलेशन कोच बनने के बाद इसे नकहा जंगल रेलवे स्टेशन पर खड़ा किया गया है। इसका अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है। कोचों पर धूल जम चुकी है। कोचों को बनाने पर कितनी लागत आई इसका अनुमान रेलवे ने नहीं लगाया है।
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140 मरीजों का हो सकता है इलाज

रेलवे के बनाए कोचों का इस्तेमाल किया जाए तो इनमें 140 मरीज भर्ती हो सकते हैं। इनका इस्तेमाल न तो स्वास्थ्य विभाग ने किया और न ही रेलवे ने।
 
पूर्वोत्तर रेलवे में 18 रैक बने
पूर्वोत्तर रेलवे में 18 रैक बनाए गए हैं। प्रत्येक में 10 कोच लगे हैं। लखनऊ मंडल में चार, इज्जतनगर में चार और वाराणसी मंडल में 10 रैक खड़े किए गए हैं।
 
जरूरत पड़ने पर उपलब्ध कराया जाएगा
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर कोचों को कोविड मरीजों के लिए तैयार किया गया था। यांत्रिक कारखाना गोरखपुर में सभी कोच बने हैं। ऐसे में खर्च का आकलन नहीं किया गया है। भविष्य में अगर जरूरत पड़ती है तो गाइडलाइन के मुताबिक इन कोचों का इस्तेमाल किया जाएगा।
 
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि कोविड मरीजों के लिए पर्याप्त बेड थे, इसलिए रेलवे के कोच की जरूरत नहीं पड़ी। मौजूदा समय में बीआरडी से लेकर 100 बेड टीबी अस्पताल और जिला अस्पताल तक में बेड खाली हैं। ऐसे में जब जरूरत होगी तो उसका इस्तेमाल किया जाएगा।
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