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Putrada Ekadashi 2021: संतान सुख की प्राप्ति कराता है पुत्रदा एकादशी व्रत, ऐसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्न
Tue, 17 Aug 2021 03:00 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 17 Aug 2021 03:00 PM IST
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पुत्रदा एकादशी 2021
- फोटो : अमर उजाला।
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श्रावण पुत्रदा एकादशी का पर्व 18 अगस्त यानी बुधवार को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि जो भी नि:संतान दंपती विधि-विधान से पुत्रदा एकादशी व्रत कर भगवान विष्णु को प्रसन्न करता है उसे संतान का सुख मिल जाता है।
पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र के अनुसार हिंदू धर्म में एकादशी तिथि की महत्व बहुत अधिक है। पंचांग के अनुसार, हर माह दो एकादशी तिथियां होती हैं, इस तिथि का महत्व इसलिए भी अधिक देखने को मिलता है क्योंकि इस दिन जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उनके नाम का व्रत रखा जाता है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार मान्यता है कि इस दिन भक्त संतान प्राप्ति की कामना व उनकी लंबी आयु के लिए पुत्रदा एकादशी व्रत रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन निर्जला और निराहार रहकर व्रत रखने से संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। वहीं नि:संतान या संतान सुख पाने की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों को यह व्रत अवश्य रखना चाहिए। माना जाता है कि अगर दंपत्ती साथ मिलकर इस दिन पूजा करें या फिर व्रत रखें, तो इसका प्रभाव अधिक फलदायी होता है।
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ऐसे करें पूजन
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नित्यकर्मों से निवृत हो जाएं। स्नान करने के बाद पूजा घर की साफ-सफाई करें। भगवान विष्णु की पूजा के लिए उनकी तस्वीर के समक्ष दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। उनका अभिषेक करें, फिर चंदन, सिंदूर, फूल आदि से पूजा करें और उन्हें प्रसाद चढ़ाएं। फिर दिन भर व्रत रखें। अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-पुण्य करें। फिर व्रत का पारण करें।
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पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र के अनुसार हिंदू धर्म में एकादशी तिथि की महत्व बहुत अधिक है। पंचांग के अनुसार, हर माह दो एकादशी तिथियां होती हैं, इस तिथि का महत्व इसलिए भी अधिक देखने को मिलता है क्योंकि इस दिन जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उनके नाम का व्रत रखा जाता है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है।
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श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार मान्यता है कि इस दिन भक्त संतान प्राप्ति की कामना व उनकी लंबी आयु के लिए पुत्रदा एकादशी व्रत रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन निर्जला और निराहार रहकर व्रत रखने से संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। वहीं नि:संतान या संतान सुख पाने की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों को यह व्रत अवश्य रखना चाहिए। माना जाता है कि अगर दंपत्ती साथ मिलकर इस दिन पूजा करें या फिर व्रत रखें, तो इसका प्रभाव अधिक फलदायी होता है।
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ऐसे करें पूजन
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नित्यकर्मों से निवृत हो जाएं। स्नान करने के बाद पूजा घर की साफ-सफाई करें। भगवान विष्णु की पूजा के लिए उनकी तस्वीर के समक्ष दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। उनका अभिषेक करें, फिर चंदन, सिंदूर, फूल आदि से पूजा करें और उन्हें प्रसाद चढ़ाएं। फिर दिन भर व्रत रखें। अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-पुण्य करें। फिर व्रत का पारण करें।