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उपलब्धि: विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में दूसरी बार आए प्रो. एनबी सिंह, गोरखपुर से है खास नाता

Fri, 14 Oct 2022 12:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 14 Oct 2022 12:18 PM IST
सार

प्रो. सिंह कार्बन नैनो ट्यूब के निर्माण पर भी कार्य कर रहे हैं। ये नैनो ट्यूब मकान की दीवारों में दरार पड़ने पर ब्रिज का कार्य करेंगी। इसके साथ ही नैनो टाइटेनियम डाई ऑक्साइड केमिकल बनाने में भी जुटे हैं, जिसे पेंट में मिलाने से दीवारों पर गंदगी नहीं जमने पाएगी। उन्होंने एक अन्य मैटेरियल नैनो सिल्वर पर किए जा रहे शोध की जानकारी दी है।

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Prof NB Singh second time in list of top scientists of world
प्रो एनबी सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष रसायन शास्त्र गोविवि। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एनबी सिंह को दूसरी बार विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में जगह मिली है। अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम ने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दो फीसदी वैज्ञानिकों में शामिल किया है। उन्हें पदार्थ वैज्ञानिक बताया गया है। इससे पहले प्रो. एनबी सिंह को यह गौरव 2020 में प्राप्त हो चुका है।

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प्रो. एनबी सिंह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से सीमेंट की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शोधरत हैं। वह जिओ पॉलीमर सीमेंट बनाने पर कार्य कर रहे हैं, जिसके इस्तेमाल से मकान को मजबूती मिलेगी। शोध के लिए उन्होंने हरियाणा की सीमेंट कंपनी और जर्मनी के कैसल विश्वविद्यालय से करार किया है। शोध कार्यों पर 150 से ज्यादा शोधपत्र राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
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कार्बन नैनो ट्यूब के निर्माण पर कर रहे कार्य
प्रो. सिंह कार्बन नैनो ट्यूब के निर्माण पर भी कार्य कर रहे हैं। ये नैनो ट्यूब मकान की दीवारों में दरार पड़ने पर ब्रिज का कार्य करेंगी। इसके साथ ही नैनो टाइटेनियम डाई ऑक्साइड केमिकल बनाने में भी जुटे हैं, जिसे पेंट में मिलाने से दीवारों पर गंदगी नहीं जमने पाएगी। उन्होंने एक अन्य मैटेरियल नैनो सिल्वर पर किए जा रहे शोध की जानकारी दी है। इसका इस्तेमाल वाटर प्यूरीफायर के तौर पर किया जा सकेगा। यह एक एंटी बैक्टीरियल तत्व है।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय से किया है परास्नातक व पीएचडी

प्रो. एनबी सिंह ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण की है। वह मूलरूप से जौनपुर के रहने वाले हैं, लेकिन गोरखपुर विश्वविद्यालय से परास्नातक की डिग्री हासिल की।  पीएचडी करके 1967 में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर शिक्षण कार्य भी शुरू कर दिया।

विभागाध्यक्ष की भूमिका भी निभाई। 2006 में विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त और शारदा विश्वविद्यालय में एमिरेट प्रोफेसर के रूप में पढ़ाने लगे। वहीं से वह अपने शोध कार्य को बढ़ा रहे हैं। बतौर पोस्ट-डाक्टोरल फेलो दो वर्ष तक बेल्जियम के ब्रुसेल्स विश्वविद्यालय से जुड़े रहे। 1977 में उन्हें जर्मनी की प्रतिष्ठित अलेक्जेंडर वान हम्बोल्ट फेलोशिप भी मिल चुकी है।

290 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित
प्रो. सिंह के 290 से ज्यादा शोध पत्र राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने 10 पुस्तकों का लेखन और प्रकाशन भी किया है। प्रो. सिंह के निर्देशन में 40 शोधार्थियों ने अपना शोध किया है।

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