गोरखपुर: 32 करोड़ से सुलझेगी कूड़ा निस्तारण की समस्या, जल निगम ने तैयार किया डीपीआर
शासन की स्वीकृति के बाद 18 महीने में बनेगा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, कार्यदायी संस्था जल निगम ने तैयार किया डीपीआर, सहजनवां के सुथनी गांव में करीब 11 एकड़ जमीन की हो रही खरीद।
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गोरखपुर में कूड़ा निस्तारण की समस्या से निजात के लिए सहजनवां के सुथनी गांव में बनने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) जल निगम ने तैयार कर ली है। इस पर करीब 31.58 करोड़ रुपये की लागत आएगी और शासन से डीपीआर की स्वीकृति मिलने के बाद इसके निर्माण में करीब 18 महीने का समय लगेगा।
नगर निगम की ओर से निर्धारित कार्यदायी संस्था जल निगम के डीपीआर को मुख्यालय से स्वीकृति भी मिल चुकी है। नगर निगम की स्वीकृति मिलने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा। वहां से प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
फिलहाल, सहजनवां के सुथनी गांव में करीब 11 एकड़ जमीन खरीद की जा रही है। इसमें से करीब आठ एकड़ जमीन की रजिस्ट्री नगर निगम ने किसानों से करा ली है। पूरी जमीन मिलने के बाद यहां शहर के कूड़े का निस्तारण शुरू हो जाएगा।
शहर से निकलने वाले करीब 600 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण अभी नगर निगम के लिए समस्या बना हुआ है। अलग-अलग जगहों पर कूड़ा गिराने का वहां के निवासियों की ओर से विरोध होता रहता है।
कूड़े से बनेगी खाद, एक लाख लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक बनेगा
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में कूड़े से खाद बनाई जाएगी। इसके अलावा यहां एक लाख लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक बनाया जाएगा। प्लांट परिसर के चारों तरफ बाउंड्री होगी। साथ ही टिपिंग एरिया, कंपोस्ट एरिया, फिनिशिंग गोदाम, टॉयलेट ब्लॉक का निर्माण होगा।
नगर निगम गोरखपुर के लिए सहजनवां के सुथनी गांव में बनाए जाने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का डीपीआर मुख्यालय से तैयार होकर आ गया है। करीब 31.58 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है। प्रस्तावित जमीन के चारों तरफ बाउंड्री बनाई जाएगी। 100 केएल क्षमता का एक ओवरहेड टैंक भी बनाया जाएगा। - ओपी सिंह, अवर अभियंता, सीएंडडीएस
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए जमीन की खरीद अंतिम चरण में है। 11 एकड़ में से आठ एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदी जा चुकी है। पूरी जमीन खरीदने के बाद यहीं पर कूड़ा निस्तारित किया जाएगा। प्लांट बनाने की जिम्मेदारी जल निगम को दी गई है, जिनके द्वारा डीपीआर तैयार कर लिया गया है।