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अमर उजाला लाइव: रोते ज्यादा-हंसते कम, बच्चों को स्कूल खुलने का गम
Tue, 27 Jun 2023 12:27 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 27 Jun 2023 12:27 PM IST
सार
शिक्षा विभाग ने गर्मी को देखते हुए सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को दो जुलाई तक बंद रखने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में शहर के आठवीं तक के प्रमुख निजी स्कूल बंद रहे। गली और मोहल्लाें में स्थित कुछ स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों को दरकिनार कर अपने स्कूलों को खोल दिया।
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छोटे बच्चों का स्कूल खुल गया। पहले दिन स्कूल जाते समय बच्चे रोने लगें।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
एक महीने गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुले हैं। पहले दिन कुछ बच्चे हंसते-कूदते दिखाई दिए तो तमाम आंखें मलकर रोते-झींकते हुए। दरअसल, एक महीने की मौज-मस्ती के बाद तड़के उठने और फिर घंटों स्कूल में बिताने भर का सोचकर उनके आंसू फूट पड़ रहे हैं। मम्मी-पापा और बड़े भाई-बहन भी छोटे स्कूली बच्चों को बहलाते नजर आए। बच्चों के लिए मम्मियां दुखी थीं तो थोड़ी खुश भी।
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उनका कहना था कि पूरी दिन सुबह से ही घर में हुड़दंग से परेशान हो जाते हैं। तड़के उठने और स्कूल लाने ले जाने की कठिन ड्यूटी तो भारी पड़ती है, मगर कुछ घंटे शांति से घर के काम निपटाने को भी मिलेंगे। सोमवार को स्कूलों के बाहर कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई पड़ा।
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शिक्षा विभाग ने कक्षा आठ तक के सभी सरकारी स्कूलों को दो जुलाई तक बंद रखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन शहर के कुछ निजी स्कूल सोमवार को खुल गए। सुबह 7:30 बजे दाउदपुर स्थित सेट जेवियर्स स्कूल और रानीबाग स्थित गोरखपुर पब्लिक स्कूल खुले थे। इन दोनों स्कूलों के बच्चे स्कूल जाते दिखे। इनमें ज्यादातर बच्चों के चेहरे मुरझाए और लटके थे।
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करीब 40 दिनों की छुट्टी के दौरान घूमने-फिरने और मस्ती के बाद स्कूल जाने से परेशान रहे। बहन के साथ पहुंचे हर्ष की आंखें आंसू से भरी नजर आईं। वहीं कई ऐसे भी बच्चे थे, जो स्कूल खुलने से बहुत खुश दिखे। बहुत दिनों बाद शहर की सड़कों पर सुबह सात बजे से ही हलचल थी। कहीं कार तो कहीं स्कूटी और स्कूली रिक्शा पर बच्चे स्कूल जाते नजर आ रहे थे। कुछ बच्चे स्कूटी पर रोते हुए स्कूल जाते दिखे तो उनके माता-पिता उन्हें बहलाकर किसी तरह स्कूल के भीतर भेजते दिखाई पड़े।
कुछ बच्चे तो अड़े थे स्कूल में न जाने को तो उनकी मम्मियां समझा रही थीं कि शाम को घूमने चलेंगे...। मायूस बच्चों में लड़के ज्यादा दिखाई दिए। बच्चियां हंसती खिलखिलाती और हाथ हिलाकर सहेलियों को बुला रही थीं। उधर, सिविल लाइंस क्षेत्र के आसपास के सभी विद्यालयों पर सन्नाटा पसरा था। सिर्फ कक्षा आठवीं के ऊपर के कुछ बच्चे स्कूलों में जाते हुए नजर आ रहे थे।
तीन जुलाई से खुलेंगे अधिकतर स्कूल
शिक्षा विभाग ने गर्मी को देखते हुए सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को दो जुलाई तक बंद रखने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में शहर के आठवीं तक के प्रमुख निजी स्कूल बंद रहे। गली और मोहल्लाें में स्थित कुछ स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों को दरकिनार कर अपने स्कूलों को खोल दिया।
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बच्चों ने छुट्टियों में खूब मस्ती की। सुबह से ही स्कूल जाने के नाम पर बहानेबाजी शुरू कर दी। स्कूल खुलने पर हमें भी सुबह उठकर सारी तैयारी करनी पड़ती है। जिम्मेदारी तो बढ़ गई पर दोपहर में बच्चों की धमा चौकड़ी से राहत मिलेगी।-पूनम अग्रवाल।
बच्चों को स्कूल छोड़ने और ले जाने की जिम्मेदारी मेरी ही है। स्कूल खुल गए हैं तो सुबह से ही बच्चों के खाने-पीने के साथ उनके पढ़ाई का भी ध्यान रखना पड़ता है।-नीतू प्रजापति।
एक महीने स्कूल बंद था तो बहुत राहत थी। सोमवार को सुबह से ही पूरी दिनचर्या बदल गई। सुबह उठी और नाश्ता बनाकर बच्चे को छोड़ने स्कूल आई हूं। इतने दिन बाद स्कूल खुला है तो बच्चे का मन भी अभी लग नहीं रहा है।-प्रीति खटवानी।
स्कूल खुलने पर पूरे परिवार की दिनचर्या बदल गई है। सुबह बच्चा भी ऊंघते ही उठा। मेरे पति ही बच्चे को स्कूल छोड़ने जाते हैं। आज वह शहर से बाहर हैं, इसलिए मैं छोड़ने आई हूं।-किरन वर्मा।
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बच्चों ने छुट्टियों में खूब मस्ती की। सुबह से ही स्कूल जाने के नाम पर बहानेबाजी शुरू कर दी। स्कूल खुलने पर हमें भी सुबह उठकर सारी तैयारी करनी पड़ती है। जिम्मेदारी तो बढ़ गई पर दोपहर में बच्चों की धमा चौकड़ी से राहत मिलेगी।-पूनम अग्रवाल।
बच्चों को स्कूल छोड़ने और ले जाने की जिम्मेदारी मेरी ही है। स्कूल खुल गए हैं तो सुबह से ही बच्चों के खाने-पीने के साथ उनके पढ़ाई का भी ध्यान रखना पड़ता है।-नीतू प्रजापति।
एक महीने स्कूल बंद था तो बहुत राहत थी। सोमवार को सुबह से ही पूरी दिनचर्या बदल गई। सुबह उठी और नाश्ता बनाकर बच्चे को छोड़ने स्कूल आई हूं। इतने दिन बाद स्कूल खुला है तो बच्चे का मन भी अभी लग नहीं रहा है।-प्रीति खटवानी।
स्कूल खुलने पर पूरे परिवार की दिनचर्या बदल गई है। सुबह बच्चा भी ऊंघते ही उठा। मेरे पति ही बच्चे को स्कूल छोड़ने जाते हैं। आज वह शहर से बाहर हैं, इसलिए मैं छोड़ने आई हूं।-किरन वर्मा।