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Pradosh Vrat July 2021: जानिए कब है बुध प्रदोष, कैसे पूजन करने से महादेव होंगे प्रसन्न
Mon, 19 Jul 2021 05:57 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 19 Jul 2021 05:57 PM IST
सार
प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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प्रदोष व्रत।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु बुधवार को प्रदोष व्रत रखेंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस व्रत को रखने से दो गायों के दान के बराबर फल मिलता है।
प्रदोष व्रत का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिव पुराण और भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत रखने से भक्त पर हमेशा भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। साथ ही व्रती की दुख और दरिद्रता दूर होती है।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
पंडित जोखन पांडेय शास्त्री ने बताया कि प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है। इसे प्रदोष काल कहा जाता है। इस दौरान स्नान के बाद पूजा के लिए बैठें। भगवान शिव और माता पार्वती को चंदन, पुष्प, अक्षत, धूप, दक्षिणा और नैवेद्य अर्पित करें। महिलाएं मां पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाएं। मां पार्वती को शृंगार का सामान अर्पित करना शुभ माना जाता है।
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प्रदोष व्रत का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिव पुराण और भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत रखने से भक्त पर हमेशा भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। साथ ही व्रती की दुख और दरिद्रता दूर होती है।
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प्रदोष व्रत पूजा विधि
पंडित जोखन पांडेय शास्त्री ने बताया कि प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है। इसे प्रदोष काल कहा जाता है। इस दौरान स्नान के बाद पूजा के लिए बैठें। भगवान शिव और माता पार्वती को चंदन, पुष्प, अक्षत, धूप, दक्षिणा और नैवेद्य अर्पित करें। महिलाएं मां पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाएं। मां पार्वती को शृंगार का सामान अर्पित करना शुभ माना जाता है।
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