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यूपी: यहां वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ पुलिस दाखिल कर रही चार्जशीट, हत्या और दुष्कर्म के 300 मामलों की हो चुकी जांच
Sun, 14 Feb 2021 02:12 PM IST
vivek shukla
शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 14 Feb 2021 02:12 PM IST
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फोरेंसिक लैब।
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में फोरेंसिक लैब शुरू होने से आरोपियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जल्द सजा दिलाने का रास्ता आसान हो गया है। पिछले छह महीने में दुष्कर्म और हत्या के 300 मामलों की जांच स्थानीय लैब में की गई और उसकी रिपोर्ट पुलिस को समय से उपलब्ध करा दी गई। फायदा यह हुआ कि पुलिस चार्जशीट दाखिल करने के दौरान ही वैज्ञानिक साक्ष्य भी प्रस्तुत कर रही है।
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पहले फोरेंसिक जांच के लिए नमूने लखनऊ भेजे जाते थे। ऐसे में हत्या व दुष्कर्म के मामलों में साक्ष्यों की जांच कर रिपोर्ट आने में महीनों का समय लगता था। अब गोरखपुर जोन की जांच शहर में ही हो पा रही है और रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जा रही है। पॉक्सो एक्ट के कई मामले ऐसे हैं, जिनमें सप्ताह के भीतर विवेचक के पास रिपोर्ट भेज दी गई।
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दुष्कर्म व हत्या के मामले में बीते तीन माह में तीन सौ से अधिक नमूने भेजे गए हैं। इसमें 180 से अधिक नमूने दुष्कर्म से संबंधित रहे। 120 नमूने हत्या से संबंधित रहे। 30-40 मामले ऐसे रहे हैं, जिनमें नमूने अधूरे आने के कारण उन्हें विवेचक के पास वापस कर दिया गया। शेष में परीक्षण के बाद विवेचक को रिपोर्ट भेजी गई।
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जल्द शुरू हो जाएंगी 16 और जांचें
प्रदेश में ग्रेड-ए की सिर्फ तीन लैब हैं। इसमें भी लखनऊ की लैब में हेयर रूट डीएनए, विस्फोटक की जांच अब भी उपलब्ध नहीं है। हेयर रूट डीएनए के लिए नमूना हैदराबाद भेजना पड़ता है। विस्फोटक की जांच के लिए नमूना आगरा भेजा जाता है। आगरा की लैब में डीएनए की जांच नहीं हो पाती है, लेकिन गोरखपुर की लैब में ये जांचें जल्द ही उपलब्ध होंगी। इन पर काम शुरू कर दिया गया है और जल्द ही इस तरह की 16 जांचें यहीं हो सकेंगी।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला के उप निदेशक सुरेश चंद्रा ने बताया कि कोशिश जारी है कि जो जांच हो रही है, उनकी रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध करा दी जाए। आने वाले समय में और जांच शुरू होनी है। विवेचक को कोशिश करनी चाहिए कि घटना के बाद जितनी शीघ्रता से हो सके, वह नमूने संग्रहीत करके प्रयोगशाला में भेजे, ताकि आसानी से जांच की जा सके।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला के उप निदेशक सुरेश चंद्रा ने बताया कि कोशिश जारी है कि जो जांच हो रही है, उनकी रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध करा दी जाए। आने वाले समय में और जांच शुरू होनी है। विवेचक को कोशिश करनी चाहिए कि घटना के बाद जितनी शीघ्रता से हो सके, वह नमूने संग्रहीत करके प्रयोगशाला में भेजे, ताकि आसानी से जांच की जा सके।