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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का हाल: BRD में आपरेशन कराना है तो इंतजार करो या कहीं और जाओ

Thu, 09 Jun 2022 02:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 09 Jun 2022 02:39 PM IST
सार

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में आर्थों से लेकर गायनी, ह्दय रोग सहित सभी विभागों में मरीजों की लंबी कतार लग रही है। कई मरीजों को आपरेशन के लिए एक सप्ताह से 10 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

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patient have an operation in BRD then wait or go somewhere else
BRD - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हर विभाग में ऑपरेशन के लिए लंबी ‘वेटिंग’ चल रही है। मजबूरी में ज्यादातर मरीज निजी अस्पताल का रुख कर रहे हैं। हड्डी रोग से लेकर, स्त्री एवं प्रसूति, ईएनटी और नेत्र रोग विभागों में आपरेशन के लिए पहुंचने वाले औसतन आठ से 10 मरीज प्रतिदिन लौट रहे हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने की वजह से परेशानी आ रही है। डॉक्टरों को प्राथमिकता के आधार पर मरीजों का ऑपरेशन करने का निर्देश दिया गया है।

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ट्रॉमा सेंटर के मरीज भी किए जा रहे रेफर

बीआरडी मेडिकल कॉलेज का ट्रॉमा सेंटर 54 बेड का है। लेकिन, यहां प्रतिदिन 70 से 75 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें 80 फीसदी मरीज इमरजेंसी श्रेणी के हैं। इनको या तो तत्काल ऑपरेशन की जरूरत होती है या आईसीयू में रखना पड़ता है। यही वजह है कि प्रतिदिन 20 से 25 मरीज लखनऊ सहित अन्य हायर सेंटरों पर रेफर किए जा रहे हैं। इनमें सबसे अधिक मरीज न्यूरो सर्जरी के हैं।

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रोजाना लौट रहे आठ से दस मरीज

बीआरडी के हड्डी रोग विभाग में आपरेशन के लिए पहुंचने वाले मरीज सबसे ज्यादा मायूस हो रहे हैं। यहां रोजाना औसतन 10 से 12 ऑपरेशन होते हैं।   जबकि, 16 से 20 मरीज आपरेशन के लिए आ रहे हैं। ऐसे में छह से आठ मरीज बिना ऑपरेशन के लौटाएं जा रहे हैं या फिर उन्हें एक सप्ताह से 10 दिनों की वेटिंग मिल रही है। सर्जरी और गायनी विभाग का भी यही हाल है। नाक, कान गला में प्रतिदिन चार से पांच ऑपरेशन हो रहे हैं। यहां भी मरीजों को अपनी बारी के लिए कुछ दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

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रेफर हो रहे न्यूरो सर्जरी के मरीज

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विभाग में मरीजों की अलग लिस्ट है। यहां पर ह्दय रोग विभाग को छोड़कर किसी अन्य मरीज का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। कैथ लैब बनने के बाद एंजियोग्रॉफी और एंजियोप्लास्टी की सुविधा शुरू की गई है। इसके बाद भी प्रतिदिन तीन से चार मरीज लौटाएं जा रहे हैं। वहीं, न्यूरो सर्जरी के लिए ऑपरेशन थियेटर पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में इसके मरीज रेफर किए जा रहे हैं।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन पांच हजार के आसपास की ओपीडी है। सभी विभागों को मिलाकर 50 से अधिक ऑपरेशन प्रतिदिन होते हैं। इमरजेंसी में प्राथमिकता के आधार मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

केस-एक

हादसे में कुशीनगर के आनंद कुमार (48) का कूल्हा सरक गया। इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज आए। जांच में पता चला की ऑपरेशन करना होगा। बेड फुल होने का हवाला देते हुए उन्हें 10 दिन बाद ऑपरेशन के लिए बुलाया गया है।

केस- दो

खोराबार इलाके की प्रियंका नौ माह की गर्भवती हैं। शुरू से ही वह बीआरडी में जांच करा रही थी। प्रसव पीड़ा हुई तो वह बीआरडी पहुंचीं। डॉक्टरों ने जांच कर ऑपरेशन की सलाह दी। बेड खाली नहीं होने के कारण परिजन निजी अस्पताल लेकर चले गए।

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