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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज : सीएम योगी के साथ बैठक में थे अफसर, बाहर कोरोना संक्रमित ने भाई के कंधे पर दम तोड़ा
Tue, 11 May 2021 06:45 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 11 May 2021 06:45 PM IST
सार
भटहट निवासी रामबदन की हैदराबाद से लौटने के बाद हालत बिगड़ गई। भाई मरीज को लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचा लेकिन वहां उसे कोई सहायता नहीं मिली और उसकी जान चली गई।
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मरीज को कंधे पर लाद कर ले जाते लोग।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोविड वार्ड में रैंप से लेकर पूछताछ काउंटर तक मरीज को ले जाने के लिए कर्मचारियों ने स्ट्रेचर तक नहीं दिया। जिसके कारण छोटे भाई ने कंधे पर लाद कर बड़े भाई को काउंटर तक पहुंचाया। वहां भी उखड़ रही सांसों को ऑक्सीजन का सहारा नहीं मिला। आखिरकार मरीज ने वहीं पर दम तोड़ दिया। उस समय मुख्यमंत्री कॉलेज में ही अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे।
मिली जानकारी के अनुसार भटहट के धोरकीमागी का रामबदन साहनी (35) हैदराबाद में पेंट-पालिश का काम करता था। वह तीन दिन पहले हैदराबाद से घर लौटा था। दो दिन से उसकी तबीयत खराब थी। रविवार की रात में हालत ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों ने एम्बुलेंस के लिए कई बार फोन किया। लेकिन एम्बुलेंस नहीं आई।
सोमवार की सुबह छोटे भाई विष्णु ने एक बार फिर एम्बुलेंस बुलाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बीच रामबदन की सांस तेजी से फूलने लगी। इसके बाद विष्णु ने दोस्त की मदद से बड़े भाई को बाइक से ही लेकर बीआरडी के 300 बेड वाले कोविड वार्ड लेकर पहुंच गया। बीआरडी पहुंचते रामबदन की हालत काफी गंभीर हो गई।
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मिली जानकारी के अनुसार भटहट के धोरकीमागी का रामबदन साहनी (35) हैदराबाद में पेंट-पालिश का काम करता था। वह तीन दिन पहले हैदराबाद से घर लौटा था। दो दिन से उसकी तबीयत खराब थी। रविवार की रात में हालत ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों ने एम्बुलेंस के लिए कई बार फोन किया। लेकिन एम्बुलेंस नहीं आई।
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सोमवार की सुबह छोटे भाई विष्णु ने एक बार फिर एम्बुलेंस बुलाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बीच रामबदन की सांस तेजी से फूलने लगी। इसके बाद विष्णु ने दोस्त की मदद से बड़े भाई को बाइक से ही लेकर बीआरडी के 300 बेड वाले कोविड वार्ड लेकर पहुंच गया। बीआरडी पहुंचते रामबदन की हालत काफी गंभीर हो गई।
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300 बेड का कोविड वार्ड जिस भवन में है उसका पोर्टिको काफी ऊंचाई पर है। एंबुलेंस तो पोर्टिको तक पहुंच जाती है लेकिन मरीज लेकर बाइक से वहां तक नहीं पहुंचा जा सकता है। ऐसे में भाई को लेकर पहुंचे विष्णु ने पोर्टिको से आगे स्थित पूछताछ काउंटर पर पहुंचकर स्ट्रेचर मांगा लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि स्ट्रेचर मरीज को अंदर ले जाने के लिए है। इसके बाहर ले जाने के लिए नहीं दे सकते।
इस पर विष्णु ने अपने बड़े भाई को कंधे पर लाद कर पूछताछ काउंटर तक ले गया। वहां भी उसे लिटाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। विष्णु ने ऑक्सीजन मांगी तो कर्मचारियों ने हाथ खड़े कर दिये। इसी बीच रामबदन के शरीर की हरकत बंद हो गई। उसकी सांसें थम गईं।
इस पर विष्णु ने अपने बड़े भाई को कंधे पर लाद कर पूछताछ काउंटर तक ले गया। वहां भी उसे लिटाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। विष्णु ने ऑक्सीजन मांगी तो कर्मचारियों ने हाथ खड़े कर दिये। इसी बीच रामबदन के शरीर की हरकत बंद हो गई। उसकी सांसें थम गईं।
भाई की मौत के बाद परिजन रोने लगे। विष्णु ने कहा कि समय से इलाज न मिल पाने से भाई की मौत हो गयी। उसकी मौत के बाद भी कर्मचारी संवेदनहीन बने रहे। दो घंटे तक मनुहार के बाद शव को पैक किया गया। इसके बाद दो हजार रुपये में तय कर एम्बुलेन्स से शव को घर ले गये।