गोरखपुर: मां-पापा और रिश्तेदार बच्चों को बना रहे तोतला, डॉक्टरों ने बताई वजह
डॉ आदित्य पाठक ने बताया कि पांच से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चे हकलाहट की समस्या लेकर आते हैं। ऐसे मरीजों के अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वह बच्चों को सही बोलने के लिए प्रेरित करें। अगर बच्चा हकला रहा है तो उसे आराम से बैठकर बातचीत के तरीके बताएं।
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बच्चों का शुरुआती दौर में हकलाना या तोतली आवाज में बोलना स्वाभाविक है, लेकिन पांच साल बाद भी बच्चे की स्थिति यही रहती है तो यह चिंता की बात है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पांच साल तक बच्चों में स्पष्ट उच्चारण की क्षमताएं विकसित हो जाती है। फिर अगर बच्चा तुतलाता या हकला रहा है तो इसके जिम्मेदार मां-पापा और उसके रिश्तेदार होते हैं। क्योंकि, लोग उसे सुधारने के बजाए खुद ही दोहराना शुरू कर देते हैं, जो बच्चों की आदतों में शुमार हो जाता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ आदित्य पाठक ने बताया कि दो से पांच वर्ष तक के बच्चों के होंठ चलाने की क्षमता विकसित नहीं हो पाती है। इसकी वजह यह है कि मस्तिष्क बोलने के जिम्मेदार मांसपेशियों को नियंत्रित नहीं कर पाता है।
बच्चे छठें और सातवें साल में वह स्पष्ट उच्चारण करने लगते हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि बच्चे डर, थकान, उदास होने की वजह से हकलाने लगते हैं। माता-पिता बच्चों को सही उच्चारण के लिए प्रेरित भी नहीं करते हैं।
थेरेपिस्ट के सुझाव
बच्चे बात करें तो उन्हें बीच में न रोके। मेहमानों के सामने बच्चे पर बात करने का दबाव न बनाएं। बच्चे को आराम से बोलने की प्रेरित करें। उनसे तोतली आवाज में बात न करें।
अभिभावक इसके लिए खुद ही जिम्मेदार
डॉ आदित्य पाठक ने बताया कि अभिभावकों को बच्चे की हकलाहट या तुतलाहट पहले तो अच्छा लगता है। इन सबके बीच रिश्तेदार भी आते हैं, तो अभिभावक भी उनके सामने उसी भाषा में बच्चों से बात करते हैं। यही बोलना उनकी आदतों में शुमार हो जाता है। इससे निजात के लिए शुरुआती तौर पर बच्चे को आंवला, बादाम, काली मिर्च, दालचीनी, हरा धनिया खिला सकते हैं। इसकी काउंसिलिंग भी जरूरी है।
पांच से 14 वर्ष के बच्चे हकलाहट की समस्या से हैं परेशान
डॉ आदित्य पाठक ने बताया कि पांच से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चे हकलाहट की समस्या लेकर आते हैं। ऐसे मरीजों के अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वह बच्चों को सही बोलने के लिए प्रेरित करें। अगर बच्चा हकला रहा है तो उसे आराम से बैठकर बातचीत के तरीके बताएं। क्योंकि, इसकी विशेष दवा नहीं होती है।