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एमएमएमयूटी: ऑक्सीजन ऑडिट एप का संचालन शुरू, कालाबाजारी रोकने में मिलेगी सफलता
Sat, 08 May 2021 12:18 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 08 May 2021 12:18 PM IST
सार
एप के माध्यम से प्रशासन को ऑक्सीजन की कालाबाजारी रोकने में सफलता तो मिलेगी, अस्पतालों को उनकी जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन भी उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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MMMUT Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
एप के माध्यम से प्रशासन को ऑक्सीजन की कालाबाजारी रोकने में सफलता तो मिलेगी, अस्पतालों को उनकी जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन भी उपलब्ध कराया जा सकेगा। ऑक्सीजन की मांग, आपूर्ति और खपत की जानकारी रखने के लिए इस एप में विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम ने त्रिस्तरीय व्यवस्था की है।
टीम में शामिल एमएमएमयूटी के प्रो. गोविंद पांडेय ने बताया कि बताया कि एप में प्रशासन की सुविधा के लिए तीन फार्मेट दिए गए हैं। पहले फार्मेट में बिक्री और खरीद पर नजर रखने के फीचर्स हैं। दूसरा फार्मेट ऑक्सीजन की परिवहन व्यवस्था की मानिटरिंग के लिए बनाया गया है।
तीसरा फार्मेट मांग, खपत और आपूर्ति में संतुलन बनाने रखने में मदद करेगा। उत्पादन केंद्र से लेकर अस्पतालों तक में ऑक्सीजन की अद्यतन जानकारी एप में समय-समय से अपलोड की जा सके, इसके लिए अस्पतालों को एप की लॉगिन और पासवर्ड दे दिया गया है। इसके दायरे में सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को रखा गया है।
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नोडल अफसर तय किए गए
सभी अस्पताल सही-सही अद्यतन जानकारी अपलोड करते रहें, इसकी मानिटरिंग के लिए नोडल अफसर तय किए गए हैं। यह एप गोरखपुर मंडल के सभी जिलों (देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज और गोरखपुर) के लिए बनाया गया है।
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टीम में शामिल एमएमएमयूटी के प्रो. गोविंद पांडेय ने बताया कि बताया कि एप में प्रशासन की सुविधा के लिए तीन फार्मेट दिए गए हैं। पहले फार्मेट में बिक्री और खरीद पर नजर रखने के फीचर्स हैं। दूसरा फार्मेट ऑक्सीजन की परिवहन व्यवस्था की मानिटरिंग के लिए बनाया गया है।
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तीसरा फार्मेट मांग, खपत और आपूर्ति में संतुलन बनाने रखने में मदद करेगा। उत्पादन केंद्र से लेकर अस्पतालों तक में ऑक्सीजन की अद्यतन जानकारी एप में समय-समय से अपलोड की जा सके, इसके लिए अस्पतालों को एप की लॉगिन और पासवर्ड दे दिया गया है। इसके दायरे में सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को रखा गया है।
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नोडल अफसर तय किए गए
सभी अस्पताल सही-सही अद्यतन जानकारी अपलोड करते रहें, इसकी मानिटरिंग के लिए नोडल अफसर तय किए गए हैं। यह एप गोरखपुर मंडल के सभी जिलों (देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज और गोरखपुर) के लिए बनाया गया है।
ऑक्सीजन कम होते ही जलने लगेगी रेड लाइट
यदि किसी अस्पताल में 18 घंटे से अधिक के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था है तो उसके नाम के आगे ग्रीन लाइट जलेगी। 18 से कम और छह घंटे से अधिक की व्यवस्था होगी तो पीली और छह घंटे से कम की व्यवस्था होगी तो रेड लाइट जलेगी। तीन घंटे से भी कम का ऑक्सीजन अगर किसी अस्पताल में होगा तो रेड लाइट ब्लिंक करने लगेगी। ऐसा होने पर प्रशासन द्वारा उस अस्पताल में तत्काल ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि ऑक्सीजन की मांग, खपत और आपूर्ति की मानिटरिंग करने के लिए विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक फूलप्रूफ एप तैयार करके प्रशासन को सौंप दिया है। एप के संचालन के दौरान यदि किसी अन्य जरूरी फीचर की जरूरत महसूस होती है तो उसे भी एप में जोड़ दिया जाएगा।
ऑक्सीजन आडिट अपर आयुक्त (न्यायिक) नोडल अधिकारी रतिभान ने बताया कि एमएमएमयूटी द्वारा तैयार ऑक्सीजन ऑडिट एप का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। एप के माध्यम से हर अस्पताल को उसकी जरूरत पर ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जाएगा। पूरी कोशिश होगी कि अब किसी जरूरतमंद को ऑक्सीजन की वजह से इलाज में दिक्कत न आने पाए।
एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि ऑक्सीजन की मांग, खपत और आपूर्ति की मानिटरिंग करने के लिए विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक फूलप्रूफ एप तैयार करके प्रशासन को सौंप दिया है। एप के संचालन के दौरान यदि किसी अन्य जरूरी फीचर की जरूरत महसूस होती है तो उसे भी एप में जोड़ दिया जाएगा।
ऑक्सीजन आडिट अपर आयुक्त (न्यायिक) नोडल अधिकारी रतिभान ने बताया कि एमएमएमयूटी द्वारा तैयार ऑक्सीजन ऑडिट एप का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। एप के माध्यम से हर अस्पताल को उसकी जरूरत पर ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जाएगा। पूरी कोशिश होगी कि अब किसी जरूरतमंद को ऑक्सीजन की वजह से इलाज में दिक्कत न आने पाए।