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VLMS: गोरखपुर में राप्ती समेत 17 रेलवे पुलों की हो रही ऑनलाइन मॉनटरिंग, एनईआर में लगा सिस्टम

Mon, 04 Jul 2022 12:34 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 04 Jul 2022 12:34 PM IST
सार

सीपीआरओ एनईआर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि नदियों के जल स्तर की बेहतर एवं आधुनिक मॉनिटरिंग के लिए पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा चिह्नित महत्वपूर्ण एवं वृहद पुलों पर ऑटोमेटिक वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। इस तकनीकी से 24 घंटे में दो बार पुल पर नदी के जल स्तर की सूचना एसएमएस के माध्यम से संबंधित अधिकारी के पास पहुंच जाती है।

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Online monitoring of 17 railway bridges including Rapti in Gorakhpur
गोरखपुर राप्ती नदी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पूर्वोत्तर रेलवे के दायरे में आने वाली 17 नदियों के जलस्तर की सटीक मॉनीटरिंग शुरू कर दी गई है। इसमें गोरखपुर में राप्ती और रोहिन नदी पर बने रेल पुल भी शामिल हैं। यहां वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम (वीएलएमएस) लगाया गया है, जिससे अधिकारियों के मोबाइल पर ही जलस्तर की सटीक जानकारी मिल जाती है।

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पहले इन नदियों पर पारंपरिक गेज पद्धति से नदियों का जलस्तर पता किया जाता था, जिससे तत्कालिक सूचनाएं नहीं मिल पाती थीं। इससे रेलवे ट्रैक और पुल पर खतरे का भांप पाना मुश्किल होता था। लेकिन, आधुनिक वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम के इस्तेमाल से मॉनीटिरिंग आसान हो गई है। गोरखपुर में डोमिनगढ़-जगतबेला खंड के बीच पुल संख्या 182, सहजनवां-जगतबेला के बीच पुल संख्या 184 तथा गोरखपुर पनियहवा-बाल्मिकी नगर के बीच पुल संख्या 50 पर इस सिस्टम को लगाया गया है।
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सीपीआरओ एनईआर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि नदियों के जल स्तर की बेहतर एवं आधुनिक मॉनिटरिंग के लिए पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा चिह्नित महत्वपूर्ण एवं वृहद पुलों पर ऑटोमेटिक वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। इस तकनीकी से 24 घंटे में दो बार पुल पर नदी के जल स्तर की सूचना एसएमएस के माध्यम से संबंधित अधिकारी के पास पहुंच जाती है। पूर्व में जलस्तर मैनुअल तरीके से नामा जाता था। नई व्यवस्था प्रभावी और सटीक है।

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कहां कितने रेल पुलों पर लगा है सिस्टम

मंडल                संख्या
इज्ज्तनगर           04
लखनऊ              07
वाराणसी             06

सिस्टम ऐसे करेगा काम

सोलर सिस्टम के माध्यम से रेल पुल के पास नदी में एक सेंसर लगाया जाता है, जिसमें एक चिप भी होती है। यह सेंसर ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा होता है। इस नई प्रणाली में रेल पुलों से संबद्ध सहायक मंडल इंजीनियर, कार्य निरीक्षक एवं रेल पथ निरीक्षक आदि के मोबाइल नंबर फीड किए गए हैं। प्रतिदिन नियमित अंतराल पर नदियों के जलस्तर के घटने एवं बढ़ने की जानकारी एसएमएस के माध्यम से यह प्रणाली संबंधित अधिकारियों को स्वत: दे देती है।

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