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गोरखपुर: कचहरी को बनाया एक हजार पक्षियों ने अपना नया ठिकाना, यहां करते हैं कलरव
Tue, 21 Sep 2021 02:13 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 21 Sep 2021 02:13 PM IST
सार
नाइट हैरॉन, लेसर कार्मोरेंट, कैटल इग्रीट प्रजाति के प्रवासी पक्षी यहां करते हैं कलरव
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पक्षियों ने कचहरी परिसर के पेड़ों पर अपना ठीकाना बना लिया है।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इन दिनों गोरखपुर शहर की कचहरी नई प्रजाति के पक्षियों का ठिकाना बन गई है। नाइट हैरॉन, लेसर कार्मोरेंट, कैटल इग्रीट प्रजाति की पक्षी यहां बसेरा बनाए हुए हैं। सुबह से लेकर शाम तक इनका कलरव परिसर में सुना जा सकता है। चूंकि, इनका भोजन मरी हुईं मछलियां होती हैं, ऐसे में कचहरी में इन दिनों मछलियों की बदबू अधिवक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गई है।
प्रवासी पक्षियों में अधिकतर का यह महीना प्रजनन के दौर वाला होता है, ऐसे में पेड़ों की छंटाई या पेड़ काटना भी यहां मुनासिब नहीं है। अब, वन विभाग के साथ प्राणि उद्यान के अधिकारी भी इनके प्रजनन के इन विशेष महीनों के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
प्राणि उद्यान के डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि रविवार को निदेशक एच राजामोहन और डीएफओ अविनाश कुमार कचहरी परिसर में गए थे। दरअसल, यहां परिसर में हरे और घने पेड़ों की संख्या काफी है। ऐसे में पक्षियों के कुनबे को इससे सुरक्षित माहौल दूसरा नहीं दिखता है। बताया कि अभी तो इनकी संख्या एक हजार के आसपास है, लेकिन जल्द ही प्रजनन के बाद संख्या तीन हजार से अधिक हो जाएगी। उनका भोजन मछलियां हैं। ऐसे में ताल या अन्य आसपास से लेकर मछलियां आने और पेड़ की डालियों पर बैठकर पक्षियों के द्वारा इन्हें खाने के क्रम में यह मछलियां कचहरी परिसर में गिर जाती हैं।
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ये सभी पक्षी वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में संरक्षित हैं। ऐसे में इन्हें मनमाने तरीके से हटाया भी नहीं जा सकता। बताया कि प्रशासन ने इस समस्या को लेकर संपर्क किया था, लेकिन उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराने के साथ अब उनके प्रजनन के महीनों के पूरा होने तक का इंतजार किया जा रहा है।
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प्रवासी पक्षियों में अधिकतर का यह महीना प्रजनन के दौर वाला होता है, ऐसे में पेड़ों की छंटाई या पेड़ काटना भी यहां मुनासिब नहीं है। अब, वन विभाग के साथ प्राणि उद्यान के अधिकारी भी इनके प्रजनन के इन विशेष महीनों के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
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प्राणि उद्यान के डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि रविवार को निदेशक एच राजामोहन और डीएफओ अविनाश कुमार कचहरी परिसर में गए थे। दरअसल, यहां परिसर में हरे और घने पेड़ों की संख्या काफी है। ऐसे में पक्षियों के कुनबे को इससे सुरक्षित माहौल दूसरा नहीं दिखता है। बताया कि अभी तो इनकी संख्या एक हजार के आसपास है, लेकिन जल्द ही प्रजनन के बाद संख्या तीन हजार से अधिक हो जाएगी। उनका भोजन मछलियां हैं। ऐसे में ताल या अन्य आसपास से लेकर मछलियां आने और पेड़ की डालियों पर बैठकर पक्षियों के द्वारा इन्हें खाने के क्रम में यह मछलियां कचहरी परिसर में गिर जाती हैं।
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ये सभी पक्षी वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में संरक्षित हैं। ऐसे में इन्हें मनमाने तरीके से हटाया भी नहीं जा सकता। बताया कि प्रशासन ने इस समस्या को लेकर संपर्क किया था, लेकिन उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराने के साथ अब उनके प्रजनन के महीनों के पूरा होने तक का इंतजार किया जा रहा है।