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Gorakhpur News: मोटापा और खराब दिनचर्या बच्चों को बना रहा शुगर का मरीज, जानिए डॉक्टर क्या दे रहे सलाह
Mon, 20 Feb 2023 01:56 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 20 Feb 2023 01:56 PM IST
सार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पवन प्रधान ने कहा कि डॉक्टरों की उम्र आम नागरिकों की अपेक्षा लगभग 10 साल कम होती है। इसकी मुख्य वजह तनाव है। इतना ही नहीं, 27 प्रतिशत लोगों की मौत हार्ट अटैक और 25 प्रतिशत की मौत का कारण कैंसर है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के नए भवन, तारामंडल में रविवार को संगोष्ठी आयोजन किया गया। एंडोक्राइनोलाजिस्ट डॉ. कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि टाइप टू डायबिटीज (मधुमेह) अब 10 से 12 साल के बच्चों को भी हो रहा है। यह बीमारी पहले 40 साल से अधिक की उम्र के लोगों को होती थी।
उन्होंने कहा कि बच्चों में मधुमेह का सबसे बड़ा कारण मोटापा, खराब दैनिक दिनचर्या, जंक फूड, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक और कृत्रिम पेय पदार्थ का सेवन, मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी का ज्यादा इस्तेमाल है। बच्चों को इनसे बचाने की जरूरत है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पवन प्रधान ने कहा कि डॉक्टरों की उम्र आम नागरिकों की अपेक्षा लगभग 10 साल कम होती है। इसकी मुख्य वजह तनाव है। इतना ही नहीं, 27 प्रतिशत लोगों की मौत हार्ट अटैक और 25 प्रतिशत की मौत का कारण कैंसर है। इसलिए डॉक्टरों को अपने दिनचर्या पर ध्यान देने की जरूरत है।
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संगोष्ठी को आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आरपी त्रिपाठी, सचिव डॉ. अमित मिश्रा ने भी संबोधित किया। संचालन वैज्ञानिक सचिव डॉ. ओंकार राय ने किया। इस मौके पर नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. शिवशंकर शाही, डॉ. एके सिंह, डॉ. आरके पांडेय, डॉ. रितेश कुमार, डॉ. रजनीश चतुर्वेदी, डॉ. पीसी शाही आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि बच्चों में मधुमेह का सबसे बड़ा कारण मोटापा, खराब दैनिक दिनचर्या, जंक फूड, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक और कृत्रिम पेय पदार्थ का सेवन, मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी का ज्यादा इस्तेमाल है। बच्चों को इनसे बचाने की जरूरत है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पवन प्रधान ने कहा कि डॉक्टरों की उम्र आम नागरिकों की अपेक्षा लगभग 10 साल कम होती है। इसकी मुख्य वजह तनाव है। इतना ही नहीं, 27 प्रतिशत लोगों की मौत हार्ट अटैक और 25 प्रतिशत की मौत का कारण कैंसर है। इसलिए डॉक्टरों को अपने दिनचर्या पर ध्यान देने की जरूरत है।
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संगोष्ठी को आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आरपी त्रिपाठी, सचिव डॉ. अमित मिश्रा ने भी संबोधित किया। संचालन वैज्ञानिक सचिव डॉ. ओंकार राय ने किया। इस मौके पर नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. शिवशंकर शाही, डॉ. एके सिंह, डॉ. आरके पांडेय, डॉ. रितेश कुमार, डॉ. रजनीश चतुर्वेदी, डॉ. पीसी शाही आदि मौजूद रहे।