गोरखपुर में तेजी से घटे कोरोना पॉजिटिव, फिर भी स्वास्थ्य विभाग को सता रही यह चिंता
- जनवरी माह में मिलने वाले मरीजों में 70 फीसदी मरीज गंभीर श्रेणी वाले
- बीआरडी में मौजूदा समय में करीब 60 मरीज हैं भर्ती
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कोरोना मरीजों की संख्या में आई कमी ने भले ही विभाग को राहत दी है। लेकिन इस बीच केवल गंभीर मरीजों की संख्या ने बीआरडी की मुश्किलें फिर से बढ़ा दी है। मौजूदा समय में जो भी मरीज कोरोना के मिल रहे हैं, उनमें 70 प्रतिशत गंभीर मरीज शामिल हैं। इनकी उम्र 50 से अधिक है। इस वक्त बीआरडी मेडिकल कॉलेज में करीब 60 गंभीर मरीजों का इलाज कोविड वार्ड में चल रहा है।
जानकारी के मुताबिक नवंबर माह से कोरोना मरीजों की संख्या में आई कमी ने विभाग को काफी राहत दी। इस माह केवल 1093 मरीज मिले थे। जबकि दिसंबर माह में यह संख्या और कम हो गई। इस माह केवल 937 मरीज मिले। मरीजों की संख्या कम होने की वजह से बीआरडी में दिसंबर माह में अधिकतम 40 मरीज ही भर्ती थे। लेकिन जनवरी में यह आंकड़ा अचानक बढ़ गया।
इसकी वजह जनवरी माह में आठ दिनों में जो भी मरीज मिले हैं, वह काफी गंभीर श्रेणी के हैं। इन मरीजों को पहले से कोई न कोई बीमारी है। इसकी वजह से इन्हें बीआरडी में भर्ती होना पड़ा है। पांच जनवरी को तो दिन में 17 गंभीर मरीजों को भर्ती करना पड़ा। बीआरडी प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से मरीजों के आंकड़े अचानक बढ़े हैं। यह मरीज गंभीर है। इनका इलाज कोविड वार्ड में चल रहा है।
50 से अधिक उम्र हैं 80 प्रतिशत मरीज
बीआरडी में भर्ती मौजूदा समय में जो भी मरीज भर्ती है। उनमें से अधिकांश की उम्र 50 से अधिक है। यह ऐसे मरीज हैं, जिनको पहले से ही शुगर, हार्ट, किडनी, चेस्ट आदि की बीमारी है। यही वजह है कि इन पर संक्रमण का असर अधिक रहा है। प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि लोग अब लापरवाही कर रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि जिनकी इम्युनिटी कमजोर हैं, उन पर संक्रमण का असर जल्द हो रहा है।
नौ दिनों में आठ की हो चुकी है मौत
जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में आठ संक्रमित मरीजों की मौत बीआरडी में हो चुकी है। जबकि पिछले साल दिसंबर माह में केवल 19 मरीजों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों को डर है कि अगर इसी तरह लापरवाही होती रही तो मौत के आंकड़े अभी और बढ़ेंगे।