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सौगात: अब गोरखपुर में ही हो सकेगी वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच, पीएम मोदी करेंगे शुभारंभ

Mon, 06 Dec 2021 06:57 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 06 Dec 2021 06:57 PM IST
सार

अब गोरखपुर में ही आने वाले समय में कोरोना काल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वैरिएंट अधिक प्रभावित कर रहा है।

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Now world class investigation of virus-borne diseases can be done in Gorakhpur only
गोरखपुर आईसीएमआर आरएमआरसी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच के लिए नमूने अब बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे। इनकी जांच यही हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को खाद कारखाना और एम्स के साथ ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने रिजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) के अत्याधुनिक नौ लैब का शुभारंभ भी करेंगे।

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पूर्वांचल के लिए त्रासदी बन चुकी इंसेफेलाइटिस के वायरस की पहचान के लिए अभी तक नमूने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलोजी पुणे भेजे जाते थे। कई बार ऐसा होता था कि बीमारी की पहचान के लिए रिपोर्ट आते-आते पीड़ित की जान चली जाती थी। इस पीड़ा को महसूस करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर गोरखपुर में ही इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच उपलब्ध हो गई है।
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यह संभव हुआ है इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) के जरिए। मुख्यमंत्री योगी के प्रयास से शुरू आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब बनाई गई हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनका लोकार्पण करेंगे। आरएमआरसी की लैब के जरिए न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी, बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम पर व्यापक स्तर पर वर्ल्ड क्लास अनुसंधान हो सकेगा।
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खास बात यह है कि अब गोरखपुर में ही आने वाले समय में कोरोना काल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वैरिएंट अधिक प्रभावित कर रहा है। आरएमआरसी की पांच मंजिला बिल्डिंग में अवस्थापना सुविधाओं में करीब 36 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसका शिलान्यास 2018 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर किया था। इसकी बिल्डिंग में 500 केवी का सोलर प्लांट भी लगा है, जिससे 200 यूनिट बिजली की बचत होगी।

 

इन लैबों का लोकार्पण

इम्युनोलॉजी: वैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता और उसके प्रभाव पर शोध होंगे।
मॉलीक्यूलर बायोलॉजी: जीनोम सिक्वेंसिंग की जा सकेगी। अभी जीन सीक्वेसिंग के लिए नमूने दिल्ली व पुणे भेजे जाते हैं।
मॉइकोलॉजी: फंगल की जांच सहित शोध हो सकेगा।
मेडिकल इंटेमोलॉजी: डेंगू, चिकनगुनिया, इंसेफ्लाइटिस आदि के वाहक कीटों पर शोध होगा।
नान कम्युनिकेबल डिजीज: मधुमेह व हाइपरटेंशन के कारणों की जांच की जाएगी।
माइक्रोबायोलॉजी: वायरस और बैक्टीरिया पर शोध होंगे।
सोशल विहैवियर स्टडी: मानसिक बीमारियों पर शोध किया जाएगा।
हेल्थ कम्युनिकेशन:  बीमारियों की रोकथाम के उपायों के प्रचार-प्रसार का प्रमुख जरिया।
इंटरनेशनल हेल्थ पालिसी: इसके जरिए विश्व स्तर की होने वाली बीमारियों के बारे में लोगों को बताया जाएगा।

निदेशक डॉ रजनीकांत ने कहा कि जीन मैपिंग से लेकर वैक्सीन की क्षमता, नई बीमारियों पर शोध, वायरस और बैक्टीरिया की पहचान, मानसिक बीमारियों पर शोध जैसे बड़े काम हो सकेंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि लैब में जीनोम सीक्वेसिंग जांच की सुविधा शुरू हो जाएगी। इसकी डिमांड पूरे विश्व भर में है।

 

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