Exclusive: घोड़ा पालने के शौकीन हैं तो देना होगा जीएसटी, न देने पर मानी जाएगी 'कर चोरी'
घोड़े का खरीद मूल्य यदि 50 हजार रुपये से अधिक है तो ई-वे बिल बनवाना होगा। अगर ऐसा नहीं किया तो कर चोरी के दोषी मान लिए जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि शहर में फिलहाल 136 घोड़े चिह्नित किए गए हैं। अब इनके पालकों से कर वसूली की तैयारी है।
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अगर आप घोड़ा पालने के शौकीन हैं, तो अब कर चुकाना होगा। वस्तु एवं सेवा कर विभाग ने घोड़ा खरीदने और बेचने पर 12 प्रतिशत जीएसटी अनिवार्य कर दिया है। बिना जीएसटी भुगतान के खरीद-फरोख्त करने वाले कर चोरी के दायरे में आएंगे।
यही नहीं, घोड़े का खरीद मूल्य यदि 50 हजार रुपये से अधिक है तो ई-वे बिल बनवाना होगा। अगर ऐसा नहीं किया तो कर चोरी के दोषी मान लिए जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि शहर में फिलहाल 136 घोड़े चिह्नित किए गए हैं। अब इनके पालकों से कर वसूली की तैयारी है।
घोड़ों को शान की सवारी माना जाता रहा है। वर्तमान में घोड़ों की खरीद-फरोख्त बड़ा व्यवसाय बन चुका है। शायद इसलिए जीएसटी विभाग ने इस व्यवसाय को अब कर के दायरे में ला दिया है।
पशुओं का व्यापार कर मुक्त होने की वजह से उनका पंजीकरण नहीं होता था। इस वजह से कोई रिकॉर्ड भी नहीं होता था। जीएसटी के दायरे में लाने के बाद अब घोड़ों का डाटा तैयार किया जा रहा है। अब जीएसटी की टीम घोड़े के शौकीन या व्यावसायिक रूप से घोड़ों का प्रयोग करने वालों के परिसर में जांच के लिए जा सकती है। इस दौरान अगर पालक के पास खरीदारी के समय का कर अदायगी का कागजात नहीं मिला तो कर की चोरी मानी जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
यही नहीं, जीएसटी की टीम घोड़े को खरीदने के संदर्भ की भी जांच करेगी। अगर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए घोड़े खरीदकर लाए गए हैं, तो खरीद के समय से जांच के दौरान किए गए आर्थिक लाभ की गणना के आधार पर कर का निर्धारण किया जाएगा। शौकिया घोड़े पालने वालों को भी कर का भुगतान करना पड़ेगा।
ये जानवर खरीद-फरोख्त पर जीएसटी से बाहर
सूअर, गधा, भेड़, बकरी की खरीद-फरोख्त पर जीएसटी नहीं लगेगा। इसी तरह गाय, भैंस, कुत्ता, बैल, हाथी, ऊंट व अन्य पालतू पशुओं की खरीद-फरोख्त को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।
ग्रेड-1 जीएसटी अपर आयुक्त विमल कुमार राय ने कहा कि घोड़े की खरीद-फरोख्त पर 12 प्रतिशत जीएसटी तय है। अगर किसी ने घोड़ा खरीदा है तो उसके पास जीएसटी चुकाने का पूरा ब्योरा होना चाहिए। जांच के समय खरीदी या बेची गई पर्ची के साथ जीएसटी भुगतान की रसीद होनी जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर कर चोरी के दायरे में आ जाएंगे।