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Gorakhpur News: अब बेकार हुआ पौने दो करोड़ कीमत का सफर
Tue, 17 Oct 2023 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 17 Oct 2023 11:51 PM IST
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कलक्ट्रेट परिसर में लगा है एक्यूआई और मौसम की जानकारी देने वाला विशेष उपकरण
हर साल संचालन पर 25 लाख रुपये का खर्च, ऑपरेटर के अभाव में हो रहा खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। शहर की हवा लगातार प्रदूषित हो रही है। निर्माण कार्यों के कारण एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) बढ़ रहा है। हवा की गुणवत्ता और मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए कलक्ट्रेट परिसर में लगा पौने दो करोड़ रुपये कीमत का सफर अब बेकार हो गया है। ऑपरेटर के अभाव में इस मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए कोई पहल नहीं हो पा रही है। इससे उपकरण की उपयोगिता नहीं रह गई। धीरे धीरे इसके खराब होने की आशंका बढ़ती जा रही है।
वर्ष 2020 में कलक्ट्रेट परिसर में हवा के प्रदूषण की जांच के लिए करीब 1.75 करोड़ की लागत से सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) स्टेशन बनाया गया। यूनिसेफ के सहयोग से इस स्टेशन को स्थापित करने वाली संस्था भारतीय उष्ण कटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे ने इसका संचालन किया। करीब एक साल बाद ही वर्ष 2021 के अक्तूबर माह में संस्था से इसका अनुबंध खत्म हो गया। बजट नहीं होने की वजह से वहां तैनात किए गए कर्मचारियों को वापस बुला लिया गया। तभी से यह मशीन बंद पड़ी हुई है।
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25 लाख रुपये हर साल का खर्च, कैसे करें इंतजाम
कलक्ट्रेट परिसर में लगे सफर स्टेशन के संचालन में कर्मचारी, उपकरणों की मरम्मत सहित कुल करी 25 लाख रुपये का सालाना खर्च आता है। इस बजट के अभाव में सफर चल नहीं पा रहा है। इससे मौसम और एक्यूआई की सटीक जानकारी लेने में दिक्कत आ रही है।
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इससे जुड़े लोगों का कहना है कि सफर एक आधुनिक व्यवस्था है, जिसके माध्यम से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम)-10, पीएम-5, पीएम 2.5 और पीएम-1 समेत प्रदूषण के अन्य कारकों को बारीकी से मापा जाता है। यह हर घंटे प्रदूषण का स्तर बताता है, जबकि इससे तापमान, कुल वर्षा का मापन और मौसम का पूर्वानुमान भी लगाया जाता है। इसे चलाने के लिए फरवरी माह में दोबारा प्रयास हुआ था। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
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किसी विभाग ने नहीं ली जिम्मेदारी
जिला प्रशासन से जुड़े लोगों का कहना है कि शुरुआत में सफर का संचालन कार्यदायी संस्था ने किया। उसका टेंडर खत्म होने के बाद किसी विभाग ने जिम्मेदारी नहीं ली। इस संबंध में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखा गया था। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। आपदा प्रबंधन विभाग के पास इसके लिए कोई बजट नहीं है। ऐसे मेें पौने दो करोड़ रुपये की लागत से स्थापित सिस्टम के खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
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सफर के यह हैं फायदे
जानकारों के अनुसार सफर से वायु गुणवत्ता के संबंध में वास्तविक डेटा मिल जाता है। मौसम का पूर्वानुमान भी बताता है। इससे वायु गुणवत्ता एक से तीन दिन पहले, मौसम का एक से तीन दिनों तक पूर्वानुमान और वायु प्रदूषण में उत्सर्जन की सही जानकारी मिलती है। शहरों में प्रदूषण के स्तर के साथ-साथ स्थानीय वायु गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के लिए इसे लगाया जाता है।
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हर साल संचालन पर 25 लाख रुपये का खर्च, ऑपरेटर के अभाव में हो रहा खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। शहर की हवा लगातार प्रदूषित हो रही है। निर्माण कार्यों के कारण एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) बढ़ रहा है। हवा की गुणवत्ता और मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए कलक्ट्रेट परिसर में लगा पौने दो करोड़ रुपये कीमत का सफर अब बेकार हो गया है। ऑपरेटर के अभाव में इस मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए कोई पहल नहीं हो पा रही है। इससे उपकरण की उपयोगिता नहीं रह गई। धीरे धीरे इसके खराब होने की आशंका बढ़ती जा रही है।
वर्ष 2020 में कलक्ट्रेट परिसर में हवा के प्रदूषण की जांच के लिए करीब 1.75 करोड़ की लागत से सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) स्टेशन बनाया गया। यूनिसेफ के सहयोग से इस स्टेशन को स्थापित करने वाली संस्था भारतीय उष्ण कटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे ने इसका संचालन किया। करीब एक साल बाद ही वर्ष 2021 के अक्तूबर माह में संस्था से इसका अनुबंध खत्म हो गया। बजट नहीं होने की वजह से वहां तैनात किए गए कर्मचारियों को वापस बुला लिया गया। तभी से यह मशीन बंद पड़ी हुई है।
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25 लाख रुपये हर साल का खर्च, कैसे करें इंतजाम
कलक्ट्रेट परिसर में लगे सफर स्टेशन के संचालन में कर्मचारी, उपकरणों की मरम्मत सहित कुल करी 25 लाख रुपये का सालाना खर्च आता है। इस बजट के अभाव में सफर चल नहीं पा रहा है। इससे मौसम और एक्यूआई की सटीक जानकारी लेने में दिक्कत आ रही है।
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इससे जुड़े लोगों का कहना है कि सफर एक आधुनिक व्यवस्था है, जिसके माध्यम से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम)-10, पीएम-5, पीएम 2.5 और पीएम-1 समेत प्रदूषण के अन्य कारकों को बारीकी से मापा जाता है। यह हर घंटे प्रदूषण का स्तर बताता है, जबकि इससे तापमान, कुल वर्षा का मापन और मौसम का पूर्वानुमान भी लगाया जाता है। इसे चलाने के लिए फरवरी माह में दोबारा प्रयास हुआ था। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
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किसी विभाग ने नहीं ली जिम्मेदारी
जिला प्रशासन से जुड़े लोगों का कहना है कि शुरुआत में सफर का संचालन कार्यदायी संस्था ने किया। उसका टेंडर खत्म होने के बाद किसी विभाग ने जिम्मेदारी नहीं ली। इस संबंध में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखा गया था। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। आपदा प्रबंधन विभाग के पास इसके लिए कोई बजट नहीं है। ऐसे मेें पौने दो करोड़ रुपये की लागत से स्थापित सिस्टम के खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
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सफर के यह हैं फायदे
जानकारों के अनुसार सफर से वायु गुणवत्ता के संबंध में वास्तविक डेटा मिल जाता है। मौसम का पूर्वानुमान भी बताता है। इससे वायु गुणवत्ता एक से तीन दिन पहले, मौसम का एक से तीन दिनों तक पूर्वानुमान और वायु प्रदूषण में उत्सर्जन की सही जानकारी मिलती है। शहरों में प्रदूषण के स्तर के साथ-साथ स्थानीय वायु गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के लिए इसे लगाया जाता है।