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गोरखपुर: नूर मोहम्मद को जमीन-मकान पर मिला कब्जा, नायब तहसीलदार ने राजस्वकर्मियों के साथ कराई पैमाइश

Wed, 03 Nov 2021 02:06 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 03 Nov 2021 02:06 PM IST
सार

जैतपुर गौसपुर गांव निवासी नूर मोहम्मद बीते तीस वर्ष से रोजगार के सिलसिले में में दिल्ली में रह रहे थे। 2008 में गांव में हुई चकबंदी में गांव के ही कुछ लोगों ने उनकी मृत्यु का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर उनकी जमीन हड़प ली थी।

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Noor Mohammad of Gorakhpur got possession of land and house
नूर मोहम्मद - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर के सहजनवां इलाके में धोखाधड़ी का शिकार हुए नूर मोहम्मद को आखिरकार मंगलवार को मकान और खेत पर कब्जा मिल गया। धनतरेस के कारण मंगलवार को भी पुलिस बल नहीं मिला, बावजूद इसके नायब तहसीलदार सहजनवां अमित सिंह ने राजस्वकर्मियों और गांव वालों के साथ जमीन की पैमाइश कराई। मकान पर ताला जड़ कर नूर मोहम्मद को कब्जा दिला दिया।
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जैतपुर गौसपुर गांव निवासी नूर मोहम्मद बीते तीस वर्ष से रोजगार के सिलसिले में में दिल्ली में रह रहे थे। 2008 में गांव में हुई चकबंदी में गांव के ही कुछ लोगों ने उनकी मृत्यु का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर उनकी जमीन हड़प ली थी। सितंबर 2021 में लौटे नूर मोहम्मद ने इसकी जानकारी होने के बाद खुद को जिंदा बताते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाए और जमीन व पैतृक सामान लौटाने की मांग की। अमर उजाला ने उनका मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इसका परिणाम यह हुआ कि राजस्व और चकबंदी विभाग ने उन्हें जीवित घोषित किया।
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नूर मोहम्मद राजस्व कागजों में जिंदा तो हो गए, लेकिन उनकी जमीन और आवास वापस नहीं मिले। उनकी अपील पर एसडीएम सहजनवां ने राजस्वकर्मियों की पांच सदस्यीय टीम बना कर उनकी जमीन पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया था। बीते शनिवार को पुलिस बल नहीं मिलने से राजस्व टीम को बैरंग लौटना पड़ा था।
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मंगलवार को एक बार फिर नायब तहसीलदार सहजनवां अमित सिंह थाने पहुंचे, लेकिन धनतेरस ड्यूटी होने के कारण पुलिस बल नहीं मिल सका। इस पर वह कानूनगो इब्राहिम, प्रधान प्रतिनिधि उपेंद्र कुमार, हलका लेखपाल जितेंद्र मिश्रा, चंद्र प्रकाश पांडेय, नासिर हसन, नौशाद और नूर मोहम्मद के साथ जैतपुर गौसपुर गांव पहुंचे।


टीम ने खेतों की पैमाइश कर जमीन पर कब्जा दिला दिया। साथ ही पुश्तैनी मकान खाली करा उन्हें सौंप दिया गया। नूर मोहम्मद ने मकान पर ताला लगाकर अपने कब्जे की पुष्टि की। इस मौके पर मौजूद रहे गांव वालों और नूर मोहम्मद ने न्याय मिलने पर खुशी जताई।
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