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यूपी: सुरक्षा की गुहार लगाने थाने पहुंचा बुजुर्ग, बोला- पड़ोसियों ने मृत घोषित कर हड़प लिया जमीन
Thu, 23 Sep 2021 12:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 Sep 2021 12:18 PM IST
सार
आरोप है कि कुछ लोगों ने कागजों में उन्हें और भाई को मृत दिखाकर पैतृक संपत्ति हड़प ली। 2008 में गांव में चकबंदी हुई थी, इसी दौरान फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है।
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जान की सुरक्षा मांगने गीडा थाने पहुंचे नूर मोहम्मद।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
रोजगार के सिलसिले में जो नूर मोहम्मद 30 वर्षों से दिल्ली में रह रहे थे, 13 साल पहले राजस्व भू-अभिलेखों में उनकी मौत हो चुकी है। 70 वर्षीय बुजुर्ग नूर मोहम्मद हाल ही गोरखपुर आए तो उन्हें अपने और भाई के इंतकाल की खबर लगी। नूर मोहम्मद का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने सरकारी कागजों में उन्हें और उनके भाई को मारकर जैतपुर गांव स्थित उनकी आठ बीघा से अधिक (करीब एक हेक्टेयर) पैतृक जमीन और घर हड़प लिया। नूर मोहम्मद, खौफजदा है कि जिन्होंने उन्हें और उनके भाई को कागजों में मारा, अब असल में उन्हें और उनके परिवार को न हलाक कर डालें। यह आशंका जताते हुए उन्होंने थाने में शिकायत की है। नूर मोहम्मद के दो बेटे और दो भतीजे हैं।
जानकारी के मुताबिक सहजनवां तहसील के जैतपुर गांव निवासी नूर मोहम्मद (70) बुधवार को जान की सुरक्षा मांगने गीडा थाने पहुंचे थे। नूर मोहम्मद के मुताबिक जैतपुर गांव में उनका पैतृक आवास और खेती की जमीन है। उन्होंने गांव के कुछ लोगों को खेत बटाई पर दे रखा था। वर्ष 2008 में गांव में चकबंदी हुई।
नूर मोहम्मद का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने चकबंदी अधिकारी रुस्तमपुर गोरखपुर के न्यायालय में वर्ष 2008 में फर्जी दस्तावेज लगाकर, उन्हें और उनके भाई नसरुल्लाह को मृत दर्शा दिया और पैतृक आवास व खेती की जमीन पर कब्जा कर लिया।
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नूर मोहम्मद के भाई नसरुल्लाह की मृत्यु 2011 में हुई थी और वह स्वयं दिल्ली में रह रहे थे। कुछ माह पहले वह दिल्ली से परिवार सहित लौटे तो जानकारी हुई कि उनकी सारी संपत्ति किसी दूसरे के नाम हो चुकी है। इसके बाद से वह अपनी अचल संपत्ति पाने के लिए तहसील और थाने के चक्कर लगा रहे हैं। प्रभारी निरीक्षक गीडा दिनेश दत्त मिश्रा ने बताया कि नूर मोहम्मद की शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।
मृत बताकर जमीन हड़पे जाने का यह चौथा मामला
तहसील क्षेत्र में जमीन हड़पने का यह चौथा मामला प्रकाश में आया है। इससे पूर्व सहजनवां तहसील क्षेत्र के पाली ब्लॉक के मलउर्फ उर्फ मुस्तफाबाद निवासी जियाऊ, भक्ति निवासी रामकृष्ण हरिदास और मकरहट निवासी रामचंद्र को तत्कालीन राजस्व कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मिलीभगत से रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया था। इनकी खबर को अमर उजाला ने समय-समय पर प्रकाशित किया था। नतीजा, सरकारी अमला सक्रिय हुआ और इसके बाद ये सभी लोग कागजों में भी जिंदा हो गए।
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जानकारी के मुताबिक सहजनवां तहसील के जैतपुर गांव निवासी नूर मोहम्मद (70) बुधवार को जान की सुरक्षा मांगने गीडा थाने पहुंचे थे। नूर मोहम्मद के मुताबिक जैतपुर गांव में उनका पैतृक आवास और खेती की जमीन है। उन्होंने गांव के कुछ लोगों को खेत बटाई पर दे रखा था। वर्ष 2008 में गांव में चकबंदी हुई।
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नूर मोहम्मद का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने चकबंदी अधिकारी रुस्तमपुर गोरखपुर के न्यायालय में वर्ष 2008 में फर्जी दस्तावेज लगाकर, उन्हें और उनके भाई नसरुल्लाह को मृत दर्शा दिया और पैतृक आवास व खेती की जमीन पर कब्जा कर लिया।
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नूर मोहम्मद के भाई नसरुल्लाह की मृत्यु 2011 में हुई थी और वह स्वयं दिल्ली में रह रहे थे। कुछ माह पहले वह दिल्ली से परिवार सहित लौटे तो जानकारी हुई कि उनकी सारी संपत्ति किसी दूसरे के नाम हो चुकी है। इसके बाद से वह अपनी अचल संपत्ति पाने के लिए तहसील और थाने के चक्कर लगा रहे हैं। प्रभारी निरीक्षक गीडा दिनेश दत्त मिश्रा ने बताया कि नूर मोहम्मद की शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।
मृत बताकर जमीन हड़पे जाने का यह चौथा मामला
तहसील क्षेत्र में जमीन हड़पने का यह चौथा मामला प्रकाश में आया है। इससे पूर्व सहजनवां तहसील क्षेत्र के पाली ब्लॉक के मलउर्फ उर्फ मुस्तफाबाद निवासी जियाऊ, भक्ति निवासी रामकृष्ण हरिदास और मकरहट निवासी रामचंद्र को तत्कालीन राजस्व कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मिलीभगत से रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया था। इनकी खबर को अमर उजाला ने समय-समय पर प्रकाशित किया था। नतीजा, सरकारी अमला सक्रिय हुआ और इसके बाद ये सभी लोग कागजों में भी जिंदा हो गए।