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नेपाल: लुंबिनी में पर्यटन कारोबार को झटका, बताई जा रही ये वजह
Wed, 27 Jan 2021 04:40 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
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Published by: vivek shukla
Updated Wed, 27 Jan 2021 04:40 PM IST
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Nepal news
- फोटो : अमर उजाला।
कोविड महामारी के कारण पूरे साल नेपाल का पर्यटन उद्योग ठप रहा। पर्यटन उद्योग नेपाल के आर्थिक स्रोत का बड़ा जरिया है। नेपाल में यूं तो पर्यटन के दृष्टि से एक से एक आकर्षक व दर्शनीय स्थल है। इनमें से मैदानी क्षेत्र में स्थित गौतम बुद्ध की जन्म स्थली लुंबिनी सबसे महत्वपूर्ण है। यह विश्वभर के बुद्ध अनुयायियों का पूज्यनीय तीर्थ स्थल भी है। नेपाल का पर्यटन मंत्रालय इस बात से चिंतित है कि लुंबिनी पर्यटकों को अब अपनी ओर नहीं पा लुभा रहा।
कोविड के शुरुआती दौर से ही यहां पर्यटकों की आवाजाही स्थगित है। नेपाल ने अपने देश को कोविड से बचाने के लिए हवाई और सड़क मार्ग पूर्णतया बंद कर दिया था जो अभी भी जारी है। स्थिति सामान्य होने में कितना समय लग सकता है, अभी भी तय नहीं है, इसलिए अरबों के होटल खोलने वाले व्यवसायी चिंतित हैं। हालांकि लुंबिनी आने वाले बुद्ध अनुयायी या पर्यटकों की पिछले सात आठ सालों की संख्या पर गौर करें तो कोविड काल से पहले भी निराशा जैसी स्थिति रही है।
लुंबिनी आने वाले केवल 30 प्रतिशत पर्यटक ही एक रात लुंबिनी में बिताते हैं। हालांकि, इन पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए लुंबिनी के होटलों में एक दिन में तीन हजार से अधिक लोगों को बैठाने की क्षमता है।
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कोविड के शुरुआती दौर से ही यहां पर्यटकों की आवाजाही स्थगित है। नेपाल ने अपने देश को कोविड से बचाने के लिए हवाई और सड़क मार्ग पूर्णतया बंद कर दिया था जो अभी भी जारी है। स्थिति सामान्य होने में कितना समय लग सकता है, अभी भी तय नहीं है, इसलिए अरबों के होटल खोलने वाले व्यवसायी चिंतित हैं। हालांकि लुंबिनी आने वाले बुद्ध अनुयायी या पर्यटकों की पिछले सात आठ सालों की संख्या पर गौर करें तो कोविड काल से पहले भी निराशा जैसी स्थिति रही है।
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लुंबिनी आने वाले केवल 30 प्रतिशत पर्यटक ही एक रात लुंबिनी में बिताते हैं। हालांकि, इन पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए लुंबिनी के होटलों में एक दिन में तीन हजार से अधिक लोगों को बैठाने की क्षमता है।
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आने वाले पर्यटकों पर एक नजर
सिद्धार्थ होटल एसोसिएशन लुंबिनी के अध्यक्ष मिथुन मान श्रेष्ठ कहते हैं कि अब हालात यह है कि कई होटल बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। गौरतलब है कि नेपाल का लुंबिनी दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक विरासत है। लुंबिनी के निकट ही भैरहवा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शुरू हो जाने से लुंबिनी के महत्व के विस्तार की संभावना है और तब देश विदेश के पर्यटकों के लुंबिनी आने के प्रतिशत में वृद्धि होना तय है।
लुंबिनी क्षेत्र के होटल व रेस्टोरेंट उद्यमी एसोसिएशन के अध्यक्ष रूपेंद्र जीसी ने बताया कि कोविड के वजह से नेपाल में पर्यटन कारोबार को झटका लगा है। 2020 में पर्यटक न के बराबर आए। वर्ष 2012 में 136067, वर्ष 2013 में 125495, वर्ष 2014 में 328329, वर्ष 2015 में 129180, वर्ष 2016 में 136253, वर्ष 2017 में 145796, वर्ष 2018 में 169180 व वर्ष 2019 में 174015 विदेशी पर्यटक लुंबिनी दर्शन को आए थे। वर्ष 2021 में अब तक पर्यटकों की कोई सुगबुगाहट नहीं हो पाई है।
लुंबिनी क्षेत्र के होटल व रेस्टोरेंट उद्यमी एसोसिएशन के अध्यक्ष रूपेंद्र जीसी ने बताया कि कोविड के वजह से नेपाल में पर्यटन कारोबार को झटका लगा है। 2020 में पर्यटक न के बराबर आए। वर्ष 2012 में 136067, वर्ष 2013 में 125495, वर्ष 2014 में 328329, वर्ष 2015 में 129180, वर्ष 2016 में 136253, वर्ष 2017 में 145796, वर्ष 2018 में 169180 व वर्ष 2019 में 174015 विदेशी पर्यटक लुंबिनी दर्शन को आए थे। वर्ष 2021 में अब तक पर्यटकों की कोई सुगबुगाहट नहीं हो पाई है।