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DDU News: चीन के जाल में फंस रहा नेपाल, भारत से बढ़ रही दूरी
Mon, 20 Nov 2023 12:42 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 20 Nov 2023 12:42 PM IST
सार
विभाग में शिक्षकों और छात्रों के समक्ष अपनी शोध-पत्र की प्रस्तुति के दौरान उन्होंने भारत व नेपाल के सामाजिक संबंधों पर जोर दिया और इसे लेकर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि भारत को नेपाल से अपने संबंधों के सुधार के लिए वहां की जनता से संपर्क बढ़ाना होगा।
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इंडो नेपाल बार्डर की सोनौली सीमा।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
बीते वर्षों में नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता के चलते भारत-नेपाल संबंधों में दूरी आई है और चीन का प्रभाव नेपाल पर बढ़ा है। नेपाल चीन के ऋण जाल में निरंतर फंसता जा रहा है और चीन अपनी लुभावनी परियोजनाओं के जरिये नेपाल पर पकड़ मजबूत करता जा रहा है। यह निष्कर्ष है दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा अध्ययन विभाग के शोधार्थी हर्षवर्धन सिंह के शोधपत्र का, जो उन्होंने ''भारत नेपाल रणनीतिक संबंधों के समक्ष चुनौतियां एवं विकल्प'' विषय पर तैयार किया है।
विभाग में शिक्षकों और छात्रों के समक्ष अपनी शोध-पत्र की प्रस्तुति के दौरान उन्होंने भारत व नेपाल के सामाजिक संबंधों पर जोर दिया और इसे लेकर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि भारत को नेपाल से अपने संबंधों के सुधार के लिए वहां की जनता से संपर्क बढ़ाना होगा। वहां रोजगार सृजन के उपायों पर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को सीमा-विवाद, व्यापक सीमा प्रबंधन, अवैध प्रवासन, सीमावर्ती क्षेत्र में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना आदि को जोर देते हुए रिश्तों की मजबूती पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा।
हर्षवर्धन ने अपने शोधपत्र के उस अंश का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने रक्षा सहयोग, विकासात्मक कार्य, मधेशी समस्या, आर्थिक व व्यापारिक संबंधों की चर्चा की है। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. हर्ष कुमार सिंह, प्रो. निवास मणि त्रिपाठी, डा. जितेंद्र कुमार, डा. आरती यादव, डा. विजय कुमार आदि मौजूद रहे।
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विभाग में शिक्षकों और छात्रों के समक्ष अपनी शोध-पत्र की प्रस्तुति के दौरान उन्होंने भारत व नेपाल के सामाजिक संबंधों पर जोर दिया और इसे लेकर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि भारत को नेपाल से अपने संबंधों के सुधार के लिए वहां की जनता से संपर्क बढ़ाना होगा। वहां रोजगार सृजन के उपायों पर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को सीमा-विवाद, व्यापक सीमा प्रबंधन, अवैध प्रवासन, सीमावर्ती क्षेत्र में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना आदि को जोर देते हुए रिश्तों की मजबूती पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा।
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हर्षवर्धन ने अपने शोधपत्र के उस अंश का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने रक्षा सहयोग, विकासात्मक कार्य, मधेशी समस्या, आर्थिक व व्यापारिक संबंधों की चर्चा की है। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. हर्ष कुमार सिंह, प्रो. निवास मणि त्रिपाठी, डा. जितेंद्र कुमार, डा. आरती यादव, डा. विजय कुमार आदि मौजूद रहे।
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