बदल रहा है गोरखपुर: बढ़े एक और कदम...नकहा जंगल-महुआतर ओवरब्रिज अब और जल्द
सोनौली हाईवे से बालापार टिकरिया रोड के ओंकारनगर में बन रहे ओवरब्रिज का ज्यादातर काम पूरा हो गया है। अब रेलवे ट्रैक पर होने वाले निर्माण के लिए भी बजट आवंटित हो गया है। रेलवे के हिस्से का काम पूरा होते ही ओवरब्रिज चालू हो जाएगा।
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गोरखपुर शहर के मेडिकल कॉलेज रोड को सोनौली रोड से जोड़ने वाले नकहा जंगल क्राॅसिंग पर ओवरब्रिज के शेष हिस्से का काम भी जल्दी शुरू हो जाएगा। इसके लिए 45 करोड़ रुपये आवंटन के साथ ही कार्यदायी संस्था भी नामित हो गई है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए बरगदवां की तरफ के मकान भी तोड़े जा चुके हैं।
इसके अलावा सोनौली- बालापार टिकरिया मार्ग स्थित महुआतर ओवरब्रिज का भी रेलवे लाइन पर बचा काम जल्दी शुरू हो जाएगा। इसके लिए भी 30 करोड़ रुपये आवंटन के साथ कार्यदायी संस्था नामित हो चुकी है। इन दोनों प्रमुख ओवरब्रिज के बन जाने से शहर के लोगों को जाम से निजात मिलेगी।
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कौवाबाग-बरगदवां फोरलेन मेडिकल कॉलेज रोड को सोनौली रोड से जोड़ता है। खाद कारखाना चालू होने और नकहा जंगल स्टेशन को रेलवे की तरफ से कार्गो प्वाइंट बनाए जाने के बाद इस क्राॅसिंग से दिन में माल लदे ट्रकों का आवागमन होता है। इसके अलावा गोरखनाथ क्षेत्र के लोगों के लिए स्पोर्ट्स कॉलेज व मेडिकल कॉलेज की तरफ आने का भी यह प्रमुख मार्ग है। इसके चलते यहां हमेशा जाम की नौबत रहती है।
इस क्राॅसिंग पर वाई आकार में ओवरब्रिज निर्माण का कार्य चल रहा है। स्पोर्ट्स कॉलेज की तरफ से फोरलेन का ओवरब्रिज क्राॅसिंग को पार कर बरगदवां की तरफ जाना है। इसी ओवरब्रिज में से स्पोर्टस कॉलेज की तरफ से क्रॉसिंग से पहले एक ओवरब्रिज फर्टिलाइजर की तरफ निकल रहा है। इस क्राॅसिंग पर रेलवे के हिस्से का काम बाकी है। बरगदवां की तरफ से ओवरब्रिज निर्माण की जद में आ रहे मकानों को तोड़कर मलबा हटवाया जा चुका है। वरिष्ठ रेल अफसरों का कहना है कि इस पर अब जल्दी ही निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
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महुआतर ओवरब्रिज के लिए भी मिला है बजट
सोनौली हाईवे से बालापार टिकरिया रोड के ओंकारनगर में बन रहे ओवरब्रिज का ज्यादातर काम पूरा हो गया है। अब रेलवे ट्रैक पर होने वाले निर्माण के लिए भी बजट आवंटित हो गया है। रेलवे के हिस्से का काम पूरा होते ही ओवरब्रिज चालू हो जाएगा।
ओंकारनगर महुआतर रेलवे गेट पर ओवरब्रिज काम दिसंबर 2021 में 84.57 करोड़ की लागत से शुरू हुआ था। इसे दिसंबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
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एक बार क्राॅसिंग पर फंसे तो निकलने में लगता है आधा घंटा
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बरगदवां की तरफ से पहली दो लाइनें नकहां जंगल स्टेशन की मेन लाइन व लूप लाइन है। इसके बाद दो लाइन मालगाड़ी की शंटिंग लाइन है। इसके बाद दो लाइन खाद कारखाने में जाती है। इन्हीं लाइनों के बीच चिलुआताल थाने की तरफ जाने वाले रास्ते का गेट है। एक रास्ता फर्टिलाइजर की तरफ भी जाता है। इसके अलावा स्पोर्ट्स कॉलेज की तरफ से आने वाले रास्ता भी यहीं आकर मिलता है। इन सभी के बीच में बैरियर है।
ट्रकों की आवाजाही से उड़ती धूल और क्राॅसिंग का यह जाल राहगीरों के लिए मुसीबत है। रविवार की शाम करीब पांच बजे बंद क्राॅसिंग पर खड़े सुभाष गुप्ता ने बताया कि एचयूआरएल की तरफ जाने के लिए एक मालगाड़ी पहले शंटिंग लाइन में आई, तभी सभी छह क्राॅसिंग बंद कर दिए गए। इसके बाद यह मालगाड़ी दूसरी पटरी पर गई। करीब आधे घंटे से क्रासिंग बंद है। मेडिकल कॉलेज जाना है, इस रास्ते नहीं गए तो गोरखनाथ मंदिर के सामने से होकर आना पड़ेगा।
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बाइक सवार बृजेश बोल पड़े-छह महीने हो गए, यहां की धूल फांकते। न तो निर्माण कार्य खत्म हुआ और न ही धूल से निजात मिली। ट्रकों की आवाजाही और फाटक गिरने-उठने का यह क्रम न जाने कब बंद होगा। बगल के मोहल्ले में रहने वाले राधेश्याम का दर्द यह है कि क्राॅसिंग निर्माण का कार्य अपूर्ण होने के चलते हर दिन जाम लगा रहता है, जिससे घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। मेडिकल कॉलेज रोड की तरफ जाने के लिए कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है।