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नगर पालिका को पता नहीं, लगने जा रही मोहन सिंह की प्रतिमा

Sun, 20 Sep 2020 11:15 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2020 11:15 PM IST
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municipality do not know former mla pratima
नगर पालिका को पता नहीं, लगने जा रही मोहन सिंह की प्रतिमा
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देवरिया। टाउनहाल स्थित प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम) के नाम को लेकर फिर राजनीति शुरू हो गई है। सभासद ऑडिटोरियम का नाम पूर्व सांसद स्वर्गीय मोहन के नाम पर रखने पर आपत्ति जता रहे हैं। उनका कहना है कि बोर्ड की गरिमा को नजरअंदाज कर प्रशासन मनमानी पर उतर आया है, जबकि प्रेक्षागृह का नाम अटल विहारी वाजपेयी के नाम पर रखने का प्रस्ताव बोर्ड में हो चुका है। इस मामले में सभासदों का प्रतिनिधिमंडल कमिश्नर से मिलेगा। उधर, प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर प्रेक्षागृह पर बाबू मोहन सिंह सभागार लिख दिया गया है। उनकी प्रतिमा भी 22 सिंतबर से पहले लगाने की तैयारी है।
टाउनहाल कैंपस में नया सवेरा योजना के तहत प्रेक्षागृह बनाने की कवायद नगर पालिका ने वर्ष 2016 में शुरू की। उस समय शासन से धन नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में पूर्व सांसद स्व. मोहन सिंह की पुत्री सपा नेता एवं पूर्व सांसद कनकलता सिंह ने शासन को पत्र लिखा। उनके पत्र लिखने के बाद तत्कालीन सपा सरकार ने नया सवेेरा योजना के तहत धन स्वीकृत किया, लेकिन उसमें कहीं प्रेक्षागृह के नाम में स्व. मोहन सिंह का जिक्र नहीं किया गया था। 22 सितंबर 2016 को मोहन सिंह की पुण्यतिथि पर प्रेक्षागृह का शिलान्यास कर नाम बाबू मोहन सिंह सभागार रख दिया गया। उस वक्त अलका सिंह नगर पालिका अध्यक्ष थीं। प्रेक्षागृह बनकर तैयार हो गया, लेकिन बोर्ड की बैठक में नामकरण की मंजूरी नहीं मिली।
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इसी बीच 21 दिसंबर 2019 को नगर पालिका बोर्ड की बैठक हुई। इसमें सभासद आशुतोष तिवारी ने प्रेक्षागृह, टाउनहाल और वार्ड नंबर-19 में स्थित पार्क के नामकरण का प्रस्ताव रखा। उन्होंने प्रेक्षागृह का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के नाम पर एवं न्यू कालोनी पार्क का नाम प्रखर राष्ट्रवादी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखने का प्रस्ताव किया। सदन ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। इसके बाद नामकरण को लेकर राजनीति शुरू हो गई और मामला शांत पड़ गया।
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22 सितंबर को मोहन सिंह की पुण्यतिथि है। ऐसे में प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम) में प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर बाबू मोहन सिंह सभागार लिख दिया गया है। उनकी प्रतिमा भी लाकर रख दी गई है। 22 सितंबर से पहले इसे लगाने की तैयारी है, लेकिन इसे लेकर फिर विरोध शुरू हो गया है। रविवार को नगर पालिका के सभासदों ने अध्यक्ष से मिलकर नाराजगी जताई है। सभासद आशुतोष तिवारी ने कहना है कि सदन की गरिमा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रभारी अधिकारी नगर पालिका एवं एडीएम प्रशासन राकेश पटेल ने बताया कि शासन के निर्देश और डीएम को जो निर्णय होगा, उसी के तहत कार्य किया जाएगा।
जांच के बहाने नामकरण की साजिश तो नहीं !
नया सवेरा योजना के तहत टाउनहाल में प्रेक्षागृह का निर्माण चार करोड़ 12 लाख की लागत से हुआ है। इसका निर्माण 2016 में शुरू हुआ और एक साल में यह बनकर तैयार हो गया। फरवरी 2019 में डीएम अमित किशोर ने निर्माण कार्य को लेकर जांच टीम बैठा दी। रिपोर्ट भी आ गई। कमियां पाई गईं या क्लीन चिट मिला, ये तो वहीं बताएंगे, लेकिन जुलाई 2020 में फिर उन्होंने फिर से जांच के लिए छह स्तरीय समिति बैठा दी।
प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम) में 436 कुर्सियां लगी हैं। नगर पालिका बोर्ड ने नियम बनाया है कि पूरे दिन का 35 हजार, दोपहर तक की बुकिंग का 25 हजार और एक घंटे के लिए दस हजार रुपये लिए जाएंगे। प्रशासनिक अधिकारियों की यहां अब तक सौ से ज्यादा मीटिंग हो चुकी है, लेकिन नगर पालिका को एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। इसे लेकर भी सभासद नाराज हैं। प्रश्न यह है कि जांच आखिर कब पूरी होगी? कहीं नामकरण का दबाव बनाने के लिए तो जांच पर जांच नहीं बैठाई जा रही है।
अध्यक्ष ने लिखा डीएम को पत्र, नहीं दिया जवाब
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष अलका सिंह ने 25 अगस्त को डीएम को भेजे गए पत्र में लिखा है कि आपके मौखिक आदेशों के क्रम में अवगत कराना है कि बोर्ड की बैठक में प्रेक्षागृह का नाम स्व. अटल विहारी वाजपेयी के नाम पर करने का प्रस्ताव पारित किया है।

इस संबंध में 26 दिसंबर 2019 को तत्कालीन विधायक जन्मेजय सिंह नगर विकास मंत्री को पत्र लिख चुके हैं। अगर शासन से कोई नामकरण को लेकर आदेश प्राप्त हुआ हो तो अवगत कराएं, जिससे प्रेक्षागृह का नामकरण कराया जा सके, लेकिन डीएम ने इसका संज्ञान नहीं लिया। सवाल यह भी है कि आखिर किसके निर्देश पर प्रशासन प्रेक्षागृह का नाम बाबू मोहन सिंह सभागार करने पर आमदा है। इस मुद्दे पर भाजपा के जनप्रतिनिधि चुप क्यों हैं। अलका सिंह का कहना है कि नामकरण को लेकर उनका कोई विरोध नहीं है। प्रशासन बोर्ड की गरिमा का ख्याल नहीं कर रहा है। जो भी नाम रखना है, इसका फैसला तो नगर पालिका परिषद बोर्ड ही करेगा न कि प्रशासन।
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