{"_id":"63297632cb60e472c803f4cc","slug":"mri-center-built-by-spending-lakhs-showing-path-of-brd-to-patients-in-gorakhpur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur: लाखों खर्च कर बनाया MRI केंद्र मरीजों को दिखा रहे BRD का रास्ता, यहां चल रही है दिसंबर तक की वेटिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur: लाखों खर्च कर बनाया MRI केंद्र मरीजों को दिखा रहे BRD का रास्ता, यहां चल रही है दिसंबर तक की वेटिंग
Tue, 20 Sep 2022 01:43 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 20 Sep 2022 01:43 PM IST
सार
डीएम न्यूरो डॉ. अनुराग सिंह विशेषज्ञों ने बताया कि एमआरआई की सलाह उन मरीजों को दी जाती है जिन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होती है या फिर न्यूरो से संबंधित समस्याएं होती है। ऐसी स्थिति में मर्ज पकड़ कर तत्काल इलाज शुरू करना जरूरी होता है। जांच में देरी से परेशानी और बढ़ सकती है।
विज्ञापन
गोरखपुर समाचार।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर जिला अस्पताल में लाखों रुपये खर्च कर स्थापित किए गए एमआरआई (मैग्नेटिग रेजोनेंस इमैजिंग) केंद्र का काम जांच के लिए आने वाले मरीजों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज का रास्ता बताना भर रह गया है। 27 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र में मशीन लगाने के काम का शिलान्यास किया था। लेकिन, तीन साल में भी मशीन स्थापित नहीं हो सकी।
विज्ञापन
सोमवार को सूरजकुंड के रहने वाले वाले रूपेश जिला अस्पताल पहुंचे। उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में डॉक्टर ने उन्हें एमआरआई कराने की सलाह दी। अस्पताल के एमआरआई केंद्र पहुंचे तो पता चला कि केंद्र पर केवल कोरोना का टीका लगता है। वहां बैठे स्वास्थ्य कर्मी ने उन्हें मेडिकल कॉलेज जाने की सलाह दी। पता चला कि मेडिकल कॉलेज में सोमवार को नंबर लगवाने पर दिसंबर में जांच हो सकेगी। इतना इंतजार संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने ज्यादा रकम खर्च कर निजी केंद्र पर जांच कराई।
विज्ञापन
यह तो महज बानगी है। आंकड़ों के अनुसार हर रोज जिला अस्पताल में आठ से 10 मरीज ऐसे आते हैं जिन्हें एमआरआई की सलाह दी जाती है। लेकिन, यहां जांच की सुविधा न होने के कारण मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। इससे मेडिकल कॉलेज पर बोझ बढ़ता जा रहा है।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज जिले का इकलौता सरकारी संस्थान है, जहां पर मरीजों को निजी पैथालॉजी से बेहद कम रेट पर एमआरआई की सुविधा उपलब्ध है। यही वजह है कि यहां एमआरआई कराने हर रोज 60 से 70 मरीज पहुंच रहे हैं। जबकि एक दिन में सिर्फ 15 से 16 एमआरआई जांच ही हो पाती है। ऐसे में रोजाना 50 से ज्यादा लोगों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
जांच में देरी पड़ती है भारी
डीएम न्यूरो डॉ. अनुराग सिंह विशेषज्ञों ने बताया कि एमआरआई की सलाह उन मरीजों को दी जाती है जिन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होती है या फिर न्यूरो से संबंधित समस्याएं होती है। ऐसी स्थिति में मर्ज पकड़ कर तत्काल इलाज शुरू करना जरूरी होता है। जांच में देरी से परेशानी और बढ़ सकती है।
मेडिकल कॉलेज में 2500 में होती है जांच
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच का खर्च 2,500 रुपये है। जबकि, निजी सेंटरों पर यहीं जांच कराने के लिए पांच से छह हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
नंगर गेम
जिला अस्पताल में एमआरआई बिल्डिंग बनकर तैयार है। लेकिन, मशीन न मिलने की वजह से इसका इस्तेमाल कोरोना टीका लगाने में किया जा रहा है। मशीन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। - डॉ राजेंद्र ठाकुर, एसआईसी, जिला अस्पताल
बीआरडी में आने वाले मरीजों की एमआरआई की जा रही है। इमरजेंसी में आने वाले मरीज प्राथमिकता में होते हैं। इनमें 70 फीसदी मरीजों को सिर में चोट लगने की शिकायत होती है। इससे सामान्य मरीजों की जांच में समय लगता है। - डॉ. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज में 2500 में होती है जांच
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच का खर्च 2,500 रुपये है। जबकि, निजी सेंटरों पर यहीं जांच कराने के लिए पांच से छह हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
नंगर गेम
- 10 मरीज औसतन हर रोज पहुंचते हैं जिला अस्पताल एमआरआई के लिए
- 2500 रुपये है सरकारी फीस जांच की
- 6000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं निजी केंद्रों पर
जिला अस्पताल में एमआरआई बिल्डिंग बनकर तैयार है। लेकिन, मशीन न मिलने की वजह से इसका इस्तेमाल कोरोना टीका लगाने में किया जा रहा है। मशीन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। - डॉ राजेंद्र ठाकुर, एसआईसी, जिला अस्पताल
बीआरडी में आने वाले मरीजों की एमआरआई की जा रही है। इमरजेंसी में आने वाले मरीज प्राथमिकता में होते हैं। इनमें 70 फीसदी मरीजों को सिर में चोट लगने की शिकायत होती है। इससे सामान्य मरीजों की जांच में समय लगता है। - डॉ. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज