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खारिज-दाखिल को लेकर परेशानी: लाखों-करोड़ों खर्च किए, अब हक के लिए दौड़ लगा रहे लोग

Fri, 30 Dec 2022 12:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 30 Dec 2022 12:01 PM IST
सार

एडीएम प्रशासन पुरुषोत्तम दास गुप्ता ने कहा कि खारिज-दाखिल के लंबित मामलों की समीक्षा की जाएगी। यदि बिना आपत्ति वाले मामले लंबित होंगे, तो उन्हें तत्काल निस्तारित कराया जाएगा। अमूमन आपत्ति दाखिल होने की वजह से बिना सुनवाई के खारिज-दाखिल के मामलों का निस्तारण नहीं हो पाता।

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More than two thousand cases of rejection-filing pending in all tehsils of Gorakhpur
सदर तहसील। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर जमीन-मकान खरीदने के बाद भी लोग मालिकाना हक के लिए जिले की तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। सभी तहसीलों में नायब तहसीलदार से लेकर तहसीलदार के कोर्ट में दो हजार से अधिक खारिज-दाखिल के मामाले लंबित हैं।

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जिन मामलों में कोई आपत्ति नहीं दाखिल हुई है या फिर आपत्ति का कोई आधार नहीं है, वे भी लटके पड़े हैं। नामांतरण की प्रक्रिया नहीं होने से कई लोगों को बैंकों से लोन नहीं मिल रहा, जिससे उनका खुद के आशियाने का सपना पूरा नहीं हो रहा है।  
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जमीन या मकान की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए फाइल, तहसील में चली जाती है। तहसीलदार के यहां से सभी मामलों की सूची बनाकर तहसीलदार के साथ ही अलग-अलग नायब तहसीलदारों के कोर्ट को फाइलें आवंटित  की जाती हैं। वाद दाखिल होने के बाद अब 30 दिनों तक किसी आपत्ति का इंतजार किया जाता है। आपत्ति न होने के बाद उसका निस्तारण कर दिया जाता है। मगर ज्यादातर तहसीलों में वे मामले भी लंबित हैं, जिनमें कोई आपत्ति नहीं दाखिल की गई है। या किसी ने आपत्ति दाखिल भी की है, तो उसमें साक्ष्य नहीं हैं या बलहीन है।
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शहर एवं उसके आस-पास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोज जमीन की खरीद-फरोख्त होती है लिहाजा खारिज-दाखिल के मामले भी सदर तहसील में सबसे ज्यादा लंबित हैं। कोई पेंच फंसाकर मामले को और लंबित न बना दिया जाए, इसलिए लोग आला अधिकारियों या फिर शासन में खुलकर इसकी शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं।

नाम न छापने की शर्त पर सदर तहसील क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज रोड निवासी एक व्यक्ति का कहना है कि उन्हें जमीन की रजिस्ट्री कराए दो महीने से अधिक का समय बीत गया। कोई आपत्ति भी नहीं दाखिल हुई है, बावजूद इसके तहसील से उन्हें रोज आज-कल में हो जाएगा, का आश्वासन देकर दौड़ाया जा रहा है। 

उनका कहना है कि जमीन खरीदने में ही जमा-पूंजी खर्च हो गई। घर बनवाने के लिए लोन के लिए आवेदन किया है, मगर नामांतरण नहीं होने से बैंक से कर्ज नहीं मिल रहा। बैंक वालों की दलील है कि राजस्व अभिलेखों में जमीन के मालिक के तौर पर नाम नहीं चढ़ जाने तक लोन नहीं मिल सकता।

एडीएम प्रशासन पुरुषोत्तम दास गुप्ता ने कहा कि खारिज-दाखिल के लंबित मामलों की समीक्षा की जाएगी। यदि बिना आपत्ति वाले मामले लंबित होंगे, तो उन्हें तत्काल निस्तारित कराया जाएगा। अमूमन आपत्ति दाखिल होने की वजह से बिना सुनवाई के खारिज-दाखिल के मामलों का निस्तारण नहीं हो पाता। 

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