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महिला दिवस पर विशेष: अति कुपोषित बच्चों का सहारा बनीं मोहित सक्सेना, जानिए कैसे करती हैं काम
Mon, 08 Mar 2021 11:12 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 08 Mar 2021 11:12 AM IST
सार
- आंगनबाड़ी सुपरवाइजर मोहित सक्सेना अति कुपोषित बच्चों का सहारा बनी
- अब तक 13 बच्चों को एनआरसी में करा चुकी हैं भर्ती
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मुख्य सेविका मोहित सक्सेना।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में आंगनबाड़ी सुपरवाइजर (मुख्य सेविका) मोहित सक्सेना अति कुपोषित बच्चों का सहारा बनी हैं। अब तक उन्होंने 13 अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया है। सभी बच्चे स्वस्थ हैं।
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शहर के गंगानगर टोले में मजदूरी करने वाले मकसूदन और उनकी पत्नी सीमा के दो बच्चे शिवम और मोहिनी हैं। 25 फरवरी 2019 को जब बच्चों का वजन कराया गया तो दोनों का वजन बेहद कम मिला। पता चला कि बच्चे अति कुपोषित हैं। दोनों को लाल श्रेणी में सबसे नीचे रखा गया। इससे माता-पिता चिंतित हो गए, लेकिन मोहित ने ढांढस बंधाया।
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मोहित ने कहा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। मोहित की पहल पर बच्चे एनआरसी में भर्ती कराए गए। अब दोनों बच्चे कुपोषण से मुक्त हैं। मोहित कहती हैं कि पोलियो ड्राप पिलाने के दौरान कुपोषित बच्चों की जानकारी मिलती है। इसके बाद परिवार को समझाकर बच्चों को एनआरसी में रखवाया जाता है। यही मोहिनी व शिवम के साथ भी हुआ।
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भर्ती करवाने की चुनौती सबसे बड़ी
मोहित सक्सेना के मुताबिक सबसे बड़ी चुनौती अति कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती करवाने की होती है। माता-पिता के साथ परिवार के दूसरे सदस्य भर्ती के नाम पर हाथ खड़े कर देते हैं। समझा-बुझाकर किसी तरह भर्ती कराया जाता है। अब तक 13 बच्चे भर्ती कराए जा चुके हैं। सभी स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।
एनआरसी में यह हैं सुविधाएं
एनआरसी में यह हैं सुविधाएं
- बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित सेंटर की सुविधाएं निशुल्क
- बच्चे व उसके केयर टेकर के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था
- बच्चों को सुबह, शाम दूध के साथ अंडा दिया जाता है। देखभाल की अच्छी व्यवस्था है
- जो अभिभावक बच्चे के साथ रहते हैं, उनके खाते में प्रतिदिन 100 रुपये भेजे जाते हैं
- बच्चों को एनआरसी ले जाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 50 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है