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Mohini Ekadashi 2021: एकादशी व्रत शुरू करने का सर्वोत्तम दिन है मोहिनी एकादशी, जानिए इसका महत्व
Fri, 21 May 2021 02:39 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 21 May 2021 02:39 PM IST
सार
श्रद्धालु कल रखेंगे मोहिनी एकादशी का व्रत। भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन कर भक्त करेंगे कोरोना से निजात की प्रार्थना।
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मोहिनी एकादशी 2021।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
मोहिनी एकादशी का व्रत शनिवार को रखा जाएगा। श्रद्धालु व्रत रख भगवान विष्णु से कोरोना से निजात के लिए प्रार्थना करेंगे। इस दिन सूर्योदय 5 बजकर 20 मिनट पर और एकादशी तिथि का मान सूर्योदय के पूर्व से (4 बजकर 8 मिनट) से संपूर्ण दिन और अर्धरात्रि के बाद 2 बजकर 17 मिनट तक है। एकादशी व्रत प्रारंभ करने के लिए मोहिनी एकादशी का दिन सर्वोत्तम है।
एकादशी व्रत का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह सर्विधिक लोकप्रिय व्रत है। इसे स्त्री और पुरूष दोनों ही करते है। आयुर्विज्ञान की दृष्टि से 15 दिनों में पड़ने वाले इस व्रत का स्वास्थ्य के हित में भी बड़ा महत्व है। चौदह दिन तक लगातार खाने पीने रहने से आमाशय को एक दिन का विश्राम बड़ा शक्तिदायक माना जाता है और वह कुछ दिन के लिए विशुद्ध हो जाता है। हमारे पूर्वजों ने इसलिए प्रत्येक मास में दो-दो एकादशियों के व्रतों का धर्मशास्त्रों में विशेष महत्व बतलाया है।
एकादशी के व्रत का पालन करने वाले कभी बीमार नही होते है और उन्हें दीर्घायु भी मिलती है। वैशाख शुक्ल एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। पूर्वाजित पापों के क्षय और पुण्य की समृद्धि के लिए मोहिनी एकादशी का विशेष महत्व है।
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एकादशी व्रत का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह सर्विधिक लोकप्रिय व्रत है। इसे स्त्री और पुरूष दोनों ही करते है। आयुर्विज्ञान की दृष्टि से 15 दिनों में पड़ने वाले इस व्रत का स्वास्थ्य के हित में भी बड़ा महत्व है। चौदह दिन तक लगातार खाने पीने रहने से आमाशय को एक दिन का विश्राम बड़ा शक्तिदायक माना जाता है और वह कुछ दिन के लिए विशुद्ध हो जाता है। हमारे पूर्वजों ने इसलिए प्रत्येक मास में दो-दो एकादशियों के व्रतों का धर्मशास्त्रों में विशेष महत्व बतलाया है।
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एकादशी के व्रत का पालन करने वाले कभी बीमार नही होते है और उन्हें दीर्घायु भी मिलती है। वैशाख शुक्ल एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। पूर्वाजित पापों के क्षय और पुण्य की समृद्धि के लिए मोहिनी एकादशी का विशेष महत्व है।
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एकादशी पूजन विधि
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार सुबह नित्यकर्म से निवृत होकर व्रत का संकल्प लें और संपूर्ण दिन सदाचार, परोपकार, भगवत् चिंतन और सद् ग्रन्थों के स्वाध्याय में लगाएं। दिन में भगवान विष्णु का पूजन करें और ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। यदि संभव हो तो विष्णुसहस्स्र नाम का पाठ या विष्णु चालीसा का पाठ भी करें। इस दिन पान का सेवन न करें। रात्रि में हरिकथा और कीर्तन करें। रात्रि जागरण करें। रात्रि मे कुछ भी पेय पदार्थ न लें तो उत्तम। दूसरे दिन स्नान कर पुन: भगवान विष्णु का पूजन कर एकादशी माहात्म्य की कथा श्रवण करें। किसी जरुरतमंद को भोजन प्रदान कर पारण करें।