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बदमाशों ने बदला अपराध का तरीका: गैंगवार और सुपारी किलिंग पर कमर तोड़ी तो अंडरग्राउंड क्राइम में उतरे माफिया

Thu, 25 May 2023 11:57 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 25 May 2023 11:57 AM IST
सार

एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि शासन की नीति के तहत बदमाशों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीट खोलने के साथ ही जेल भेजने का काम पुलिस कर रही है। बड़े बदमाशों की संपत्तियों को जब्त कर कमर तोड़ी गई। पेशेवर अपराधियों का नाम सामने आते ही पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है।

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सीएम सिटी गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

योगी सरकार के आते ही यूपी में अपराध नियंत्रण के लिए लगाम कसी गई। इसका असर यह हुआ कि माफिया खुलकर खून खराबा करने जैसे अपराध करने की जगह पर्दे के पीछे वाले अपराध में कूद पड़े। जो काम छुपकर करते थे उन्हें माफिया ने बड़े पेशेवर अंदाज में करना शुरू कर दिया। माफिया अब नर्सिंग होम संचालन, सूद की वसूली, गाड़ी खींचने जैसे कामों को अंडरग्राउंड होकर करने लगे हैं।

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बड़े माफियाओं की सूची में शामिल विनोद उपाध्याय लखनऊ व दिल्ली में प्रॉपर्टी का कारोबार कर खुद को अपराध से दूर बताने की कोशिश करता है तो माफिया सुधीर सिंह नेपाल के कैसिनो का धंधा चला रहा है। जहां, एक ओर माफियाओं ने कमाई का नया तरीका ढूंढ लिया है, वहीं पुलिस भी अपराध के बदले तरीके को समझकर उन पर शिकंजा कसने में जुट गई है।
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बीते सात साल से पेशेवर बदमाश अंडरग्राउंड हो गए हैं। पिछले सात साल के दौरान किसी भी वारदात में बड़े अपराधी का नाम खुलकर सामने इसी वजह से नहीं आया। गोली मारकर हत्या या फिर रंगदारी न देने पर हत्या जैसी वारदात गोरखपुर में अब काफी हद तक बंद है। लेकिन, अपराधियों ने अपराध को पूरी तरह से छोड़ दिया है, ऐसा नहीं है।
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जो पेशेवर थे, वह जरायम की दुनिया में कमाए गए अपने नाम का इस्तेमाल प्रदेश के दूसरे जिलों में करके ठेका पट्टा में लग गए हैं। वहीं, नए उभर रहे बदमाशों ने खून खराबा कर जेल जाने के बजाए अंडरग्राउंड होकर ऐसे अपराध करने का रास्ता पकड़ा, जिस पर पुलिस की नजर ही ना पड़े। इनमें सबसे आसान नर्सिंग होम को संरक्षण देने का है।

 

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माफिया राकेश यादव का साथी बिपिन सिंह - फोटो : अमर उजाला।

शहर में तमाम ऐसे नर्सिंग होम संचालित हो रहे है, जहां पर बेहतर इलाज के नाम पर सरकारी अस्पताल से मरीजों को लाकर वसूली की जाती है। विरोध करने पर मारपीट और आपसी विवाद में गोली चलने जैसी वारदात इसकी बात की पुष्टि करती है। दूसरे, बड़े व्यापारियों के साथ जुड़कर रुपयों को नए व्यापार से जुड़ने वालों को सूद पर दिलाने, गरीबों की जमीन के नाम पर रुपये वसूली करने जैसे धंधे हैं। हालांकि, उनके बदले चाल को अब पुलिस अफसर भी समझ चुके हैं। पुलिस भी ऐसे बदमाशों की गर्दन दबोचने के लिए परंपरागत अभियान के अलावा अस्पताल माफिया, सूदखोरों, जमीन की जालसाजी में जुटे बदमाशों की गर्दन दबोचने लगी है।

नाम आते ही मिट्टी में मिला देने जैसे ही कार्रवाई कर रही पुलिस
योगी सरकार आने के बाद जिस भी बड़े माफिया का नाम अपराध में सामने आया है, उसे पुलिस मिट्टी में मिलाने जैसी ही कार्रवाई कर रही है। 20 अगस्त 2021 में गगहा इलाके में राजू नयन सिंह की पिटाई का वीडियो बनाने पर बेटी काजल की गोली मारकर हत्या करने की वारदात हो या फिर टाॅप टेन बदमाशों की सूची में शामिल माफिया राकेश यादव के गुर्गा 50 हजार का इनामी विपिन सिंह हो। सबको एनकाउंटर में पुलिस ने मार गिराया।

काजल की हत्या के आरोपी विजय प्रजापति को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके पहले आठ जून 2020 में 10 साल के बच्चे और एक अन्य युवक को गोली मारकर भाग रहे विपिन सिंह भी पुलिस की गोली से मारा गया था। यह वह दौर था, जब एक बार फिर गैंगवार की स्थिति गोरखपुर में नजर आने लगी थी। इसी के बाद बीते दिनों में माफिया सुधीर सिंह, प्रदीप सिंह, विनोद उपाध्याय, राकेश यादव सबकी करोड़ों की संपत्तियों को पुलिस ने जब्त करने की कार्रवाई की है।

 

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बदमाश सूरज सिंह और राहुल शर्मा। - फोटो : अमर उजाला।

केस एक
बदमाश सूरज-राहुल बने मरीज माफिया
बदमाशों और माफिया के भूमिगत होने के बाद दूसरे धंधों में उतरने की चर्चाएं तो थीं मगर बाद की कुछ घटनाओं ने इस खेल को खोलने का काम किया। तीन जनवरी 2023 को गुलरिहा के सत्यम नर्सिंग होम में एक महिला की मौत हुई। पुलिस ने केस दर्ज किया और जांच की तो पता चला गया कि गोरखपुर के नामी बदमाश तो अब इस तरह के अपराध में शामिल हैं। इसके बाद ही एसएसपी ने इस प्रकरण में कार्रवाई कराने के लिए ही सीएमओ से वार्ता कर फर्जी नर्सिंग होम पर अभियान चला दिया। इसका नतीजा रहा कि 10 बड़े अपराधियों के नाम सामने आए, जो मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने और रंगदारी वसूलने जैसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं। फिर डीआईजी बंगला के सामने फायरिंग हुई और पुलिस का शक यकीन में बदल गया। इसके बाद पुलिस अस्पताल माफिया हिस्ट्रीशीटर बेलघाट के सूरज सिंह, सिकरीगंज के राहुल शर्मा जैसे करीब 10 हिस्ट्रीशीटर व बदमाशों को सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है।

 

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माफिया अजीत शाही और विनोद उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला।

केस दो
गाड़ी खिंचवाने के धंधे में कूदे अजीत शाही-विनोद
12 मई को सात साल बाद माफिया अजीत शाही पर और 24 मई को माफिया विनोद उपाध्याय पर रंगदारी मांगने का केस दर्ज किया गया। माफिया अजीत पर पुलिस ने शिकंजा कसा तो वह कोर्ट में हाजिर हो गया, लेकिन विनोद फरार है। अब पुलिस की जांच में पता चला है कि माफिया अजीत का गैंग कई बैंक और गाड़ी की कंपनियों के लिए वसूली का काम कर रहा है। अपने करीबी के नाम पर लाइसेंस लेकर वह गाड़ियों को खिंचवाता है और बैंक के लोन अदा करने में देरी करने वालों के घरों पर अपने गुर्गों को भेजकर धमकी देने जैसी वारदात को अंडरग्राउंड होकर कर रहा है। पुलिस अब इस पर शिकंजा कस रही है।

 

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माफिया राकेश यादव। - फोटो : अमर उजाला।

केस तीन
बदमाश से भूमाफिया बना राकेश
माफिया राकेश यादव पर अगस्त 2020 में गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई उसके गुर्गे विपिन सिंह के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद की गई थी। पुलिस की जांच में आया था कि अब सीधे वारदात न करके जमीनों को कब्जा कराने और विवादित जमीनों के खरीद फरोख्त के काम में लग गया है। इसी विवाद में उसके गुर्गे विपिन सिंह ने छोटू प्रजापति की हत्या करने का सुपारी ली थी और दिन में ही दोनों हाथ से गोली चलाते हुए दो लोगों को गोली मार दी थी। हालांकि, दिन के उजाले में हुए मुठभेड़ में ही पुलिस ने उसे मार गिराया गया था। इसके बाद उसके भाई और भाई की पत्नी की नियुक्ति भी फर्जी शिक्षक के तौर पर पाए जाने पर केस दर्ज किया गया था।

फैक्ट फाइल

  • जमीन की जालसाजी में सात महीने में 401 बदमाशों पर कार्रवाई की गई
  • अपराध में जुड़े 436 बदमाशों पर गैंगस्टर की कार्रवाई करते हुए 116 गैंग पंजीकृत किए गए
  • 187 से अधिक बदमाशों की हिस्ट्रीशीट खोली गई, जिले में वर्तमान में 1510 हिस्ट्रीशीटर हैं
  • गैंगस्टर के तहत अब तक 33 बदमाशों की 2.67 अरब की संपत्ति को जब्त किया गया


तरीका बदल चुके अपराधी भी रडार पर
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि शासन की नीति के तहत बदमाशों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीट खोलने के साथ ही जेल भेजने का काम पुलिस कर रही है। बड़े बदमाशों की संपत्तियों को जब्त कर कमर तोड़ी गई। पेशेवर अपराधियों का नाम सामने आते ही पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है। बदमाशों ने अपराध का जो तरीका बदला है, उस पर भी पुलिस की नजर है। सभी पुलिस की रडार पर हैं। जालसाजी, नर्सिंग होम संचालन, वसूली जैसे मामले सामने आते ही पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस की कोशिश है कि समाज भयमुक्त हो, जिस पर लगातार काम चल रहा है।



 

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