UP News: मरीज के हाथ में बाहर की पर्ची देख चौंक गए मंत्री, जताई नाराजगी
डॉक्टर ने बताया कि यह दवा जन औषधि केंद्र की लिखी गई है, जो सस्ते दामों पर उपलब्ध है। इसके बाद वह शांत हुए। मंत्रियों का समूह करीब 11:44 बजे जिला अस्पताल पहुंचा।
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कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना की अगुवाई में तीन मंत्रियों के समूह ने सोमवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। मंत्री सुरेश खन्ना हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में पहुंचे। एक मरीज के हाथ में दवा की पर्ची देख पूछा, दवा कहां से लेनी है। मरीज ने बाहर से दवा खरीदने की बात कही, तो मंत्री नाराज हो गए।
उन्होंने एसआईसी और डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने बताया कि यह दवा जन औषधि केंद्र की लिखी गई है, जो सस्ते दामों पर उपलब्ध है। इसके बाद वह शांत हुए। मंत्रियों का समूह करीब 11:44 बजे जिला अस्पताल पहुंचा। सबसे पहले वह ओपीडी के कमरा नंबर 32 में गए, जहां हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर मरीजों को देख रहे थे।
कमरे की हालत देख मंत्रियों का समूह नाराज हो गया। पूरे कमरे में सीलन थी, खिड़कियां टूटी हुई थी। सफाई व्यवस्था भी ठीक नहीं थी। इस बीच एक मरीज के हाथ में बाहर की पर्ची देख कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना चौंक गए। मरीज ने बताया कि बाहर से दवा खरीदनी है।
उन्होंने एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर और संबंधित डॉक्टर से सवाल-जवाब शुरू कर दिया। इसके बाद मंत्रियों का काफिला जनरल सर्जरी और मेडिसिन की ओपीडी की तरफ चला गया। डॉक्टर और मरीजों से बात कर समस्याएं पूछी, किसी ने कोई शिकायत नहीं की।
अंत में सभी मंत्री पीडियाट्रिक आईसीयू और पीडियाट्रिक वार्ड में पहुंचे। मरीजों और तीमारदारों से वार्ता की। किसी ने कुछ नहीं कहा। इसके बाद मंत्रियों का समूह अधिकारियों के साथ एनेक्सी भवन के लिए रवाना हो गया। इस दौरान वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री व गोरखपुर मंडल के प्रभारी मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के साथ अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी और जल शक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटिक मौजूद रहे।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने की मंत्री से शिकायत
निरीक्षण के दौरान आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों ने दोबारा नियुक्ति न मिलने की शिकायत की। अस्पताल में चिंटी कंपनी के जरिए तैनात रहे अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि पिछले एसआईसी के कार्यकाल के दौरान आउटसोर्सिंग कंपनी चिंटी के जरिए तैनाती हुई थी। उस वक्त 80 हजार रुपये घूस दिया था। तीन महीने बाद कंपनी ने निकाल दिया।
इस बार आउटसोर्सिंग के लिए नई कंपनी को टेंडर मिला है। उसके लिए बिचौलिया डेढ़ लाख रुपये मांग रहा है। इनके अलावा कुछ आउटसोर्सिंग कर्मियों ने बताया कि पिछले सात साल से अस्पताल में तैनात हूं। इतना समय बीतने के बावजूद आज तक मानदेय में बढ़ोत्तरी नहीं हुई। जबकि, इस बीच में चार बार नियोक्ता कंपनी बदल चुकी है।