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सुविधा: मंत्र एप से जानेंगे प्रसव के दौरान मां-बच्चे की मौत की वजह, प्रशिक्षित किए गए 65 ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षक
Fri, 17 Dec 2021 12:14 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 17 Dec 2021 12:14 PM IST
सार
मृत्यु दर में कमी लाने के लिए गोरखपुर जिले के 65 ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान होने वाली मां और बच्चे की मौत की वजह पता लगा कर उसे रोका जाएगा। इस संबंध में शासन स्तर से मंत्र (मां एवं नवजात ट्रैकर) एप का क्रियान्वयन होगा। ट्रायल फेज में चल रहे इस एप की मार्च तक लांचिंग होगी। इसके बाद कागजी रिपोर्टिंग समाप्त कर दी जाएगी। गुरुवार को गोरखपुर जिले के 65 ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। अब वे सभी क्रियाशील प्रसव केंद्रों के नर्स एवं एएनएम को प्रशिक्षण देंगे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज आनंद ने बताया कि फरवरी 2022 तक यह एप ट्रायल के तौर पर चलेगा और इसके बाद इसे पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। एप लागू होने से डेटा एनालिसिस और आसान हो जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में एनीमिया ज्यादा है और कहां पर कुपोषण की समस्या है। शिशु मृत्यु की अधिकता वाले क्षेत्र भी एक क्लिक में चिन्हित हो जाएंगे और इस तरह से ऐसे क्षेत्रों में विशेष प्रयास कर मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकेगा।
प्रशिक्षक सूर्य प्रकाश ने बताया कि रजिस्टर फीडिंग में लाभार्थी का जो समय नष्ट होता है, वह एप के जरिए बच जाएगा। एप पर फीडिंग में समय कम लगेगा। प्रसव केंद्र पर भी लाभार्थी का सारा विवरण दर्ज हो जाएगा।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज आनंद ने बताया कि फरवरी 2022 तक यह एप ट्रायल के तौर पर चलेगा और इसके बाद इसे पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। एप लागू होने से डेटा एनालिसिस और आसान हो जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में एनीमिया ज्यादा है और कहां पर कुपोषण की समस्या है। शिशु मृत्यु की अधिकता वाले क्षेत्र भी एक क्लिक में चिन्हित हो जाएंगे और इस तरह से ऐसे क्षेत्रों में विशेष प्रयास कर मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकेगा।
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प्रशिक्षक सूर्य प्रकाश ने बताया कि रजिस्टर फीडिंग में लाभार्थी का जो समय नष्ट होता है, वह एप के जरिए बच जाएगा। एप पर फीडिंग में समय कम लगेगा। प्रसव केंद्र पर भी लाभार्थी का सारा विवरण दर्ज हो जाएगा।
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