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मनीष गुप्ता हत्याकांड: होटल के इर्द-गिर्द 15 नर्सिंग होम, फिर दो किलोमीटर दूर क्यों ले गए?

Sat, 02 Oct 2021 05:44 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 02 Oct 2021 05:44 PM IST
सार

होटल से दो किलोमीटर दूर इलाज के लिए मानसी नर्सिंग होम ले गए थे। होटल के बगल में ट्रामा सेंटर भी था। ऐसे में अस्पताल ले जाने में हुए देरी पर भी सवाल उठे। मानसी नर्सिंग होम से मेडिकल कॉलेज पहुंचने में 1 घंटे 19 मिनट लग गए। पत्नी मीनाक्षी से दोस्त ने बताया था कि लिफ्ट से लाने पर मनीष बेसुध थे।
 

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Manish Gupta murder case 15 nursing homes around hotel then why move it two kilometers away?
मनीष गुप्ता हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर में कानपुर कारोबारी मनीष गुप्ता हत्याकांड की कहानी उलझती जा रही है। पुलिस की बातों पर अगर यकीन कर भी लिया जाए कि कारोबारी मनीष गुप्ता होटल में गिरकर घायल हो गए और उन्हें बचाने के लिए अस्पताल ले जाया गया। ऐसे में इसका जवाब तो पुलिस को देना पड़ेगा कि बचाना ही था तो नजदीक के अस्पताल क्यों नहीं ले गए? होटल के आसपास 15 ऐसे निजी अस्पताल हैं, जिनमें बेहतर सुविधा मिल सकती थी, लेकिन पुलिस वाले मनीष को होटल से दो किलोमीटर दूर मानसी नर्सिंग होम लेकर गए। आखिर क्यों...?

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उधर, मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने एक ऑडियो अमर उजाला से शेयर किया है, जिसमें वह घटना वाली रात मनीष के साथ रुके उनके दोस्त से बातचीत कर रहीं हैं। बातचीत में मनीष के इस दोस्त ने बताया कि मनीष के साथ कमरे में मारपीट हुई थी। जब वह होटल के नीचे मौजूद था तो पुलिस मनीष को लिफ्ट से लेकर नीचे आई थी। उस समय मनीष बेसुध थे।
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दोस्त ने कहा, मैं यह तो नहीं बता सकता कि मनीष जिंदा थे या नहीं, लेकिन उनके शरीर में हरकत नहीं हो रही थी। मनीष के दोस्त का यह बयान और पुलिस का मनीष को नजदीक के अस्पताल को छोड़कर, दूर निजी अस्पताल ले जाना कहीं न कहीं पुलिस की मंशा पर सवाल खड़ा करते हैं। निजी अस्पताल से रेफर होने के बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचने में 1.19 घंटे का समय लगना साबित करते हैं कि पुलिस का इरादा नेक नहीं था।  

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मेडिकल कॉलेज के रिकार्ड में रात 2:30 बजे तक जिंदा थे मनीष

Manish Gupta murder case 15 nursing homes around hotel then why move it two kilometers away?
कानपुर के कारोबारी मनीष की मौत का मामला। - फोटो : अमर उजाला।

मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड में मनीष गुप्ता रात 2:30 बजे तक जिंदा थे। उन्हें रात 2:05 बजे मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जरूरी औपचारिकता के बाद रात 2:14 बजे मनीष को सर्जरी विभाग में शिफ्ट किया गया था, जहां ऑक्सीजन लगाने के चंद मिनट बाद उनकी मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने रात 2:30 बजे उन्हें मृत घोषित किया था।

मनीष के घरवाले कहते हैं कि फर्जी रिकॉर्ड मेंटेन किए गए हैं। इस थ्योरी की भी जांच होनी चाहिए। एडीजी ने भी सभी सीसीटीवी कैमरे को देखने को कहा है, ताकि यह पता चल सके कि घटना के बाद मनीष किस हाल में थे, किन रास्तों से पुलिस वाले उन्हें अस्पताल ले गए। अस्पताल में कितने लोग पहुंचे थे?

सीसीटीवी फुटेज से पहचान के बाद निलंबित हुए थे छह पुलिस कर्मी
होटल कृष्णा पैलेस में सोमवार रात हुई कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, विजय यादव और दरोगा राहुल दुबे को अगले दिन यानी मंगलवार को ही निलंबित किया गया था। इसमें हेड कांस्टेबल कमलेश यादव व कांस्टेबल प्रशांत कुमार का भी नाम था। इसका मतलब था कि पुलिस ने होटल कृष्णा पैलेस के सीसीटीवी फुटेज को देखा, फिर सभी आरोपियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया था। मनीष की पत्नी मीनाक्षी का सवाल था कि जब सीसीटीवी फुटेज में सभी पुलिस कर्मी दिख रहे हैं तो तीन के खिलाफ ही मुकदमा क्यों दर्ज किया गया? इसका जवाब पुलिस को देना ही चाहिए।  

एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करेगी। अगर छह लोग दोषी होंगे तो उनका नाम विवेचना में बढ़ जाएगा।

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