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नेपाल के नए मानचित्र को लेकर मधेशी समुदाय ने खडे़ किए सवाल
Thu, 04 Jun 2020 03:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 04 Jun 2020 03:16 AM IST
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पड़ोसी राष्ट्र नेपाल व भारत के बीच स्थापित सदियों पुराने रोटी-बेटी के संबंधों और नेपाल सरकार द्वारा हाल में जारी नए मानचित्र को लेकर दोनों देशों में नई बहस छिड़ गई है। नेपाल के मानचित्र में बदलाव को लेकर नेपाली संसद में पेश किए संविधान संशोधन विधेयक पर नेपाल के बहुसंख्यक मधेशी समुदाय ने सवाल उठाए हैं।
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उनका कहना है कि कोई भी तथ्य प्रमाणिकता के आधार पर होना चाहिए। लिपुलेख, कालापानी व लिपियाधुरा मुद्दे पर भारत को एकतरफा दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं हैं। बता दें कि भारत-नेपाल के बीच हालिया शुरू हुए सीमा विवाद को लेकर नेपाल के मधेशी क्षेत्र में सुगबुगाहट तेज हो गई है। भारत-नेपाल सबंधों के पक्षधर मानने जाने वाले मधेशी समुदाय के लोग किसी भी स्थिति में भारत से टकराव के पक्ष में नहीं हैं।
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नेपाल के राष्ट्रीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय वर्मा ने नए नक्शे के मुद्दे को भारत-नेपाल के मैत्रीय संबंधों के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ये बताए कि पुराने नक्शे में क्या कमी थी, जिसे बदलने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश करना पड़ा।
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उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि किसी भी ठोस निर्णय से पहले सर्वदलीय बैठक कर सभी बिंदुओं पर विस्तार से परिचर्चा करे, तब कोई निर्णय लें। यह सिर्फ दो देशों के बीच का सीमा विवाद नहीं हैं, बल्कि दुनिया के दो सबसे अच्छे मित्र राष्ट्र कहे जाने वाले भारत-नेपाल का मसला है। भारत और नेपाल के बीच सदियों से कायम रोटी-बेटी के संबंध को एक झटके में खतरे में डालना देशहित में कतई नहीं है।
इन जिलों में ज्यादा रहते हैं मधेशी
नेपाल के झापा, मोरंग, सुनसरी, सप्तसरी, किरहा, धनुषा, भोजपुर, इलम, मोहतरी, सरलाही, रौतहट, बारा, परसा, चितवन, नवलपरासी, रूपनदेही, कपिलवस्तु, दांग, बांके, बरदिया, कैलाली, कंचनपुर जिला मधेश में शामिल है। यहां मधेशियों की संख्या अधिक है।go