लोहिया एन्क्लेव रामगढ़ताल वेटलैंड के दायरे से हुआ बाहर, जल्द मिलेगा सैकड़ों आवंटियों को कब्जा
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की आवासीय योजना लोहिया एन्क्लेव का रकबा रामगढ़ताल वेटलैंड के प्रारंभिक नोटिफिकेशन के मुताबिक वेटलैंड के दायरे से बाहर है। यानी फ्लैटों की पूरी रकम जमा कर पिछले तीन साल से दौड़ रहे 450 आवंटियों को कब्जा देने की राह में अब कोई रोड़ा नहीं रह गया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के मुताबिक जीडीए, लोहिया एन्क्लेव के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी भी प्राप्त कर चुका है।
दरअसल, पहले लोहिया एन्क्लेव के कुछ हिस्से को ताल से 50 मीटर के दायरे में बताया जा रहा था। इसकी वजह से दो तरह के पेंच फंसे थे। एक तो इस दायरे के वेटलैंड होने की संभावना थी दूसरा, एनजीटी ने ताल के 500 मीटर के दायरे में 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक के प्रोजेक्ट के लिए एन्वायरमेंटल क्लीयरेंस और उससे कम पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रजामंदी की शर्त रखी थी।
नोडल अफसर को एक्शन टेकेन रिपोर्ट भेजेगा प्राधिकरण
प्राधिकरण की तरफ से लोहिया एन्क्लेव को टाउनशिप घोषित कर देने से एन्वायरमेंटल क्लीयरेंस की जगह सिर्फ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी जरूरी रह गई थी जो जीडीए को प्राप्त भी हो गई। ताल के वेटलैंड नोटिफिकेशन में जिस रकबे को वेटलैंड माना गया है, उनमें लोहिया एन्क्लेव का रकबा शामिल नहीं है, ऐसे में दूसरी और सबसे बड़ी समस्या से भी निजात मिल गई।
रामगढ़ताल वेटलैंड के लिए आपत्ति दर्ज कराने की 30 जून तक की अवधि बीतते ही प्राधिकरण एनजीटी की तरफ से नामित नोडल अफसर एवं प्रमुख सचिव सिंचाई को लोहिया एन्क्लेव के आवंटियों को कब्जा देने संबंधी एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) भेज देगा।
रिपोर्ट में बताया जाएगा कि लोहिया एन्कलेव का कोई भी रकबा वेटलैंड में नहीं आ रहा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी भी मिल गई है। यह रिपोर्ट प्रमुख सचिव आवास विकास के जरिए नोडल अफसर को जाएगी। वहां से रजामंदी मिलते ही कब्जा देने की तैयारी शुरू हो जाएगी। प्राधिकरण की तैयारी जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह से आंवटियों को कब्जा देने की है।
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि प्राधिकरण की आवासीय योजना का कोई भी रकबा रामगढ़ताल वेटलैंड के दायरे में नहीं आ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी मिल चुकी है। जुलाई में आवंटियों को कब्जा देने की पूरी तैयारी है।