Gorakhpur News: नम आंखों से दी ओलंपियन अली सईद को अंतिम विदाई, जनाजे में शामिल हुए एक हजार से अधिक लोग
80 वर्षीय अली सईद करीब डेढ़ साल से बीमार चल रहे थे। गंभीरावस्था में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार की देर रात उनका इंतकाल हो गया था। इसके बाद उनका शव उनके पैतृक निवास बड़े काजीपुर स्थित नवाब हाउस में लाया गया था।
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1964 ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी एसएम अली सईद मंगलवार को सुपुर्दे खाक कर दिए गए। बुलाकीपुर स्थित खानदानी कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे खाक किया गया। नमाज ए जनाजा में शामिल करीब एक हजार लोगों ने अपने हीरो को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। कई दिग्गज खिलाड़ियों ने उनके घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त की। इस दौरान एसएम अली इब्राहिम, एसएम अली जावेद, एसएम अली नवेद, एसएम अली आमिर, अली हक सहित कई खिलाड़ी, समाजसेवी मौजूद रहे।
बता दें कि 80 वर्षीय अली सईद करीब डेढ़ साल से बीमार चल रहे थे। गंभीरावस्था में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार की देर रात उनका इंतकाल हो गया था। इसके बाद उनका शव उनके पैतृक निवास बड़े काजीपुर स्थित नवाब हाउस में लाया गया था।निधन की खबर के बाद रात से ही खेल प्रेमियों और शुभचिंतकों का उनके घर आना-जाना लगा था।
सभा आयोजित कर दी गई श्रद्धांजलि
एमएसआई इंटर कॉलेज में कैप्टन राधेश्याम सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को शोकसभा आयोजित की गई। इसमें खिलाड़ियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर काजिम जमील, एसवाई जफर, नियाज अहमद, आनंद सिंह, एनपी गौड़, हमजा खान, गुलाम सरवर, सैयद शमशुल हसन, अख्तर अली आदि मौजूद रहे।
हॉकी के लिए अपूरणीय क्षति : डॉ. आरपी सिंह
उप्र के खेल निदेशक और हॉकी इंडिया के पूर्व कप्तान डॉ. आरपी सिंह ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अली सईद ने गोरखपुर की पहचान न सिर्फ विश्व स्तर पर बनाई बल्कि अपने जीवन काल में अनगिनत हॉकी खिलाड़ियों को निखारा। उनके निधन से हॉकी तथा खेल जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उप्र हॉकी के उपाध्यक्ष धीरज सिंह हरीश, ओलंपियन प्रेम माया, ओलंपियन प्रीति दूबे, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी आले हैदर, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी गुलाम सरवर, जिलउर्ररहमान आदि ने भी शोक व्यक्त किया।
एमएसआई कॉलेज से की थी हॉकी की शुरुआत
एसएम अली सईद ने 1953 में एमएसआई इंटर कॉलेज से अपने हाकी जीवन की शुरुआत की थी। उच्च शिक्षा के लिए सईद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी चले गए और वहां स्नातक करने के दौरान ही उनका चयन भारतीय हाकी टीम में हो गया था। 1964 का टोक्यो ओलंपिक उनके साथ ही पूरे गोरखपुर के लिए ऐतिहासिक था। वह पहला और अंतिम ओलंपिक था, जिसमें स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम में गोरखपुर के खिलाड़ी के रूप में उनकी मौजूदगी थी। पाकिस्तान को फाइनल में मात देने में इस आउट साइड लेफ्ट खिलाड़ी का अहम योगदान रहा।