धर्म कर्म: जानिए गुरुवार को किन देवताओं की होती है आराधना, कैसे किया जाता है इनको प्रसन्न
गुरु का अर्थ भारी होता है और गरुड़ भी पक्षियों में सबसे भारी हैं। गरुड़ की सफल तपस्या के कारण गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा को समर्पित हो गया।
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हिंदू धर्म में हर दिन का अलग महत्व है। सभी देवी-देवताओं के आराधना के लिए अलग-अलग दिन बताए गए हैं। आज गुरुवार है और यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवों के गुरु बृहस्पति देव का है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और बृहस्पति की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, पक्षियों में सबसे विशाल गरुड़ ने भगवान विष्णु को कठिन तपस्या करके प्रसन्न किया था, जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने उनको अपने वाहन के रूप में स्वीकार किया। गुरु का अर्थ भारी होता है और गरुड़ भी पक्षियों में सबसे भारी हैं।
गरुड़ की सफल तपस्या के कारण गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा को समर्पित हो गया। बताया कि गुरुवार का दिन भगवान बृहस्पति की पूजा के लिए शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान बृहस्पति देवताओं के गुरू माने गए हैं और इसी तरह पीला रंग संपन्नता का प्रतीक भी है, यही वजह है कि पीला रंग इस दिन को समर्पित किया गया है।
बृहस्पतिवार पूजा का महत्व
पंडित राकेश उपाध्याय के अनुसार, गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। इस दिन भगवान विष्णु का व्रत और पूजा करने से मनोकामानाएं पूर्ण होती हैं, स्वास्थ्य लाभ होता है। बृहस्पति देव को ज्ञान का कारक माना जाता है, इसलिए विद्यार्थी यदि यह व्रत रखते हैं तो वह हर परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है।
बृहस्पतिवार की पूजा विधि
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, गुरुवार के दिन श्रद्धालु ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात पूजा घर को गंगाजल से पवित्र कर वहां भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। इसके बाद उन्हें पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, पीले चावल और धूप अर्पित करें। फिर बेसन या बूंदी लड्डू के साथ ही गुण का भोग लगाएं। इस दिन केले के पेड़ की भी पूजा करें। पूजन के बाद नारायण कवच और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।