गोरखपुर में खेल: डीएम को दरकिनार कर दागी की कराई पीएसी में ज्वाइनिंग, शासन से हटाने की सिफारिश
दो और दागियों की सरकारी विभागों में तैनाती हुई, शासन से हटाने की सिफारिश, गैंगस्टर की फाइल रोक कर घूस लेने के आरोपों से भी घिरे हैं अशोक वर्मा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ऐसे तीन मामले सामने आए हैं। इसी लिहाज से जिलाधिकारी ने अशोक वर्मा से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी को पत्र लिखकर संयुक्त निदेशक को तत्काल हटाने व कार्रवाई की सिफारिश की है।
घूस लेने के आरोपों से घिरे प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन के खिलाफ जांच चल ही रही थी कि एक और मामला सामने आ गया। तत्कालीन जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने मामले का सिलसिलेवार ढंग से पर्दाफाश किया है। जिलाधिकारी ने अपर मुख्य सचिव गृह को लिखे पत्र में कहा कि बड़हलगंज क्षेत्र के परसिया तिवारी गांव के विमलेश तिवारी के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हैं। मुकदमे न्यायालय विचाराधीन हैं। इसके बावजूद सहायक निदेशक अभियोजन अशोक वर्मा ने पीएसी के सेनानायक को पत्र भेजकर विमलेश तिवारी को कार्यभार ग्रहण करा दिया। इसकी अनुमति जिलाधिकारी से लेने की जरूरत नहीं समझी गई। नियमानुसार, जिलाधिकारी की अनुमति जरूरी होती है।
इसी तरह चौरीचौरा क्षेत्र के सोनबरसा खुर्द निवासी पवन कुमार के मामले में भी क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर विधिक राय दी गई है। पवन कुमार के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज है। आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है। इसके बावजूद पवन कुमार की नियुक्ति सरकारी महकमे में करा दी गई। गोला क्षेत्र के कोहरा बुजुर्ग निवासी देेवेश चन्द के मामले में भी ऐसे ही किया गया है। सहायक निदेशक अभियोजन अशोक वर्मा के पास जिलाधिकारी व एसएसपी से जुड़ी फाइलों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है, लेकिन वे लगातार मनमानी कर रहे हैं। सरकारी विभागों में दागी अभ्यर्थियों की तैनाती की राय दे रहे हैं।
यह है नियम
सरकारी सेवा के लिए चयनित अभ्यर्थी के खिलाफ यदि कोई मुकदमा दर्ज होता है तो तैनाती से पहले जिलाधिकारी की अनुमति जरूरी होती है। जिलाधिकारी की अनुमति के बगैर किसी अभ्यर्थी को कार्यभार नहीं ग्रहण कराया जा सकता है।गोरखपुर घूस कांड: अफसरों के खिलाफ विभागीय जांच, गाज गिरनी तय
गोरखपुर जिला बदर कपिलमुनि यादव की गैंगस्टर की फाइल रोकने, फिर उसे आगे बढ़ाने के लिए घूस लेने के आरोपों सेे घिरे प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन अशोक वर्मा और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह के खिलाफ सोमवार से विभागीय जांच शुरू हो गई।
अयोध्या के अपर निदेशक अभियोजन जय प्रकाश पांडेय गोरखपुर आए और जांच करके देर शाम लखनऊ चले गए। अपर निदेशक को 24 घंटे में ही जांच रिपोर्ट शासन को देनी है। बताया जा रहा है कि मामले में दोनों अफसरों पर गाज गिरनी तय है।
जानकारी के मुताबिक, प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन अशोक वर्मा व ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह घूसखोरी में फंसे हैं। इस मामले के वायरल वीडियो की जांच जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने एडीएम सिटी विनीत सिंह से कराई थी। जांच में घूस लेने की पुष्टि हुई। इसी का हवाला देते हुए ही जिलाधिकारी ने दोनों अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी से की है।
सूत्रों ने बताया कि घूसखोरी से जुड़े इस प्रकरण को शासन ने गंभीरता से संज्ञान लिया। गृह विभाग ने गोरखपुर के जिलाधिकारी के पत्र व एडीएम सिटी की जांच रिपोर्ट अयोध्या के अपर निदेशक अभियोजन को उपलब्ध कराई। साथ ही घूसखोरी से जुड़े वीडियो की जांच करके रिपोर्ट देने को कहा। इसी का नतीजा रहा कि जांच अधिकारी सोमवार को गोरखपुर आए। एक-एक बिंदु की पड़ताल की और आरोपियों के बयान भी दर्ज किए। देर शाम जांच करके अपर निदेशक लखनऊ रवाना हो गए। वह गृह विभाग को रिपोर्ट देंगे, फिर आगे की कार्रवाई होगी।
दीपक ने किया स्टिंग ऑपरेशन
कपिलमुनि यादव के खिलाफ खोराबार व रामगढ़ताल थाने में हत्या, हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में 11 मुकदमे दर्ज हैं। आरोप है कि कपिलमुनि ने कजाकपुर के संजय यादव की हत्या की, फिर उनके शव को खेत में गड़वा दिया। इसी खेत में गेहूं की बुआई करा दी। बाद में संजय की घड़ी बरामद हुई और हत्या में कपिलमुनि यादव को नामजद किया गया। इस मामले की पैरवी संजय के भाई दीपक यादव कर रहे हैं। दीपक का आरोप है कि कपिलमुनि जान से मारने की धमकी दे चुका है। दीपक ही कपिलमुनि के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
रामगढ़ताल पुलिस की सिफारिश पर आपत्ति
कपिलमुनि यादव को रामगढ़ताल पुलिस ने जिला बदर किया है। थाना पुलिस ने ही विधानसभा चुनाव से पहले कपिलमुनि के खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की सिफारिश की थी, लेकिन मामले में प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन व ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी ने अड़ंगा लगा दिया।
... तो और भी मामलों में लगाई आपत्ति
दीपक यादव ने अपर मुख्य सचिव गृह को जो पत्र भेजा है, उसके मुताबिक, कैंट थाने से अशफाक अहमद, शमशाद अहमद, शमशेर आलम, तनवीर खान और विवेक मद्धेशिया के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। एसएसपी, सीओ व इंस्पेक्टर स्तर से औपचारिकता भी पूरी कर दी गई, लेकिन संयुक्त निदेशक अभियोजन स्तर से आपत्ति लगा दी गई। यह सिलसिला चलता रहा, लेकिन अचानक गैंगस्टर की फाइल स्वीकृत कर दी गई।
31 जुलाई को होंगे सेवानिवृत्त
संयुक्त निदेशक अभियोजन अशोक वर्मा जुलाई में सेवानिवृत्त हो जाएंगे, लेकिन पहले ही गंभीर मामले में फंस गए। बताया जा रहा है कि अशोक वर्मा की सेवानिवृत्ति आयु 31 जुलाई को पूरी होगी।
गोरखपुर एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि कपिलमुनि यादव की गैंगस्टर से जुड़ी फाइल को दो बार आपत्ति लगाकर वापस की गई है। गैंगस्टर की फाइल तैयार है। तीसरी बार भेजी जाएगी। गैंगस्टर की कार्रवाई जरूर होगी। इस तरह के और मामले दिखवाए जाएंगे। देखा जाएगा कि किस-किस मामले में आपत्ति लगाकर फाइल वापस की गई है। गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद बदमाश को जल्दी जमानत नहीं मिलती है, लेकिन कार्रवाई में देरी का लाभ मिल जाता है। आगे से ऐसा न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा।
डीएम गोरखपुर कृष्णा करुणेश ने कहा कि पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। अब शासन स्तर से ही कार्रवाई होनी है। जैसे ही कोई आदेश मिलेगा, उसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।