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गोरखपुर में इस बीमारी से बचने के लिए लगाए जाएंगे 600 सत्रों में टीके, 21 फरवरी से चलेगा खास अभियान
Sat, 13 Feb 2021 05:44 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 13 Feb 2021 05:44 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : PTI
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मच्छर जनित बीमारी जापानीज इंसेफेलाइटिस (जेई) से बचाव के लिए गोरखपुर जिले में 21 फरवरी से विशेष अभियान शुरू होगा। इसके तहत जिले के सभी 600 ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) सत्रों पर प्रत्येक बुधवार और शनिवार को जेई का टीका लगाया जाएगा।
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इनमें नौ वर्ष से 15 वर्ष तक के वह बच्चे चिन्हित कर लाए जाएंगे, जो कोविड-19 अथवा अन्य कारणों से नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत जेई का टीका नहीं लगवा पाए हैं।
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सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि जेई से सर्वाधिक बच्चे ही प्रभावित होते हैं। ऐसे में बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी है। इस संबंध में आशा-एएनएम जमीनी स्तर पर सर्वे कर रही हैं। बताया कि नियमित सत्र में जेई का पहला टीका नौ माह से 12 माह की उम्र में लगता है, जबकि दूसरा टीका (बूस्टर डोज) 18 महीने की उम्र में लगाया जाता है। जिन बच्चों को इस आयु वर्ग में जेई का टीका नहीं लग पाया है, उन्हें इस विशेष अभियान के तहत टीका लगाया जाएगा।
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टीकाकरण कार्यक्रम के संबंध में जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को जानकारी भी दी जा चुकी है। बताया गया है कि माइक्रोप्लान में यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रह जाए। एक अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 40,000 ऐसे बच्चे हो सकते हैं जो इस विशेष अभियान से लाभान्वित होंगे।
टीकाकरण के लिए आगे आए
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज पांडेय ने बताया कि टीकाकरण कार्यक्रम का ही असर रहा है कि जेई के मामले कम हुए हैं। वर्ष 2017 में जेई के 42 मामले आए थे, इनमें से आठ की मौत हुई थी। वर्ष 2018 में संख्या घटकर 35 हो गई। इनमें केवल दो की मौत हुई। वर्ष 2019 में भी 35 मामले सामने आए थे। पांच मौतें हुईं थी। जबकि वर्ष 2020 में जेई के 13 मामले सामने आए और केवल दो मौतें रिपोर्ट की गईं।
संक्रमित मच्छर काटने से होता है यह बीमारी
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी केएन बरनवाल ने बताया कि जेई का प्रसार फ्लेविवारयस से संक्रमित मच्छर के काटने से होता है। मच्छर काटने के पांच दिन से लेकर पंद्रह दिन के भीतर यह बीमारी दिख जाती है। एक से 15 साल तक बच्चों और 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को यह बीमारी होती है। गंदे पानी, सुअरबाड़ों, धान के खेतों से इस वायरस का संक्रमण फैलता है।
संक्रमित मच्छर काटने से होता है यह बीमारी
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी केएन बरनवाल ने बताया कि जेई का प्रसार फ्लेविवारयस से संक्रमित मच्छर के काटने से होता है। मच्छर काटने के पांच दिन से लेकर पंद्रह दिन के भीतर यह बीमारी दिख जाती है। एक से 15 साल तक बच्चों और 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को यह बीमारी होती है। गंदे पानी, सुअरबाड़ों, धान के खेतों से इस वायरस का संक्रमण फैलता है।